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    भागीरथपुरा कांड : दस साल की मन्नतों के बाद जन्मा था आव्यान, दूषित पानी ने छह माह में छीन ली जिंदगी

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 09:23 PM (IST)

    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से छह माह के मासूम आव्यान की मौत हो गई। दस साल की मन्नतों के बाद जन्मा यह बच्चा नगर निगम की लापरवाही का शिकार ...और पढ़ें

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    डिजिटल डेस्क, इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल ने कई परिवारों को ऐसा जख्म दिया है, जिसे शब्दों में समेटना मुश्किल है। दस साल की मन्नतों और दुआओं के बाद जन्मा छह माह का बच्चा भी नगर निगम की लापरवाही की भेंट चढ़ गया।

    क्या पता था पानी बन जाएगा जहर

    छह माह के मासूम आव्यान को उसकी मां दूध में पानी मिलाकर इसलिए पिलाती थी ताकि दूध पचाने में आसानी हो जाए, लेकिन उसे क्या पता था कि नल से आ रहा पानी उसके बेटे के लिए जहर बन जाएगा। बीते दिनों आव्यान की तबीयत अचानक बिगड़ी। परिजन उसे अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन 31 दिसंबर को रास्ते में ही उसकी सांसें थम गईं।

    सिस्टम पर गंभीर सवाल

    भागीरथपुरा का यह दर्द सिर्फ एक परिवार का नहीं है। आव्यान की कहानी उस पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती है, जहां नलों से जहर आया और कीमत मासूमों ने अपनी जान देकर चुकाई। आव्यान के पिता सुनील साहू ने भरे गले से बताया कि उनकी पहले से 10 साल की एक बेटी है। बेटे की चाह में उन्होंने मन्नतें मांगीं, इलाज करवाया, दुआएं कीं।

    avyan sahu kin

    छिन गया बुढ़ापे का सहारा

    सुनील यह कहते हुए टूट जाते हैं कि छह माह पहले जब आव्यान पैदा हुआ तो लगा जैसे भगवान ने हमारी सुन ली। बेटी को भाई मिला, हमें बुढ़ापे का सहारा। लेकिन हमें क्या पता था कि निगम की लापरवाही हमारे घर में ऐसा कहर बरपाएगी। बेटे की मौत के बाद घर में मातम पसरा है। 10 साल की बेटी का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार एक ही सवाल पूछ रही है- पापा, अब मैं किसे राखी बांधूंगी?

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    सहायता राशि का चेक लौटाया

    आव्यान के माता-पिता के पास प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय दो लाख रुपये की सहायता राशि का चेक लेकर पहुंचे थे, लेकिन परिजनों ने चेक लेने से इन्कार कर दिया। सुनील साहू ने कहा कि लंबे समय से दूषित पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। अब सरकार मौत की कीमत लगा रही है। दो लाख रुपये देकर हमारे जख्म नहीं भरे जा सकते। सुनील ने साफ कहा कि यह मदद नहीं, बल्कि स्वजन को बरगलाने की कोशिश है। हम अपने बेटे को वापस नहीं पा सकते, लेकिन सच यही है कि यह मौत कुदरत की नहीं, सिस्टम की लापरवाही से हुई है।