गन्ना किसानों को समय पर भुगतान, मिलों की बढ़ रही कमाई... इस बार बंपर हुआ चीनी का उत्पादन; क्या कम होगी कीमत?
चालू पेराई सत्र में देश का चीनी सेक्टर मजबूत स्थिति में है, जिससे किसानों और उपभोक्ताओं को लाभ मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 तक 1340 लाख टन गन्ने की पेरा ...और पढ़ें

499 चीनी मिलों ने करीब 1340 लाख टन गन्ने की पेराई कर ली है
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश का चीनी सेक्टर इस बार मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है और इसका फायदा सीधे किसानों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है। चालू पेराई सत्र में गन्ने की पेराई तेज हुई है और चीनी उत्पादन में साफ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 31 दिसंबर 2025 तक देश की 499 चीनी मिलों ने करीब 1340 लाख टन गन्ने की पेराई कर ली है।
यह पिछले साल की समान अवधि से करीब 237 लाख टन ज्यादा है। अधिक पेराई का सीधा मतलब है ज्यादा चीनी उत्पादन। इसी अवधि में 118 लाख टन नई चीनी तैयार हुई है, जो साल भर पहले से 23 लाख टन अधिक है। केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि चीनी निकालने की क्षमता यानी रिकवरी रेट में भी सुधार हुआ है।
इस साल औसतन 8.83 प्रतिशत रिकवरी
इस साल औसतन 8.83 प्रतिशत रिकवरी दर्ज की गई है, जो पिछले साल की तुलना में 0.16 प्रतिशत ज्यादा है। यह भले ही छोटा आंकड़ा लगे, लेकिन बड़े पैमाने पर इसका अर्थ लाखों टन अतिरिक्त चीनी उत्पादन से है। इसका फायदा है कि उतने ही गन्ने से अब ज्यादा चीनी बन रही है। इससे मिलों की कमाई बढ़ रही है और किसानों का भुगतान भी समय पर हो पाएगा।
बेहतर किस्मों के गन्ने, मौसम की अनुकूलता और मिलों की तकनीकी क्षमता में सुधार इसके पीछे प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। पूरे 2025-26 पेराई सत्र को लेकर तस्वीर और भी बेहतर बताई जा रही है। एथेनाल बनाने के लिए करीब 35 लाख टन चीनी को अलग करने के बाद भी देश में 315 लाख टन शुद्ध चीनी उत्पादन का अनुमान है। यह पिछले साल की तुलना में 53.20 लाख टन ज्यादा है।
बाजार में चीनी की कमी की आशंका नहीं
इसका मतलब यह है कि बाजार में चीनी की कमी की आशंका फिलहाल नहीं है और उपभोक्ताओं को कीमतों में बड़े उछाल का डर कम रहेगा। गन्ना उत्पादन के मोर्चे पर भी किसानों के लिए राहत की खबर है। पिछले कुछ वर्षों में गन्ने का कुल उत्पादन लगातार बढ़ा है। 2025-26 के शुरुआती अनुमान बताते हैं कि उत्पादन 4756 लाख टन से ज्यादा पहुंच सकता है। ज्यादा पैदावार का मतलब है किसानों की फसल बिकने की बेहतर संभावना।
किसानों के लिए सबसे अहम सवाल गन्ने के भुगतान का होता है। चीनी सेक्टर की मजबूती का सीधा असर इसी पर पड़ता है। केंद्र सरकार की नीतियों जैसे समय पर एफआरपी (उचित और लाभकारी मूल्य) तय करना, अतिरिक्त चीनी को एथेनाल में बदलने की अनुमति और निर्यात से जुड़े फैसलों से मिलों की आर्थिक हालत सुधरी है। इसका नतीजा यह हुआ है कि कई राज्यों में किसानों को भुगतान पहले की तुलना में जल्दी मिल रहा है।
एफआरपी में लगातार बढ़ोतरी ने भी किसानों को भरोसा दिया है। कुछ साल पहले गन्ने का एफआरपी 285 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर 355 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। उत्पादन बढ़ने और दाम बेहतर मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा मिला है।

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