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रेस्टोरेंट में सर्विस चार्ज देना जरूरी है क्या? जानिए सरकारी नियम

Published: Fri, 02 Jan 2026 07:23 PM (IST)

मुंबई के एक रेस्टोरेंट पर सर्विस चार्ज लगाने के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में है। CCPA के अनुसार, रेस्टोरेंट ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मुंबई के एक रेस्टोरेंट पर सर्विस चार्ज जोड़ने के लिए जुर्माना लगने के बाद रेस्टोरेंट बिल में सर्विस चार्ज फिर से चर्चा का विषय बन गया है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर कई कस्टमर्स के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या सर्विस चार्ज देना जरूरी है और क्या कोई रेस्टोरेंट इसके लिए जोर दे सकता है?

कंज्यूमर प्रोटेक्शन की गाइडलाइंस के बावजूद भ्रम बना हुआ है और कई कस्टमर्स काउंटर पर बहस से बचने के लिए एक्स्ट्रा पैसे देते रहते हैं। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने साफ कहा है कि सर्विस चार्ज अपने आप नहीं जोड़ा जा सकता और यह हमेशा वैकल्पिक होना चाहिए। खाना खाने वालों के लिए यह फर्क जानना जरूरी है। तो आइए जानते हैं पूरी डिटेल-

सर्विस चार्ज असल में है क्या?

सर्विस चार्ज वह रकम है जो कोई रेस्टोरेंट अपने स्टाफ द्वारा दी गई सर्विस के लिए जोड़ता है। यह कोई टैक्स नहीं है और इसे सरकार नहीं लगाती है। सर्विस चार्ज वॉलंटरी होता है और कस्टमर की मर्जी पर निर्भर करता है, जैसे टिप। समस्या तब आती है जब रेस्टोरेंट इस चार्ज को अपने आप जोड़ देते हैं, जिससे यह जरूरी लगने लगता है।

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CCPA ने दखल क्यों दिया?

CCPA के अनुसार, उसे नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन के जरिए ऐसे खाने वालों से बड़ी संख्या में शिकायतें मिलीं, जिनसे बिना बताए सर्विस फीस ली गई थी, जबकि उन्हें यह नहीं बताया गया था कि यह ऑप्शनल है। अथॉरिटी ने पाया कि-

  • सर्विस चार्ज अक्सर बिल में अपने आप जोड़ दिए जाते थे।
  • कभी-कभी वे अलग-अलग नामों से चार्ज लगाए जाते थे।
  • अगर ग्राहक विरोध करते थे तो उन पर पैसे देने का दबाव डाला जाता था या उन्हें सर्विस देने से मना कर दिया जाता था।
  • सर्विस चार्ज के ऊपर GST भी लगाया जा रहा था।

CCPA ने यह निष्कर्ष निकाला कि ये तरीके कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के तहत अनुचित व्यापार प्रथाओं के दायरे में आते हैं।

दिशानिर्देशों के पीछे के मुख्य सिद्धांत

ये गाइडलाइंस एक आसान से आइडिया पर बनी हैं। मेन्यू में बताई गई कीमत में पहले से ही सर्विस का बेसिक खर्च शामिल है। जब कोई कस्टमर ऑर्डर देता है तो वह खाने और ड्रिंक्स की मेन्यू कीमत, साथ ही लागू सरकारी टैक्स (जैसे GST) देने के लिए सहमत होता है। इसके अलावा कुछ भी चार्ज करना (बिना साफ, अपनी मर्जी से सहमति के) कंज्यूमर कानून के तहत गलत माना जाता है।

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CCPA ने समझाया, "खाना खाने के बाद ही कोई कंज्यूमर क्वालिटी और सर्विस का अंदाजा लगा सकता है और तय कर सकता है कि टिप या ग्रैच्युटी देनी है या नहीं और अगर देनी है तो कितनी। किसी कंज्यूमर का टिप या ग्रैच्युटी देने का फैसला सिर्फ रेस्टोरेंट में घुसने या ऑर्डर देने से नहीं होता। इसलिए, सर्विस चार्ज बिल में जबरदस्ती नहीं जोड़ा जा सकता, बिना कंज्यूमर्स को यह चुनने या तय करने का मौका दिए कि वे ऐसा चार्ज देना चाहते हैं या नहीं।"

रेस्टोरेंट को क्या करने की इजाजत नहीं है?

CCPA गाइडलाइंस के तहत रेस्टोरेंट ये काम नहीं कर सकते:

  • बिल में सर्विस चार्ज अपने आप जोड़ना।
  • सर्विस चार्ज किसी और नाम से लेना।
  • ग्राहक पर इसे चुकाने के लिए जोर डालना या दबाव डालना।
  • अगर कोई ग्राहक इसे देने से मना करता है तो उसे एंट्री या सर्विस न देना।
  • बिल में सर्विस चार्ज जोड़ना और फिर कुल रकम पर GST लगाना।

संक्षेप में कहा जाए तो अगर आपकी सहमति के बिना आपके बिल पर सर्विस चार्ज लगता है तो यह जायज नहीं है।

रेस्टोरेंट को क्या करने की इजाजत है?

  1. रेस्टोरेंट अभी भी अपनी मर्जी से दी जाने वाली टिप या ग्रेच्युटी ले सकते हैं।
  2. प्रतिष्ठानों को ग्राहकों को साफ तौर पर बताना होगा कि सर्विस चार्ज ऑप्शनल है, ताकि वे तय कर सकें कि उन्हें यह देना है या नहीं और कितना देना है।
  3. रेस्टोरेंट अलग से चार्ज लगाने के बजाय, सर्विस कॉस्ट को मेन्यू की कीमतों में ही शामिल कर सकते हैं।
  4. कोई भी एक्स्ट्रा रकम देने का फैसला ग्राहक का होना चाहिए।

बोरा बोरा केस: नियमों को कैसे लागू किया जा रहा है?

दरअसल, इन नियमों को लागू करने का फैसला हाल ही में मुंबई के बोरा बोरा नाम के एक रेस्टोरेंट से जुड़े मामले के बाद लिया गया, जहां CCPA ने रेस्टोरेंट ऑपरेटर पर जुर्माना लगाया। रेस्टोरेंट ने कस्टमर के बिल में 10% सर्विस चार्ज जोड़ा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिलिंग सिस्टम इस तरह से सेट किया गया था कि चार्ज अपने आप जुड़ जाता था।

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सर्विस चार्ज पर GST भी लगाया गया था। जब एक कस्टमर ने आपत्ति जताई तो शुरू में चार्ज हटाया नहीं गया। एक कंज्यूमर शिकायत के बाद, CCPA ने जांच की और पाया कि यह तरीका उसके 2022 के दिशानिर्देशों का सीधा उल्लंघन था। रेस्टोरेंट ऑपरेटर पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया और सर्विस चार्ज जोड़ना बंद करने के निर्देश दिए गए।

अगर सर्विस चार्ज जोड़ा जाता है तो ग्राहक क्या कर सकते हैं?

  • रेस्टोरेंट स्टाफ से इसे बिल से हटाने के लिए कहें।
  • सर्विस चार्ज के बिना नया बिल मांगें।
  • अगर वे मना करते हैं, तो इन तरीकों से शिकायत करें:
  • राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915)
  • ई-दाखिल उपभोक्ता पोर्टल
  • या फिर सीधे जिला कलेक्टर या सीसीपीए के पास जाकर शिकायत कर सकते हैं।

कानून साफ कहता है कि सर्विस चार्ज देने से मना करना सर्विस देने से इनकार करने या दबाव बनाने का आधार नहीं हो सकता। भारत के अंदर रेस्टोरेंट में सर्विस चार्ज देना जरूरी नहीं है।

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