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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 30, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

'150 से ज्यादा सांसद रूस के पैसे पर पलते थे', निशिकांत दुबे का कांग्रेस पर बड़ा आरोप; बोले- बिचौलियों की कठपुतली बन गया था देश

Published: Mon, 30 Jun 2025 11:40 AM (IST)Updated: Mon, 30 Jun 2025 11:41 AM (IST)

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर सीआईए के एक पुराने दस्तावेज के हवाले से गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने ...और पढ़ें

निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि 150 कांग्रेस सांसद रूस के 'एजेंट' की तरह काम करते थे। (फोटो सोर्स- पीटीआई)
निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि 150 कांग्रेस सांसद रूस के 'एजेंट' की तरह काम करते थे। (फोटो सोर्स- पीटीआई)

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली।  भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला है। उन्होंने अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के 2011 में जारी एक दस्तावेज का हवाला देते हुए दावा किया कि कांग्रेस के दिवंगत नेता हरिकिशन लाल भगत (HKL Bhagat) की अगुवाई में 150 से ज़्यादा कांग्रेस सांसदों को सोवियत रूस ने फंडिंग की थी।

बीजेपी नेता का कहना है कि ये सांसद रूस के 'एजेंट' की तरह काम करते थे। उन्होंने अपने 'एक्स' पोस्ट में इस दस्तावेज को साझा करते हुए कांग्रेस से जवाब मांगा है कि क्या इसकी जांच होनी चाहिए या नहीं।

निशिकांत दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि उस दौर में रूस ने 16,000 खबरें छपवाकर भारत में अपनी पैठ बनाई थी। इसके साथ ही, रूसी खुफिया एजेंसी के 1100 लोग भारत में मौजूद थे। दावा किया गया कि ये खुफिया रूसी अधिकारी नौकरशाहों, कारोबारी संगठनों, कम्युनिस्ट पार्टियों और ओपिनियन मेकर को अपनी जेब में रखते थे।

पत्रकारों पर भी गंभीर आरोप

निशिकांत दुबे ने अपने पोस्ट में दावा किया कि उस वक्त कई पत्रकार भी रूस के 'एजेंट' थे। उनके मुताबिक, सीआईए के दस्तावेज में 16,000 समाचार लेखों का जिक्र है, जो रूस ने भारत में छपवाए थे। ये लेख भारत की नीतियों और जनमत को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल किए गए।

उन्होंने ये भी कहा कि रूसी खुफिया एजेंसी के लोग भारत में नौकरशाहों और कारोबारियों को अपने जाल में फंसाकर देश की नीतियों को प्रभावित करते थे।

सुभद्रा जोशी पर भी सवाल

बीजेपी सांसद ने कांग्रेस की उम्मीदवार सुभद्रा जोशी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सुभद्रा जोशी ने सोवियत रूस के दौर में जर्मन सरकार से चुनाव के लिए 5 लाख रुपये लिए थे। चुनाव हारने के बाद वे इंडो-जर्मन फोरम की अध्यक्ष बनीं। दुबे ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या कांग्रेस को इन सवालों का जवाब देना चाहिए?

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