नई दिल्ली। आजादी के बाद की भारतीय राजनीति के अनमोल रतन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को शुक्रवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से अलंकृत किया। 91 वर्षीय अटलजी गंभीर रूप से बीमार हैं, इसलिए राष्ट्रपति ने प्रोटोकॉल तोड़कर उन्हें दिल्ली के कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके निवास पर जाकर यह सम्मान सौंपा।
इस मौके पर उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, संघ प्रमुख मोहन भागवत, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह व मोदी मंत्रिमंडल के मंत्री समेत कई नेता मौजूद थे। अटलजी देश की 44 वीं हस्ती हैं, जिन्हें भारत रत्न दिया गया है। उनसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री स्व. पं. जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादूर शास्त्री, इंदिरा गांधी व राजीव गांधी को यह भी इस सम्मान से नवाजा गया था।

ग्वालियर में जन्मे अटलजी के व्यक्तित्व की खासियतें
-अटलजी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में कृष्ण बिहारी वाजपेयी और कृष्णा देवी के घर हुआ था।
-1942 में गांधीजी द्वारा चलाए गए भारत छो़़डो आंदोलन में वे 23 दिन जेल में रहे थे।
-अटलजी भारतीय जनसंघ [अब भाजपा] के संस्थापक सदस्यों में थे। वे 1968 से 1973 तक इसके अध्यक्ष रहे।
-जनसंघ के टिकिट पर 1955 में उन्होंने पहला लोकसभा चुनाव लड़ा, मगर हार गए थे।
- उप्र के बलरामपुर से वे जनसंघ के टिकट पर 1957 में पहली बार लोकसभा में पहुंचे। वे 50 साल तक सांसद रहे।
-आपातकाल के बाद केन्द्र 1977 में मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्रित्व में बनी देश की पहली बार गैर--कांग्रेसी सरकार वे विदेश मंत्री बने।
-अमेरिका यात्रा के दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में हिन्दी में भाषण दिया था।
-1998 में वे देश के दसवें प्रधानमंत्री बने। वे 2004 तक इस पद पर रहे।
-2005 में अटलजी ने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था।


'भारत रत्न' अटल बिहारी वाजपेयी को बधाइयों का तांता

कई पुरस्कार से नवाजे गए
अटलजी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से पूर्व कई पुरस्कारों मिल चुके हैं। 1992 में उन्हें पद्म विभूषण, 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार, 1994 में श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार मिला था।

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परमाणु परीक्षण कर चौंकाया तो नाराज हुआ अमेरिका
मई 1998 में अटलजी ने पोखरण में तीन परमाणु परीक्षण कर पूरी दुनिया को भारत की ताकत का अहसास कराया था। महाशक्ति देश अमेरिका ने नाराज होकर भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए थे।

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लाहौर की ऐतिहासिक बस यात्रा
1999 में अटलजी की दिल्ली से लाहौर तक की बस यात्रा ऐतिहासिक रही। उसी वक्त उन्होंने पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ शांति व सुरक्षा के लिए लाहौर घोषणा-पत्र पर दस्तखत किए। हालांकि इसके बाद कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठ के बाद हुए युद्ध ने इन प्रयासों पर पानी फेर दिया।

Edited By: Gunateet Ojha