10 करोड़ तक के कर्ज की गारंटी लेगी सरकार, ब्याज में मिलेगी छूट; इन लोगों को होने जा रहा बड़ा फायदा
सरकार ने एमएसएमई निर्यातकों के लिए दो नई प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की हैं। पहली योजना में विशिष्ट वस्तुओं के निर्यात ...और पढ़ें

यह योजना पायलट के आधार पर शुरू की जा रही है
HighLights
एमएसएमई निर्यातकों को ऋण ब्याज पर 2.75% छूट।
सरकार 10 करोड़ तक के ऋण की गारंटी लेगी।
योजनाओं से निर्यात और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन से जुड़ी निर्यात प्रोत्साहन स्कीम के तहत सरकार ने नए साल में एमएसएमई निर्यातकों के लिए दो योजनाएं लांच की है। निर्यात प्रोत्साहन से जुड़ी इन दोनों स्कीम का संचालन वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय, एमएसएमई व वित्त मंत्रालय की देखरेख में किया जाएगा।
वाणिज्य विभाग की तरफ से शुक्रवार को दी गई जानकारी के मुताबिक पहली योजना के तहत एमएसएमई निर्यातकों को लोन की ब्याज दरों पर 2.75 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। लेकिन यह छूट सरकार की तरफ से जारी आइटम के निर्यात पर ही दी जाएगी। वाणिज्य विभाग के मुताबिक इन आइटम की सूची जारी की जाएगी। अभी यह योजना पायलट के आधार पर शुरू की जा रही है।
सरकार लेगी कर्ज की गारंटी
रक्षा क्षेत्र के आइटम के एमएसएमई निर्यातकों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। स्कीम के मुताबिक निर्यातकों को शिपमेंट के पहले व शिपमेंट के बाद दोनों कर्ज की ब्याज दरों पर छूट दी जाएगी। इसका मकसद निर्यात होने वाली वस्तुओं की निर्माण लागत को कम करना है ताकि वे वैश्विक बाजार में अन्य देशों से मुकाबला कर सके। दूसरी स्कीम के तहत सरकार एमएसएमई निर्यातकों द्वारा लिए जाने वाले कर्ज की गारंटी लेगी।
माइक्रो व स्मॉल निर्यातक की श्रेणी में आने वालों के 85 प्रतिशत कर्ज तो मीडियम निर्यातकों के 65 प्रतिशत कर्ज की गारंटी सरकार लेगी। एक वित्त वर्ष में एक निर्यातक के अधिकतम 10 करोड़ तक के कर्ज की ही सरकार गारंटी लेगी। इस संबंध में जल्द ही विस्तृत गाइडलाइंस जारी कर दी जाएगी। मुख्य रूप से रोजगारपरक सेक्टर से जुड़े निर्यात को दोनों स्कीम की सुविधा दी जाएगी। पिछले साल नवंबर में सरकार ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन को मंजूरी दी थी।
इसके तहत सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 से लेकर 2030-31 तक के दौरान निर्यात प्रोत्साहन के लिए 25,000 करोड़ के इंसेंटिव देगी। वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी को बढ़ाने के लिए वस्तु निर्यात में बढ़ोतरी आवश्यक है। इससे देश में मैन्यूफैक्चरिंग एवं रोजगार दोनों को प्रोत्साहन मिलेगा।
