बेंगलुरु, एएनआइ। कर्नाटक के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री डा के सुधाकर ने शनिवार को बताया कि राज्य को पार्किंसंस रोग में वृद्धि को कम करने के उपाय शुरू करने की जरूरत है। उन्होंने संभावना जताई है कि 2030 तक इसके 200-300 फीसद तक बढ़ने की उम्मीद है।

डा के सुधाकर ने कहा, 'हमें पार्किंसंस रोग (पीडी) में वृद्धि को कम करने के उपायों को शुरू करने की जरूरत है, जिसकी 2030 तक 200-300 फीसद बढ़ने की उम्मीद है।' पार्किंसन रिसर्च अलायंस ऑफ इंडिया (PRAI) के सहयोग से किंग्स कॉलेज, लंदन द्वारा आयोजित वर्चुअल संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मंत्री ने ये बातें कही हैं। मंत्री ने कहा कि भारत में एक लाख से अधिक आबादी में से 350-400 लोग पर्किंसंस बीमारी से प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'यह 2030 तक बढ़कर 200-300 फीसद हो जाएगा। कुल आबादी का एक फीसद इस बीमारी से प्रभावित होगा। केसीएल और पीआरएआइ द्वारा संगोष्ठी इस पर शोध कार्य में सहायता करेगी।'

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (NIMHANS) को न्यूरो डिजेनरेटिव रोगों पर अपने काम के लिए मान्यता दी गई है। NIMHANS पीआरएआइ के अन्य केंद्रों के सहयोग से पार्किंसंस रोग पर शोध कार्य करेगा। मंत्री ने कहा, 'हमारी सरकार एक अकादमिक मंच बनाने और युवा शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित करने के लिए केसीएल और पीआरएआइ के साथ सहयोग करने के लिए तत्पर है।'

डॉ सुधाकर ने कहा, 'मैं पी राय और उनकी टीम को पार्किंसंस रोग और न्यूरो डिजेनरेटिव बीमारी पर उनकी शोध गतिविधियों के लिए बधाई देता हूं। संयुक्त कार्य एक आम मंच बनाने और इस क्षेत्र में कुशल शोधकर्ताओं की भर्ती करने में मदद करेगा। हमारी सरकार बेंगलुरू में संगोष्ठी की मेजबानी भी करना चाहती है।' मंत्री ने कहा, "मेरे पास प्रतिष्ठित किंग्स कॉलेज लंदन की यादें हैं। मैंने पार्किंसंस के लिए धन जुटाने के लिए केसीएल में आयोजित वार्षिक चैरिटी क्रिकेट मैच में खेला था।'

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Edited By: Neel Rajput