नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। जम्‍मू कश्‍मीर में जारी सेना के ऑपरेशन ऑल आउट का अब राज्‍य में असर साफतौर पर दिखाई देने लगा है। इसके तहत अब तक करीब 230 आतंकी जिसमें टॉप कमांडर शामिल रहे हैं, ढेर किए जा चुके हैं। राज्‍य में आतंकियों के सफाए के लिए समय-समय पर सेना ने कई ऑपरेशन चलाए हैं, इनमें ऑपरेशन सर्प विनाश, ऑपरेशन काम डाउन, ऑपरेशन मेघराहत और ऑपरेशन सदभावना शामिल है। यूं तो सभी ऑपरेशन का असर घाटी में साफतौर पर दिखाई दिया है, लेकिन ऑपरेशन ऑल आउट इसमें कहीं आगे निकल गया है। वहीं दूसरी तरफ आतंकियों की कम तोड़ने वाले इस ऑपरेशन के बावजूद लगातार घुसपैठ की घटनाएं भी जारी हैं। आने वाला समय में जबकि भारी बर्फबारी देखने को मिलेगी उससे पहले पाकिस्‍तान भारत में ज्‍यादा से ज्‍यादा आतंकियों को भेजने की फिराक में बैठा है।

ऑपरेशन ऑल आउट
जहां तक ऑपरेशन ऑल आउट की बात है तो इसी तरह का ऑपरेशन वर्ष 2014 में असम में भी चलाया गया था। जम्‍मू कश्‍मीर में इस ऑपरेशन की शुरुआत पिछले वर्ष 2017 में की गई थी। इस ऑपरेशन में सेना के साथ सीआरपीएफ, बीएफएफ और आईबी साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस ऑपरेशन का मकसद राज्‍य में मौजूद लश्‍कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्‍मद, हिजबुल मुजाहिद्दीन और अल-बदर को खत्‍म करना है।

असम के बाद जम्‍मू कश्‍मीर में इस ऑपरेशन की शुरुआत को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इजाजत दी थी। यहां पर आपको बता दें कि वर्ष 2016 में जब आतंकियों ने ऊरी स्थित सेना के कैंप पर हमला कर कई जवानों की हत्‍या कर दी थी उसके बाद भारत सरकार ने न सिर्फ पाकिस्‍तान में घुसकर सर्जिकल स्‍ट्राइक करने को अनुमति दी, बल्कि राज्‍य में नासूर बन चुके आतंकियों को भी खत्‍म करने को ऑपरेशन ऑल आउट की शुरुआत को भी अनुमति दी थी। इस दौरान आतंकी बुरहान वानी को ढेर किया गया। 10 जुलाई 2017 को अमरनाथ यात्रा पर गए श्रद्धालुओं पर किए गए आतंकी हमले के बाद सेना ने आतंकियों पर जबरदस्‍त प्रहार किया।

ऑपरेशन काम डाउन
इस ऑपरेशन की शुरुआत सेना ने आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद राज्‍य में फैले तनाव को खत्‍म करने के लिए की थी। आपको बता दें कि बुरहान वानी को सेना के लंबे ऑपरेशन के बाद 8 जुलाई 2016 को मार गिराया गया था। वह 90 लोगों और दो जवानों की हत्‍या का जिम्‍मेदार था। सितंबर 2016 में शुरु किए गए इस ऑपरेशन का भी राज्‍य में असर दिखाई दिया। इस दौरान राज्‍य के तनावग्रस्‍त इलाकों में चार हजार अतिरिक्‍त जवान लगाए गए। इस दौरान सेना ने सयंम बरतते हुए हथियारों का कम इस्‍तेमाल किया था। इस दौरान दक्षिण कश्‍मीर पर सेना का ज्‍यादा जोर था। बुरहान वानी की मौत के बाद यहां के स्‍कूल, कॉलेज समेत दुकानों को भी उपद्रवियों ने फूंक डाला था। इसकी वजह से काफी समय तक दक्षिण कश्‍मीर में अशांति व्‍याप्‍त रही। ऑपरेशन काम डाउन का मकसद इसी अशांत माहौल को शांत करना था।

 

ऑपरेशन सर्प विनाश
सेना ने यह ऑपरेशन पीर पंजाल क्षेत्र के हिलकाका पुंछ-सूरनकोट में स्थित आतंकियों के कैंपों को नष्‍ट करने के लिए चलाया था। यह ऑपरेशन राज्‍य में अप्रैल-मई वर्ष 2003 में चलाया गया था। इस दौरान सेना ने 64 आतंकियों को मार गिराया था। इसमें अलग-अलग आतंकी संगठनों के आतंकी शामिल थे। यह राज्‍य में आतंकियों के खात्‍मे के लिए चलाया गया सबसे सफलतम अभियान रहा है। इस ऑपरेशन की सफलता ने आतंकियों में खलबली मचा दी थी।

यहां पर एक बात और ध्‍यान में रखने वाली है, वो ये कि पिछले कुछ वर्षों में आतंकियों ने अपने को छिपाकर रखने के लिए कुछ खास इलाके और घर तलाश कर लिए हैं। इसमें पीर पंजाल का इलाका भी शामिल है। यहां पर बने उनके बंकर और नेटवर्क एरिया को ही हिल काका के नाम से जाना भी जाता है। इस दौरान सेना को आतंकियों के पास से कुछ खास चीजें और दस्‍तावेज भी मिले। सेना ने इस अभियान की कामयाबी के लिए वहां की महिलाओं को ही जानकारी का जरिया बनाया था।

 

ऑपरेशन सदभावना
इसके तहत सेना ने अपने खिलाफ फैली नफरत को पाटने का काम किया। इसके साथ ही सेना ने राज्‍य में कई तरह के काम किए। उन्‍होंने स्‍थानीय लोगों के साथ मिलकर इलाके के लिए कई प्रोग्राम चलाए। इसमें सेना ने नारा भी दिया जिसमें कहा गया जवान और आवाम, अमन है मुकाम। इस ऑपरेशन का मकसद सेना और स्‍थानीय लोगों के बीच दूरी करना था। इस ऑपरेशन को आधिकारिक तौर पर 1998 में शुरू किया गया था। यह खासतौर एलओसी से सटे ग्रामीण इलाकों के लिए था। 

ऑपरेशन मेघ राहत
सितंबर 2014 में जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ के बाद सेना ने इंडियन एयरफोर्स के साथ मिलकर राज्‍‍‍‍‍‍यों के कई इलाकों में ऑपरेशन मेघ राहत चलाया था। इस दौरान करीब दो लाख लोगों को बाढ़ के इलाके से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। इतना ही नहीं स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर सेना ने पीडि़तों तक जरूरी राहत सामग्री भी पहुंचाई थी।
 

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Posted By: Kamal Verma

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