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    पड़ोसी देश सीधे सीआईएल से खरीदेंगे कोयला. कोल इंडिया लिमिटेड ने आसान बनाया नियम; किसे होगा फायदा?

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 10:00 PM (IST)

    सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने पड़ोसी देशों बांग्लादेश, भूटान और नेपाल को अपनी ऑनलाइन कोयला नीलामी में सीधे भाग लेने की अनुमति दी है। यह ...और पढ़ें

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    पड़ोसी देशों के खरीदारों को नीलामी में सीधे भाग लेने की अनुमति

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने ऑनलाइन कोयला नीलामी में पड़ोसी देशों के खरीदारों को सीधे भाग लेने की अनुमति दे दी है। अब बांग्लादेश, भूटान और नेपाल के उपभोक्ता भारतीय व्यापारियों के माध्यम से जाने की बजाय खुद नीलामी में बोली लगा कर, भारतीय कोयला खरीद लेंगे।

    कंपनी का कहना है कि यह फैसला अतिरिक्त कोयला संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लिया गया है। पहले इन देशों के खरीदार केवल भारतीय व्यापारियों के जरिए ही कोयला खरीद सकते थे, जो बिना किसी अंतिम उपयोग प्रतिबंध के खरीद-बिक्री कर सकते थे। इस तरह से सीधे कोयला खरीदने से इन देशों को फायदा भी होगा। इस फैसले से सबसे ज्यादा नेपाल और बांग्लादेश को फायदा होगा क्योंकि वहां सबसे ज्यादा भारतीय कोयला जाता है।

    नीलामी को विदेशी खरीदारों के लिए खोल दिया

    कोल इंडिया ने बताया है कि एक जनवरी, 2026 से प्रभावी इस नई व्यवस्था के तहत सिंगल विंडो मोड एग्नोस्टिक (एसडब्ल्यूएमए) नीलामी को विदेशी खरीदारों के लिए खोल दिया है। एसडब्ल्यूएमए एक एकीकृत ई-नीलामी प्रणाली है, जो 2022 में शुरू की गई थी और विभिन्न नीलामी विंडो को एक मंच पर लाकर खरीद प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और बाजारोन्मुक बनाया है। कंपनी के बोर्ड ने हाल ही में इस बदलाव को मंजूरी दी और योजना में आवश्यक संशोधन किए हैं।

    हालांकि कंपनी इस बात का ध्यान रखेगी कि भारतीय जरुरतों को पूरा करते हुए पड़ोसी देशों को कोयला दिया जाए। यह फैसला देश में कोयला उत्पादन में अपेक्षाकृत वृद्धि और भारतीय बाजार में कोयले की मांग में कमी आने की संभावना को देखते हुए किया गया है। जबकि एक आकलन है कि बांग्लादेश में निकट भविष्य में कोयले की मांग बढ़ेगी। पड़ोसी देश की मांग पर कोल इंडिया की नजर है।

    घरेलू खरीदारों के साथ बोली लगा सकेंगे

    नई व्यवस्था में विदेशी खरीदार घरेलू खरीदारों के साथ बोली लगा सकेंगे। इसमें वन-टाइम रजिस्ट्रेशन, डिजिटल बिडिंग, इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट और नामित लॉजिस्टिक्स चैनल्स के माध्यम से निर्यात की सुविधा शामिल है। भुगतान प्रक्रिया फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के अनुसार होगी, जहां नेपाल के खरीदार भारतीय रुपये या अमेरिकी डॉलर में भुगतान कर सकेंगे, जबकि अन्य दो देशों के लिए अमेरिकी डॉलर अनिवार्य है, जिसकी वैल्यू रुपये में होगी।

    सीआइएल ने इस बारे में पहले ही विदेशी खरीदारों से विमर्श कर लिया है, उसके बाद ही नियम को अंतिम रूप दिया गया है। इससे नेपाल के उपभोक्ताओं को सीधे सस्ता और पारदर्शी कोयला मिल सकेगा, जो उनकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा।

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