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    बिना पंजीयन निजी स्थल से ट्रैक्टर चोरी पर देना होगा बीमा क्लेम, खरगोन के किसान को 15 साल बाद मिला न्याय

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 07:06 PM (IST)

    राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने खरगोन के एक किसान को 15 साल बाद न्याय दिलाया है। बीमा कंपनी ट्रैक्टर चोरी के मामले में पंजीयन न होने का बहाना बनाकर भुगतान ...और पढ़ें

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    उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला (प्रतीकात्मक चित्र)

    डिजिटल डेस्क, भोपाल। परिवहन विभाग में वाहन का पंजीयन नहीं होने का बहाना बनाकर बीमा कंपनी ट्रैक्टर चोरी के मामले में दावे का भुगतान नहीं कर रही थी। इस ट्रैक्टर की चोरी के 15 साल बाद अब राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने पीड़ित किसान को राहत देते हुए बीमा कंपनी को फटकार लगाई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि घर के सामने खड़े ट्रैक्टर के चोरी हो जाने के मामले में मोटर यान अधिनियम के तहत पंजीयन नहीं होने का तर्क लागू नहीं होता। इस मामले में बीमा कंपनी दावे का भुगतान करने के लिए बाध्य है।

    बाड़े से चोरी हुआ था ट्रैक्टर

    दरअसल, खरगोन जिले के महेश्वर निवासी पंकज कुमार ने वर्ष 2009 में 4.25 लाख रुपये में एक नया ट्रैक्टर खरीदा था। ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से उसका बीमा कराया। किन्हीं कारणों से वे ट्रैक्टर का पंजीयन नहीं करा पाए, इस बीच उनके घर के बाड़े में खड़ा ट्रैक्टर चोरी हो गया।

    बीमा कंपनी ने दावे का भुगतान करने से मना कर दिया। कंपनी का कहना था कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत खरीदी के 14 दिनों के भीतर वाहन का पंजीयन अनिवार्य है। चोरी के समय ट्रैक्टर का पंजीयन नहीं था, इसलिए उसका कोई दावा नहीं बनता।

    2010 में लगाई थी याचिका

    किसान ने 2010 में खरगोन जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका लगाई। आयोग ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाया और बीमा कंपनी को भुगतान का आदेश दिया। कंपनी अपील में राज्य उपभोक्ता आयोग पहुंची तो वहां से कंपनी के पक्ष में फैसला सुना दिया गया।

    राज्य आयोग का कहना था कि बिना पंजीयन के ट्रैक्टर को शोरूम से घर तक लाना कानून का उल्लंघन है, इसलिए बीमा क्लेम नहीं दिया जा सकता। इस फैसले को किसान ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई करने के बाद उपभोक्ता के हक में फैसला सुनाया। उसने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह उपभोक्ता को ट्रैक्टर की कीमत पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से 4.50 लाख रुपये अदा करे।

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    आयोग ने इस तर्क से दी राहत

    अपने फैसले में राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने कहा कि किसान ने अपनी आजीविका के लिए ट्रैक्टर खरीदा था और उसे सुरक्षित स्थान पर खड़ा किया था। चोरी के समय ट्रैक्टर घर के सामने बाड़े (निजी परिसर) में खड़ा था, न कि किसी सड़क या सार्वजनिक स्थान पर था। मोटर वाहन अधिनियम तब लागू होगा, जब वाहन सड़क पर चल रहा हो, इसलिए बिना पंजीयन के वाहन चोरी होने के कारण बीमा भुगतान का तर्क यहां लागू नहीं होता।

    यह फैसला उन वाहन स्वामियों के लिए बड़ी राहत है, जिनके वाहन चोरी हो जाते हैं और बीमा कंपनियां पंजीयन न होने या कागजी देरी का बहाना बनाकर बीमा देने से बचती हैं। इस मामले में राष्ट्रीय आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि वाहन निजी परिसर में खड़ा है और चोरी हो जाता है, तो पंजीयन न होना बीमा भुगतान न करने का आधार नहीं हो सकता।
    - संभावना राजपूत, उपभोक्ता की अधिवक्ता