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    उमर खालिद की रिहाई को लेकर अमेरिकी सांसदों ने लिखा लेटर, BJP ने फोटो पोस्ट कर राहुल गांधी को घेरा

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 02:45 PM (IST)

    अमेरिकी सांसदों द्वारा उमर खालिद की रिहाई के लिए लिखे पत्र पर भाजपा ने राहुल गांधी को घेरा है। भाजपा ने 2024 में राहुल गांधी की अमेरिकी सांसद शाकोव्स् ...और पढ़ें

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    भाजपा ने फिर किया राहुल गांधी पर हमला।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली दंगे 2020 के आरोप में जेल में बंद उमर खालिद की रिहाई को लेकर अमेरिकी सांसदों ने एक चिट्ठी लिखी है। मामले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और भारत विरोधी लॉबी पर हमला किया।

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    भाजपा ने राहुल गांधी और अमेरिका की सांसद शाकोव्स्की के बीच 2024 में हुई एक मीटिंग का जिक्र करते हुए इसे कांग्रेस नेता के भारत विरोधी रवैये का सबूत बताया।

    प्रदीप भंडारी ने यूं साधा निशाना

    भाजपा के प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी की शाकोव्स्की और इल्हान उमर के साथ एक तस्वीर पोस्ट की और कहा, "राहुल गांधी - भारत विरोधी लॉबी कैसे काम करती है? 2024: शाकोव्स्की अमेरिका में राहुल गांधी से मिलती हैं - साथ में भारत विरोधी इल्हान उमर भी होती हैं। जनवरी 2025: वह "अंतर्राष्ट्रीय इस्लामोफोबिया का मुकाबला करने वाला अधिनियम" फिर से पेश करती हैं, जिसमें साफ तौर पर भारत का नाम लिया गया है और "मुस्लिम समुदायों पर कार्रवाई" का आरोप लगाया गया है। कट टू 2026: वही शाकोव्स्की भारत सरकार को लिखती हैं और उमर खालिद के बारे में "चिंता" जताती हैं - जो दंगों और हिंसा से जुड़े गंभीर मामलों में UAPA के तहत आरोपी है।"

    उन्होंने आगे लिखा, "जब भी विदेश में भारत विरोधी कहानी फैलाई जाती है, बैकग्राउंड में एक नाम बार-बार आता है: राहुल गांधी। जो लोग भारत को कमजोर करना चाहते हैं, उसकी चुनी हुई सरकार को बदनाम करना चाहते हैं और उसके आतंकवाद विरोधी कानूनों को कमजोर करना चाहते हैं, वे अनिवार्य रूप से उनके आसपास इकट्ठा हो जाते हैं।"

    अपनी पोस्ट में भंडारी ने राहुल की 2024 की अमेरिका यात्रा, शकोव्स्की और उमर से मुलाकात और पेश किए गए एक बिल के बीच संबंध होने का दावा किया, जिसे जनवरी 2025 में पेश किया गया था। यह बिल अंतर्राष्ट्रीय इस्लामोफोबिया से मुकाबला करने वाला अधिनियम था।

    शाकोव्स्की ने सरकार से क्या मांग की?

    शाकोव्स्की ने 30 दिसंबर को जो चिट्ठी लिखी थी, उसमें भारतीय सरकार से खालिद को ज़मानत देने और 'अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार' निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया था।

    बिल में क्या था?

    इस बिल में इस्लामोफोबिया की निगरानी और उससे लड़ने के लिए एक ऑफिस बनाने और इससे जुड़े मुद्दों को सुलझाने का प्रस्ताव था। इस बिल में यह भी जरूरी था कि अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी जाने वाली कुछ मौजूदा सालाना रिपोर्टों – दूसरे देशों में मानवाधिकारों और धार्मिक आजादी पर रिपोर्ट – में सरकार के कंट्रोल वाले मीडिया में इस्लामोफोबिया और मुस्लिम विरोधी प्रोपेगेंडा के बारे में जानकारी शामिल हो।

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