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    Coldwave: फ्रीजिंग प्वाइंट से नीचे लुढ़का कश्मीर का पारा, गुलमर्ग में -9 डिग्री दर्ज किया गया तापमान

    By AgencyEdited By: Piyush Kumar
    Updated: Tue, 24 Jan 2023 04:44 PM (IST)

    मंगलवार को पूरे कश्मीर का पारा फ्रीजिंग प्वाइटं से नीचे लुढ़क गया। वहीं गुलमर्ग में माइनस 9 (Minus 9) डिग्री तापमान दर्ज किया गया। घाटी के प्रवेश द्वा ...और पढ़ें

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    मंगलवार को जम्मू कश्मीर का पारी फ्रीजिंग प्वाइंट से नीचे चला गया। (फोटो सोर्स: जागरण)

    श्रीनगर, एजेंसी। देश के कई पहाड़ी इलाकों में बारिश और बर्फबारी हो रही है। इसी बर्फबारी और बदलते मौसम की वजह से मंगलवार को पूरे कश्मीर का पारा फ्रीजिंग प्वाइटं से नीचे लुढ़क गया। वहीं, गुलमर्ग में माइनस 9 (Minus 9) डिग्री तापमान दर्ज किया गया। श्रीनगर में न्यूनतम तापमान शून्य से 2.3 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया।

    अधिकारियों ने कहा कि घाटी के प्रवेश द्वार काजीगुंड में न्यूनतम तापमान शून्य से 0.6 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। वहीं, अधिकारियों ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि दक्षिण कश्मीर के कोकेरनाग में न्यूनतम तापमान शून्य से 3.5 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा, जबकि कुपवाड़ा में न्यूनतम तापमान शून्य से 3.4 डिग्री नीचे दर्ज किया गया।

    स्की रिसॅार्ट रही सबसे ठंडी वाली जगह

    बारामूला जिले के गुलमर्ग में न्यूनतम तापमान शून्य से 9.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। बता दें कि जम्मू कश्मीर में मौजूद स्की-रिसॅार्ट, सबसे ज्यादा ठंडा वाला स्थान रहा। पहलगाम में न्यूनतम तापमान शून्य से 8.6 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जो पिछली रात की तुलना में चार डिग्री कम था।

    बता दें कि इस स्थान पर वार्षिक अमरनाथ यात्रा के लिए आधार शिविर बनाया जाता है। मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार को छोड़कर अगले पांच दिनों में केंद्र शासित प्रदेश में छिटपुट स्थानों पर हल्की बारिश या बर्फबारी की संभावना है।

    घाटी में 'चिल्लई कलां' का मौसम जारी है

    मौसम विभाग ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि कश्मीर के मैदानी इलाकों में बुधवार तक मध्यम बर्फबारी और मध्यम से भारी बर्फबारी और जम्मू में बारिश की संभावना है। गौरतलब है कि इस समय कश्मीर में 'चिल्लई कलां' मौसम चल रहा है। तकरीबन 40 दिनों तक जम्मू कश्मीर में कड़ाके की ठंड, ठंडी हवाएं, भारी बर्फबारी होती है।

    इस वक्त तापमान माइनस से भी काफी नीचे चला जाता है और यहां झीलें पूरी तरह से जम जाती हैं। चिल्लई कलां 21 दिसंबर से शुरू होती है और 30 जनवरी को समाप्त होती है। इसके बाद भी शीत लहर जारी रहती है और इसके बाद 20 दिन का 'चिल्लई खुर्द' और 10 दिन का 'चिल्लई बच्चा' चलता है।

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