भारत में हर साल 15% तक अनाज नष्ट होता है, इसे सुधारने से मजबूत होगी खाद्य सुरक्षा

एफएओ के 2021 के आकलन के अनुसार अनाज का नुकसान कुल उत्पादन का 11 से 15 प्रतिशत है। मात्रा के लिहाज से यह 275 से 375 लाख टन होता है। स्थानीय स्तर पर स्ट...और पढ़ें
एस.के. सिंह जागरण न्यू मीडिया में सीनियर एडिटर हैं। तीन दशक से ज्यादा के करियर में इन्होंने कई प्रतिष्ठित संस्थानों में ...और जानिए
जागरण प्राइम टीम। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के अनुसार सप्लाई चेन की कमी के कारण भारत में हर साल 11-15% अनाज नष्ट हो जाते हैं। दूसरी ओर, 2011 की जनगणना के अनुसार देश की 14.37% आबादी कुपोषण की शिकार है। ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में खाद्य सुरक्षा के लिए भंडारण क्षमता विकसित करने की कितनी जरूरत है। विशेषज्ञों के अनुसार केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को कोऑपरेटिव क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी अनाज भंडारण क्षमता तैयार करने का जो फैसला किया, उसे इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
खाद्य पदार्थों का नुकसान दो तरीके से होता है। एक तो उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले, और दूसरा उपभोक्ता के स्तर पर। डब्लूआरआई इंडिया की फूड लॉस एंड वेस्ट प्रोग्राम मैनेजर डॉ. नित्या शर्मा बताती हैं, भारत में फूड ग्रेन स्टोरेज मैनेजमेंट में कई चुनौतियां हैं, जिनकी वजह से अनाज का काफी नुकसान होता है। यह हमारी खाद्य सुरक्षा को भी प्रभावित करती है। इससे किसानों और ट्रेडर्स को भी आर्थिक नुकसान होता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और प्रभावित होती है। वे कहती हैं, “एफएओ के 2021 के आकलन के अनुसार अनाज का नुकसान कुल उत्पादन का 11 से 15 प्रतिशत है। मात्रा के लिहाज से यह 275 से 375 लाख टन होता है। स्थानीय स्तर पर स्टोरेज क्षमता विकसित करने से अनाज का नुकसान कम होगा और देश में खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी। सुरक्षित स्टोरेज के साथ अगर इस नुकसान को कम किया जाए तो देश की 10% खाद्य जरूरत पूरी की जा सकती है।”
उत्तर प्रदेश के हापुड़ स्थित इंडियन ग्रेन स्टोरेज मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (IGMRI) के अनुसार अवैज्ञानिक भंडारण, कीटों, चूहों और माइक्रो ऑर्गेनिज्म आदि के कारण कुल उत्पादन का 10% खाद्यान्न नष्ट हो जाता है। IGMRI उपभोक्ता मामले और खाद्य मंत्रालय के अधीन काम करता है। इसके मुताबिक "हर साल स्टोरेज नुकसान 1.4 करोड़ टन के आसपास है जिसकी वैल्यू लगभग 7,000 करोड़ रुपये होती है। वर्ल्ड बैंक के अनुसार यह मात्रा भारत के एक-तिहाई गरीबों को खिलाने के लिए काफी है। कीटों से होने वाला नुकसान 2% से 4.2% है, चूहे 2.5% अनाज नष्ट करते हैं, पक्षी 0.85% अनाज चुग जाते हैं। इसके अलावा 0.68% अनाज नमी के कारण बर्बाद हो जाता है।"
700 लाख टन की भंडारण क्षमता विकसित होगी


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