नई दिल्ली, एजेंसियां। समाचार एजेंसी एएनआइ के अनुसार चीन और भारत के बीच झड़प में भारत के कमांडिंग ऑफिसर समेत 20 सैनिक शहीद हो गए हैं। चीन के लगभग 43 सैनिक हताहत होने का अनुमान है। इसमें कुछ मारे गए हैं, जबकि कई गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हालांकि अभी यह आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। प्रधानमंत्री आवास पर सीसीएस की बैठक खत्म हो गई है। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद थे। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बीच बैठक हुई।

भारत और चीनी सैनिकों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC)पर हिंसक झड़प को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा कि 15 जून को चीन की ओर से स्थिति बदलने के प्रयास के परिणामस्वरूप ऐसा हुआ। इसमें दोनों पक्षों को नुकसान हुआ, जिससे बचा जा सकता था। भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में सीमा क्षेत्र में सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से पीछे हटने की प्रक्रिया पर चर्चा कर रहे हैं। सीमा प्रबंधन को लेकर जिम्मेदार रवैये के मद्देनजर भारत सभी काम एलएसी में अपनी सीमा के अंदर ही करता है। चीन से भी ऐसी ही उम्मीद रखता है। भारत सीमा पर शांति बनाए रखने और बातचीत के माध्यम से मतभेदों के समाधान को लेकर आश्वस्त है। भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। सीमा पर जारी हालिया तनाव के बीच पेइंचिंग में चीनी उप विदेश मंत्री लुओ झाओहुई से भारतीय राजदूत विक्रम मिसरी ने मुलाकात की।

इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर विदेश मंत्री एस जयशंकर, सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे रक्षा मंत्री और सीडीएस जनरल बिपिन रावत के बीच दूसरी बैठक हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बैठक से पूर्व पीएम मोदी को हालात की जानकारी दी। समाचार एजेंसी एएनआइ के अनुसार इसे लेकर गृह मंत्रालय में भी बैठक हुई। इसमें आइटीबीपी के डीजी एसएस देशवाल शामिल हुए।

India China Border News: 

- प्रधानमंत्री आवास पर सीसीएस की बैठक खत्म हो गई है। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद थे। पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बीच बैठक हुई।

- गलवन घाटी में हिंसक झड़प की घटना को देखते हुए हिमाचल प्रदेश में भी चीन के सीमावर्ती क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। हिमाचल पुलिस ने सूबे की खुफिया एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। किन्नौर और लाहौल स्पीति के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। वहीं, आईटीबीपी के जवानों के अतिरिक्त हिमाचल पुलिस के सिपाहियों को भी तैनात किया जाएगा।

- इस पूरी घटना पर भारतीय सेना ने बयान जारी किया है। सेना ने कहा कि 15 जून की रात को गलवन घाटी इलाके में हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में 20 सैनिक शहीद हुए हैं।

- चीन के लगभग 43 सैनिक हताहत होने का अनुमान है। इसमें कुछ मारे गए हैं, जबकि कई गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंंसक झड़प

बता दें कि गलवन घाटी में पीछे हटने की प्रक्रिया के दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। शुरुआत में भारतीय सेना के एक कमांडिंग ऑफिसर समेत तीन भारतीय सैन्यकर्मियों की शहीद होने की खबर आई। वहीं, दूसरी तरफ चीनी सेना के भी पांच सैनिकों के मारे जाने और 11 जवानों के गंभीर तौर पर घायल होने की सूचना मिली थी। चीन की सेना की तरफ से कोई पुष्टि नहीं हुई, लेकिन चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के वरिष्ठ पत्रकार ने सोशल साइट पर यह जानकारी दी थी कि चीनी पक्ष को भी भारी क्षति उठानी पड़ी है।

16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू शहीद हुए

16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू पेट्रोलिंग पॉइंट 14 के पास गलवन घाटी इलाके में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में शहीद हुए। भारतीय सेना के सूत्रों ने इसकी जानकारी दी।

हरकतों से बाज नहीं आ रहा चीन

बहरहाल, चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। वह मामले को लेकर उल्टे भारत पर आरोप लगा रहा है। समाचार एजेंसी एएनआइ के अनुसार ग्लोबल टाइम्स ने जानकारी दी कि चीनी सेना  (पीपल्स लिबरेशन आर्मी) के वेस्टर्न थियेटर कमांड के प्रवक्ता ने मंगलवार को भारतीय सेना पर सीमा पार कर हमला करने का आरोप लगाया। 

चीनी विदेश मंत्रालय का बयान

इससे पहले चीन के विदेश मंत्रालय ने भी इड़प को लेकर दोष पूरी तरह से भारतीय सेना पर डालने का काम किया। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सोमवार को भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा का गंभीर तौर पर उल्लंघन किया है। उन्होंने चीन के क्षेत्र में घुस कर चीनी सैनिकों पर हमला किया है। आगे यह भी कहा है कि भारत व चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए व एलएसी पर शांति व स्थायित्व बहाली के लिए सहमत हैं। भारतीय पक्ष की तरफ से भी बताया गया है कि हालात बिगड़ने के बाद दोनो पक्षों के बीच जमीनी तौर पर बातचीत जारी है, ताकि तनाव को खत्म किया जा सके। 

पिछले कई दशकों से नहीं हुई ऐसी झड़प

भारत चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों देशों के जवानों के बीच धक्का-मुक्की कोई नई बात नहीं है, लेकिन दोनों पक्षों की तरफ से पिछले चार दशकों से इस बात का ख्याल रखा जाता रहा है कि किसी जानमाल का नुकसान ना हो। सोमवार देर शाम कई घंटों तक गलवन क्षेत्र में दोनों तरफ से जिस तरह से झड़प हुई है वैसी झड़प पिछले कई दशकों से नहीं हुई थी। इससे पहले एलएसी पर 45 वर्ष पहले 1975 में चीन के सैनिकों ने भारतीय सीमा में पैट्रोलिंग कर रहे असम राइफल्स के जवानों पर घात लगा कर हमला किया था और चार भारतीय जवान शहीद हो गए थे।

विवाद सुलझाने के मद्देनजर दोनों देशों के बीच बातचीत

चीन के सैन्य जमावड़े को लेकर विवाद सुलझाने के मद्देनजर दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में ब्रिगेड कमांडर और बटालियन कमांडर स्तर की वार्ता जारी है। सैन्य सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच लगातार कई दौर की वार्ता जारी रहने से कई और स्थानों पर दोनों देशों की सेनाएं सीमित रूप से पीछे हटी हैं। इसी दौरान अब यह हिंसक झड़प की खबर सामने आई है।

महीने की शुरुआत से ही माहौल तनावपूर्ण 

बता दें कि भारत और चीन के बीच पिछले महीने की शुरुआत से ही लद्दाख बॉर्डर के पास माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ था। मई महीने के शुरुआत में चीनी सैनिकों ने भारत द्वारा तय की गई एलएसी को पार कर लिया था। चीनी सैनिकों ने पेंगोंग झील, गलवन घाटी के पास आकर अपने तंबू लगा लिए थे। खबरों के मुताबिक, यहां पर करीब पांच हजार सैनिकों को तैनात किया गया था, इसके अलावा सैन्य सामान भी इकट्ठा किया गया था।

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