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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 01, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Hit And Run Law: नए 'हिट एंड रन' कानून को लेकर ड्राइवर क्यों कर रहे विरोध? पढ़ें संशोधन के बाद क्या-क्या हुआ बदलाव

By Jagran News Edited By: Siddharth Chaurasiya
Published: Mon, 01 Jan 2024 04:01 PM (IST)

केंद्र सरकार द्वारा लाये जा रहे हिट एंड रन के नए कानून को लेकर कई राज्यों में ट्रक ड्राइवरों और ...और पढ़ें

नए कानून के विरोध में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और यूपी के ड्राइवरों ने चक्काजाम करना शुरू कर दिया है।
नए कानून के विरोध में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और यूपी के ड्राइवरों ने चक्काजाम करना शुरू कर दिया है।

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा लाये जा रहे 'हिट एंड रन' के नए कानून को लेकर कई राज्यों में ट्रक ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स द्वारा चक्काजाम किया जा रहा है। नए कानून के विरोध में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और यूपी, बिहार के ड्राइवरों ने शनिवार से ही चक्काजाम करना शुरू कर दिया है। केंद्र सरकार द्वारा सड़क हादसों पर नियंत्रण करने के लिए 'हिट एंड रन' कानून में बदलाव किया जा रहा है। ड्राइवर इस कानून को लाने का विरोध कर रहे हैं। दरअसल, इंडियन पीनल कोड, 2023 में हुए संशोधन के बाद एक्सीडेंट होने पर ड्राइवर को 10 साल की सजा और 7 लाख के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

इस संशोधन का ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) ने भी विरोध किया है। एआईएमटीसी के अध्यक्ष अमृतलाल मदान ने कहा, "यह नियम आने के बाद भारी वाहन चालक अपनी नौकरियां छोड़ रहे हैं।" उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता 2023 में एक्सीडेंट में दोषी वाहन चालकों को 10 साल की सजा का प्रावधान है, जो कि हमारे परिवहन उद्योग को खतरे में डाल रहा है।" उन्होंने कहा कि "भारत की सड़क परिवहन बिरादरी भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत हिट एंड रन के मामलों पर प्रस्तावित कानून के तहत कठोर प्रावधानों के संबंध में सहमति नहीं जताती है।"

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ड्राइवरों को क्यों हो रही परेशानी?

'हिट एंड रन' के नए कानून में में 10 साल की सजा के प्रावधान के बाद अब ड्राइवर नौकरी छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। एआईएमटीसी के अनुसार, कानून में संशोधन से पहले स्टेक होल्डर्स से सुझाव नहीं लिए गए, प्रस्तावित कानून में कई खामियां हैं। अमृतलाल मदान ने बताया कि देशभर में पहले से ही 25-30 प्रतिशत ड्राइवरों की कमी है,तरह के कानून से ड्राइवरों की और कमी बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि ड्राइवरों की परेशानी की तरफ सरकार का ध्यान नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान रोड ट्रांसपोटर्स और ड्राइवरों का है।

एआईएमटीसी ने क्या कहा?

एआईएमटीसी का कहना है कि देश में एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन प्रोटोकॉल का अभाव है। इसके कारण मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो पाती और ड्राइवर को दोषी करार दिया जाता है। दुर्घटनास्थल से भागने की किसी ड्राइवर की मंशा नहीं होती है, लेकिन आसपास जमा भीड़ से बचने के लिए ऐसा करना पड़ता है।

एआईएमटीसी मध्य प्रदेश शाखा के प्रमुख राकेश तिवारी ने कहा, "हमने राष्ट्रीय स्तर के निकाय को अपना समर्थन दिया है। देश में लगभग 95 लाख ट्रकों में से राज्य में लगभग 5 लाख ट्रक हैं जो करोड़ों लोगों के लिए रोजगार पैदा करते हैं। इस तरह का एकतरफा और बिना सोचे-समझे प्रावधान उन्हें हतोत्साहित कर रहा है। उन्होंने कहा कि एआईएमटीसी अगले एक सप्ताह में देशभर में नए प्रावधान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अपनी आगे की रणनीति तय करेगी।

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पहले क्या था कानून और अब संशोधन क्या होगा?

हिट एंड रन मामले को आईपीसी की धारा 279 (लापरवाही से वाहन चलाना), 304A (लापरवाही के कारण मौत) और 338 (जान जोखिम में डालना) के तहत केस दर्ज किया जाता है। इसमें दो साल की सजा का प्रावधान है। विशेष केस में आईपीसी की धारा 302 भी जोड़ दी जाती है।

संशोधन के बाद सेक्शन 104 (2) के तहत हिट एंड रन की घटना के बाद यदि कोई आरोपी घटनास्थल से भाग जाता है। पुलिस या मजिस्ट्रेट को सूचित नहीं करता है, तो उसे 10 साल तक की सजा भुगतनी होगी और जुर्माना देना होगा।

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