जबलपुर में 'इंदौर' जैसी जल त्रासदी का जोखिम... 50 साल पुराना खुला टैंक दे रहा बीमारियों को न्यौता, 5 हजार लोगों की सेहत दांव पर
इंदौर जैसी त्रासदी की आशंका के बीच जबलपुर के कांचघर स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में 50 साल पुराना खुला भूमिगत पेयजल टैंक गंभीर खतरा बन गया है। यह टैंक ...और पढ़ें

हाउसिंग बोर्ड कालोनी में 50 साल पुराने भूमिगत टैंक 24 घंटे रहता है खुला, सफाई भी नही होती।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से 15 लोगों की मौत की घटना ने जबलपुर में भी खतरे की घंटी बजा दी है। कांचघर स्थित बीमा अस्पताल के पीछे हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में पेयजल आपूर्ति का मुख्य स्रोत बना भूमिगत टैंक नागरिकों की चिंता का बड़ा कारण बन गया है। करीब 50 साल पुराना यह टैंक 24 घंटे खुला रहता है और इसके आसपास गंदगी व झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है।
खुले टैंक में कीड़े-मकोड़े और जीव-जंतु गिरने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी भी कोई श्वान, बिल्ली या अन्य जानवर टैंक में गिर सकता है, जिससे पूरी कॉलोनी में गंभीर संक्रमण या महामारी फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
चार साल पुरानी घटना से नहीं लिया सबक
नागरिकों के मुताबिक भूमिगत होने के कारण टैंक की नियमित सफाई भी नहीं हो पाती। इसी टैंक में नर्मदा का पानी भरकर कॉलोनी में सप्लाई की जाती है। चार साल पहले इसमें एक बिल्ली गिरने से पूरा पानी दूषित हो गया था, लेकिन जिम्मेदारों ने इससे कोई सबक नहीं लिया। वर्तमान में भी कई घरों में गंदा पानी पहुंच रहा है, जिसे बिना छाने या उबाले पीना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।

भूकंप से जर्जर टंकी, पंप हाउस पर खतरा कायम
स्थानीय निवासी अनिल शर्मा ने बताया कि कॉलोनी की मुख्य जल टंकी करीब 40 साल पुरानी है और वर्ष 1997 के भीषण भूकंप के बाद से जर्जर हालत में है। सुरक्षा कारणों से अब इसमें पानी नहीं भरा जाता, लेकिन इसके नीचे बना पंप हाउस आज भी संचालित है। टंकी के नीचे ही भूमिगत टैंक बनाकर जल आपूर्ति की जा रही है। जर्जर टंकी को गिराने का प्रस्ताव पास होने के बावजूद नगर निगम की उदासीनता बनी हुई है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी है।
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पांच हजार लोग मजबूर, निगम दे रहा आश्वासन
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के लगभग पांच हजार नागरिक इसी खुले और दूषित टैंक के पानी पर निर्भर हैं। जलापूर्ति भी दिन में केवल एक बार हो रही है। पंप हाउस कर्मियों का कहना है कि मोटर से पर्याप्त प्रेशर नहीं बन पाता। वहीं, नगर निगम के कार्यपालन यंत्री (जल) कमलेश श्रीवास्तव का दावा है कि समय-समय पर टैंक की सफाई कराई जाती है। उन्होंने बताया कि ‘अमृत योजना 2.0’ के तहत क्षेत्र में नई टंकी स्वीकृत हो चुकी है और निर्माण कार्य शुरू हो गया है। नई टंकी के तैयार होने के बाद ही जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार संभव होगा।
जबलपुर का मात्र 54% पानी ही पीने योग्य: सर्वे रिपोर्ट
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शन मंच के डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने दिसंबर 2025 में जारी केंद्रीय सर्वे रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि जबलपुर में मात्र 54.3 प्रतिशत पानी ही सुरक्षित और पीने योग्य है। रिपोर्ट से स्पष्ट है कि शहर में सप्लाई हो रहा लगभग 50 प्रतिशत पानी दूषित है। इसका मुख्य कारण पिछले 20 वर्षों से नालियों के भीतर से गुजर रही जलवितरण पाइपलाइनें हैं, जिन्हें अब तक हटाया नहीं गया है। इन पुरानी पाइपलाइनों में बार-बार होने वाले लीकेज से पेयजल प्रदूषित हो रहा है। मंच के सदस्यों ने महापौर और निगमायुक्त को पत्र भेजकर इन पाइपलाइनों को तत्काल हटाने की मांग की है।

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