दूषित जल की समस्या से स्थायी निजात के लिए लुधियाना से सबक ले सकता है इंदौर, इस तरह घटाईं शिकायतें
इंदौर दूषित जल की समस्या से स्थायी निजात पाने के लिए लुधियाना के मॉडल से सीख सकता है। लुधियाना ने प्रभावी रणनीतियों को अपनाकर शिकायतों को काफी कम किया ...और पढ़ें

इंदौर में पेयजल की जर्जर पाइपलाइन।
डिजिटल डेस्क, इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल त्रासदी से हाहाकार मचा है। अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों बीमार लोग सामने आ चुके हैं। इनमें से कई अभी भी अस्पतालों में अपना उपचार करवा रहे हैं। ऐसी जल त्रासदी फिर सामने न आए, इसके लिए इंदौर पंजाब के लुधियाना से सबक ले सकता है।
लुधियाना में दूषित पानी से बीमारियों के मामले सामने आने के बाद नगर निगम ने तात्कालिक मरम्मत की बजाय संरचनात्मक सुधार पर फोकस किया। इसका सीधा लाभ यह हुआ कि शिकायतें तेजी से घटीं और भरोसा लौटा। लुधियाना में तीन साल पहले दूषित जल की 608 शिकायतें दर्ज की थी, जो 2025 में घटकर 318 रह गई। इसी अनुभव के आधार पर इंदौर के लिए कुछ ठोस सबक हैं।
पाइपलाइन का स्थायी समाधान : लुधियाना ने धीरे-धीरे ही सही, लेकिन पुरानी, जर्जर लाइनों को बदला। इंदौर में भी पैचवर्क नहीं, बल्कि ड्रेनेज के समानांतर चल रही पुरानी जल लाइनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर नई लाइनें बिछानी होंगी।
लीकेज की जीरो-टॉलरेंस नीति : लुधियाना ने पाइपलाइन लीकेज को छोटी खराबी मानने के बजाय हेल्थ इमरजेंसी माना। इंदौर में हर लीकेज की 24-48 घंटे में मरम्मत की सीमा तय हो।
नियमित और पारदर्शी सैंपलिंग : वार्डवार साप्ताहिक सैंपलिंग, रिपोर्ट सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड हो।
सीवेज-पेयजल का पूर्ण पृथक्कीकरण : जहां भी दोनों लाइनें साथ चलती हैं, वहां प्राथमिकता से रीरूटिंग हो। यही मूल रोकथाम है।
नवागत अधिकारियों के साथ हुई जनप्रतिनिधियों की समन्वय बैठक
उधर... इंदौर में नवागत निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और अन्य नव-नियुक्त अधिकारियों ने रविवार को रेसीडेंसी कोठी में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की। केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित अन्य जनप्रतिनिधि इसमें शामिल हुए। बैठक को परिचय बैठक बताया जा रहा है। इसमें नवागत अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों से परिचय प्राप्त किया। बैठक में शामिल सभी जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्र की जल समस्याओं के बारे में ध्यान आकर्षित किया।
बैठक में तय हुआ कि भागीरथपुरा जैसा हादसा दोबारा न हो इसके लिए सभी अधिकारी और जनप्रतिनिधि आपस में समन्वय बनाकर काम करेंगे। शहर में कब क्या काम किए जाना हैं, किए जा रहे हैं, इसे लेकर अधिकारी जनप्रतिनिधियों की जानकारी में लाकर ही काम करें।

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