नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। बुढ़ापा, उम्र का वो दौर जिसका आना तय है, लेकिन कोई इसे जीना नहीं चाहता। वजह ये है कि बुढ़ापे में ज्यादा लोग शारीरिक रूप से कमजोर और दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं। पूरी दुनिया में खुद को जवान रखने पर काफी रिसर्च चल रही है। ऐसे में भविष्य में बुढ़ापे को टाला जा सकता है। इसके साथ ही आर्टिफ़िशयल एंड पोर्टेबल अंग प्रत्यर्पण भी संभव हो सकेगा। भारत में इसे लेकर एक अहम खोज चल रही है, जिस पर दुनिया भर की निगाहें हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक बुढ़ापे में कैंसर, अल्जाइमर, हड्डियों की विभिन्न बीमारियों और अंगों के खराब होने की वजह से दुनिया भर में प्रतिदिन तकरीबन एक लाख लोगों की मौत हो जाती है। यही वजह है कि बुढ़ापे को रोकने के लिए भारत समेत दुनिया भर के वैज्ञानिक और रिसर्चर खोज कर रहे हैं। अब तक की रिसर्च में संकेत मिले हैं कि बुढ़ापा रोकने में कुछ खास तरह के कीड़ों और थ्री डी प्रिटेंड ऑर्गन्स (आर्टिफ़िशयल एंड पोर्टेबल अंग) की अहम भूमिका हो सकती है।

हालांकि मौत पर सभी वैज्ञानिकों की राय एक है। वैज्ञानिकों का स्पष्ट मत है कि मौत को टाला नहीं जा सकता। इंसान ज्यादा से ज्यादा कितने साल तक जिंदा रह सकता है, इस पर खोज हो सकती है, लेकिन मौत को टाल अमर होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। ऐसे में इन सभी खोजों का मुख्य उद्देश्य ये है कि जिंदगी चाहे जितनी लंबी क्यों न हो, वह स्वस्थ और खुशहाल रहे।

क्यों कमजोर कर देता है बुढ़ापा
चिकित्सकों के अनुसार एक खास उम्र तक शरीर में कोशिकाओं के बनने का सिलसिला चलता रहता है। उम्र बढ़ने पर कोशिकाओं के बनने का ये सिलसिला धीमा पड़ने लगता है। ऐसे में शरीर में बेकार कोशिकाएं एकत्र होने लगती हैं, जो बुढ़ापे की वजह बनती हैं। चिकित्सकों के अनुसार ज्यादा बीमार रहने वालों का बुढ़ापा भी जल्दी आता है।

दोगुनी हो चुकी है औसत आयु
दुनिया भर में इंसान की औसत आयु 19वीं सदी तक लगभग 40 वर्ष थी। बहुत सी जटिल बीमारियों पर काबू पाने की वजह से दुनिया भर में इंसान की औसत आयु बढ़ी है। पहले जब बहुत सी बीमारियां लाइलाज थीं तो काफी संख्या में लोगों की उन बीमारियों की वजह से कम उम्र में मौत हो जाती थी। उत्तरी यूरोप के लोगों की औसत आयु 80 साल तक पहुंच चुकी है। वैज्ञानिकों के अनुसार जल्द ही पूरी दुनिया में इंसान की औसत आयु 80 वर्ष तक हो जाएगी। इसी तरह भविष्य में इंसान बुढ़ापे को लंबे वक्त के लिए टालने में सक्षम हो जाएगा, जिससे औसत आयु में और इजाफा होगा।

दांतों में छिपा है लंबी उम्र का राज
चिकित्सकों के अनुसार स्वस्थ सेहत और लंबी उम्र का राज दांतों में छिपा है। अगर दांत मजबूत हैं तो आप कोई भी अच्छा खाना आसानी से चबाकर खा सकते हैं। अच्छा खाना खाने से सेहत और यादाश्त लंबे समय तक अच्छी होगी। अब भी लंबी आयु जीने वाले बुजुर्गों के दांत काफी उम्र तक मजबूत रहते हैं। भविष्य में इसमें और सुधार होने की उम्मीद है। वर्तमान में दुनिया की सबसे बुजुर्ग महिला होने का रिकॉर्ड फ्रांस की ज्यां लुई कालमेंट के नाम है। वर्ष 1997 में जब उनकी मौत हुई, वह 122 साल की थीं। वैज्ञानिकों के अनुसार इसके बाद के 21 वर्षों में इंसान को स्वस्थ रखने के तौर-तरीकों में काफी विकास हो चुका है।

बुढ़ापे को रोकने में मददगार होंगे आर्टिफिशियल अंग ट्रांसप्लांट
बुढ़ापे को मात देने के लिए काम कर रहे वैज्ञानिकों को रिसर्च में पता चला है कि बुजुर्गों की मौत में शरीर के नाजुक अंगों का खराब होना भी बड़ी वजह है। इसमें दिल, जिगर और गुर्दा जैसे महत्वपूर्ण अंग शामिल हैं। अंगों को जितने लंबे समय तक स्वस्थ रखा जाएगा, उतने समय तक हेल्थी लाइफ जीना संभव होगा। इसमें ऑर्गन ट्रांसप्लांट सबसे कारगर तरीका हो सकता है। पूरे विश्व में बुजुर्गों की संख्या काफी ज्यादा और अंगदान कर्ताओं की संख्या काफी कम होने की वजह से ये काफी जटिल प्रक्रिया है। डोनर और रिसीवर के अंगों का मैच न करना इसे और चुनौतीपूर्ण बना देता है।

भारत में चल रही है ये अहम खोज
आर्टिफ़िशयल एंड पोर्टेबल अंग बनाने की दिशा में भारत के बायोफिजिस्ट तुहिन भौमिक एक अहम खोज पर काम कर रहे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि मरीज का एमआरआइ और सीटी स्कैन कर उसके अंगों के सटीक साइज का पता किया जा सकता है। इसके बाद एमआरआइ और सीटी स्कैन से प्राप्त डाटा को कंप्यूटर में फीड कर उसी ठीक उसी आकार के थ्री डी प्रिटिंग के जरिए अंग बनाए जा सकते हैं। इसके लिए थ्री डी प्रिटिंग में उच्च गुणवत्ता की स्याही इस्तेमाल की जाती है, जो प्रोटीन और मरीज के शरीर की कोशिकाओं से बनी होती है। तुहिन भौमिक का मानना है कि ऐसे में इस बात के आसार बहुत कम नजर आते हैं कि इस तरह की स्याही से बने थ्री डी प्रिंटेड ऑर्टिफीशियल अंग मरीज के शरीर में सही से काम न करें। इस स्याही का थ्री डी प्रिटिंग में इस्तेमाल करने के लिए तुहिन भौमिक ने एक खास तरह की डिवाइस इजाद की है।

इस खोज से 135 साल हो सकती है उम्र
तुहिन भौमिक और उनकी टीम देश का पहला ह्यूमन लिवर टिशू बना चुकी है। अब ये लोग प्रोर्टेबल मिनिएचर लिवर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिसकी मदद से मरीज स्वस्थ इंसान की तरह कहीं भी आ जा सके। अगले 10 सालों में इनका प्रयास ऐसा ऑर्टिफीशियल लिवर बनाने का है, जिसे मरीज के शरीर में प्राकृतिक लिवर की तरह फिट किया जा सकेगा। भौमिक का अनुमान है कि अगर वह स तरह का लिवर बनाने में कामयाब रहे तो इंसान की उम्र 135 साल तक हो सकती है।

इस खोज से 200 साल तक हो जाएगी आयु
हमारे शरीर में मौजूद माइक्रोबायोम (छोटे किटाणु, बैक्टीरिया, फफूंद या वायरस) हमारे स्वास्थ्य को काफी प्रभावित करते हैं। ये माइक्रोबायोम बीमारियों का कारण होने के बावजूद हमें स्वस्थ रखने के लिए भी जरूरी हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरीका की बेलजर कॉलेज ऑफ मेडिसिन की प्रोफेसर मेंग वांग, इन माइक्रोबायोम की मदद से बुढ़ापा रोकने पर खोज कर रही हैं। इसके लिए शुरूआत में उन्होंने खास तरह के ऐसे कीड़ों को चुना जिनकी आयु बहुत कम होती है. उन्होंने इन कीड़ों की आंत में पलने वाले बैक्टीरिया को दूसरी किस्म के कीड़ों में डाल दिया। इसके बाद जिन कीड़ों को तीन हफ्ते में मर जाना चाहिए था, वो इस बैक्टीरिया की मदद से न केवल जिंदा थे, बल्कि सेहतमंद भी मिले। अब प्रोफेसर मेंग वांग यही रिसर्च चूहों पर कर रही हैं। अगर चूहों पर ये रिसर्च कामयाब रही तो इन बैक्टीरिया की मदद से ऐसी गोलियां बनाई जा सकती हैं जिनके प्रयोग से इंसान की आयु 100 से 200 वर्ष तक हो सकती है।

कोशिकाओं को स्वस्थ रखने पर हो रही खोज
कुछ देशों में ऐसे रसायन की खोज चल रही है, जिनकी मदद से बूढ़ी हो रही कोशिकाओं को फिर से जवान किया जा सके। साथ ही मौजूदा कोशिकाओं को लंबे वक्त तक बूढ़ा होने से रोका जा सके। इससे इंसान की उम्र काफी लंबी की जा सकती है। साथ ही बहुत सी बीमारियों से भी निपटा जा सकता है।

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Posted By: Amit Singh