बंगाल भाजपा में चर्चा का विषय बनी, बीएल संतोष की 'खामोश' उपस्थिति
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कोलकाता यात्रा के बाद बंगाल भाजपा में बीएल संतोष की 'खामोश' उपस्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। साइंस सिटी में कार्यकर् ...और पढ़ें

बीएल संतोष की खामोशी (X/YSR)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हालिया कोलकाता यात्रा के बाद बंगाल भाजपा के भीतर असली चर्चा उनके भाषणों से ज्यादा एक ‘खामोश’ लेकिन बेहद अर्थपूर्ण दृश्य को लेकर है।
साइंस सिटी सभागार में आयोजित ‘महानगर कार्यकर्ता सम्मेलन’ के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष का मंच पर न होकर दर्शक दीर्घा में बैठना पार्टी गलियारों में कौतूहल और अटकलों का विषय बना हुआ है। संगठन में बेहद प्रभावशाली माने जाने वाले संतोष की यह भूमिका कई नेताओं के लिए अप्रत्याशित थी।
मंच पर दिग्गज, दर्शकों में संगठन का शीर्ष चेहरा
सम्मेलन में अमित शाह मुख्य वक्ता थे और मंच पर प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य, नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार, मंगल पांडे सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। यहां तक कि हाल में तृणमूल छोड़कर भाजपा में आए तापस राय को भी मंच पर स्थान मिला।
इसके उलट, बीएल संतोष ने राज्य संगठन महासचिव अमिताभ चक्रवर्ती और संयुक्त महासचिव सतीश ढोंड के साथ दूसरी कतार में बैठना चुना। हैरानी की बात यह रही कि राज्य भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं को उनके सार्वजनिक सम्मेलन में मौजूद होने की जानकारी तक नहीं थी।
परंपरा की वापसी या बदली हुई रणनीति
पार्टी सूत्रों के अनुसार, वैचारिक रूप से भाजपा में संगठन मंत्रियों का सार्वजनिक राजनीतिक मंचों से दूरी बनाए रखना पुरानी परंपरा रही है। उनका दायित्व पर्दे के पीछे रहकर संगठन को मजबूत करना माना जाता है।
हालांकि, बंगाल में पिछले कुछ वर्षों के दौरान यह परंपरा कई बार टूटी और संगठन मंत्रियों को मोदी-शाह की सभाओं में मंच साझा करते देखा गया। ऐसे में संतोष का अचानक ‘बैक-बेंच’ पर बैठना क्या अनुशासन की पुनर्स्थापना है या किसी बड़े रणनीतिक बदलाव का संकेत, यह सवाल बना हुआ है
अनुशासन, गुटबाजी और जमीनी फोकस का संदेश
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह कदम संगठन के भीतर एक सख्त संदेश भी हो सकता है—कि पद से बड़ा अनुशासन है और संगठन का काम सुर्खियों से दूर रहकर होता है। बंगाल भाजपा में लंबे समय से गुटबाजी और पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं, खासकर टिकट वितरण को लेकर। दर्शकों के बीच बैठकर संतोष ने खुद को किसी एक गुट से ऊपर, सामान्य कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा दिखाने की कोशिश की हो सकती है।
आने वाले चुनावों की तैयारी की झलक
अमित शाह की मौजूदगी में रणनीतिक टीम का मंच से दूर रहना इस ओर भी इशारा करता है कि पार्टी अब पूरी तरह जमीनी काम, बूथ प्रबंधन और संगठनात्मक कमियों के सूक्ष्म आकलन पर ध्यान दे रही है। जिस तरह से उनकी उपस्थिति को गोपनीय रखा गया, उससे संकेत मिलते हैं कि यह महज औपचारिकता नहीं, बल्कि दिल्ली से तय किसी सख्त निरीक्षण और रणनीति का हिस्सा हो सकता है। बंगाल भाजपा के लिए यह ‘खामोशी’ फिलहाल सबसे तेज संदेश बन गई है।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।