दिल्ली के इन पंडालों में बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए खास इंतजाम, बिना किसी झंझट के कर सकते हैं मां के दर्शन
दिल्ली-एनसीआर में दुर्गा पूजा के दौरान बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए एक खास पहल की गई है।

दिल्ली के इन दुर्गा पूजा पंडालों में है खास व्यवस्था (Picture Courtesy: Facebook)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। दुर्गा पूजा दिल्ली-एनसीआर को एक अलग ही उमंग से भर देती है। दुर्गा पूजा पंडाल, चारों तरफ जगमगाती लाइट्स, ढाक की आवाज और भक्तों की भीड़, माहौल को उत्साह से भर देती है, लेकिन बुजुर्गों या दिव्यांगजनों के लिए पंडाल में पहुंचना आसान नहीं होता।
भीड़, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और ऊंची सीढ़ियों के कारण व्हील चेयर का इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है। इसी चुनौती को दूर करने के लिए दिल्ली की एक्सेसिबिलिटी संस्था स्वयं (Svayam) और यूनेस्को (UNESCO) ने एक खास पहल की है।
इस पहल के तहत दिल्ली के तीन मुख्या दुर्गा पूजा समितियों के पंडालों को पूरी तरह से दिव्यांगजनों या व्हील चेयर के इस्तेमाल के लिए एक्सेसिबल बनाया गया है। 16-20 अक्टूबर के बीच आप इन पंडालों में बिना की परेशानी के दर्शन कर सकते हैं।
तिमारपुर एवं सिविल लाइन्स पूजा समिति, सिविल लाइन्स (नॉर्थ दिल्ली)
नॉर्थ दिल्ली का ये ऐतिहासिक पंडाल इनक्लूजन की एक बेहतरीन मिसाल पेश कर रहा है। यहां स्टेयर-फ्री एक्सेस के साथ-साथ विजुअली इमपेयर्ड लोगों के लिए ब्रेल साइनेज की व्यवस्था की गई है। जो लोग मूर्ति को देख नहीं सकते, उनके लिए एक रेप्लिका मॉडल रखा गया है, जिसे छूकर वे मां के स्वरूप को महसूस कर सकते हैं। भीड़ और तेज आवाज से परेशान होने वाले लोगों के लिए यहां शांत कमरे और क्वाइट आवर्स की भी सुविधा मौजूद है।
सर्वजनीन दुर्गा पूजा सोसाइटी, पंडारा रोड (सेंट्रल दिल्ली)
सेंट्रल दिल्ली के पंडारा रोड पर बने इस पंडाल में बिना किसी परेशानी के आसानी से जा सकते हैं। यहां एंट्री गेट और ड्रॉप-ऑफ पॉइंट से लेकर मां दुर्गा की मूर्ती तक समतल रास्ते बनाए गए हैं। रास्ते में जहां भी ऊंचाई या ढलान है, वहां रैंप की सुविधा दी गई है। इसके अलावा, यहां वॉलंटियर्स को खासतौर से ट्रेन किया गया है, ताकि वे सम्मानजनक तरीके से लोगों की मदद कर सकें।
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दुर्गोत्सव, ग्रेटर कैलाश 2 (साउथ दिल्ली)
साउथ दिल्ली के सबसे मशहूर पूजा स्थलों में जीके-2 का पंडाल भी शामिल है। यहां हर उम्र के श्रद्धालुओं के लिए एक्सेस काफी आसान है। समतल रास्तों और रैंप के कारण व्हीलचेयर, बुजुर्गों और बच्चों के स्ट्रोलर के साथ आने वाले माता-पिता को कोई परेशानी नहीं होती। खास बात है कि यहां का सांस्कृतिक कार्यक्रम भी काफी इनक्लूजिव है। इसमें विजुअली इमपेयर्ड बच्चे, एसिड अटैक सर्वाइवर्स और ऑटिस्टिक बैंड आर्टिस्ट्स भी अपनी प्रस्तुतियां देते हैं।
खुशियों में सबको शामिल करने की कोशिश
स्वयं और यूनेस्को की यह पहल त्योहार की खुशी को सभी के साथ बांटने के मकसद से शुरू की गई है। इस बार अगर आपके परिवार में कोई बुजुर्ग या दिव्यागं सदस्य हैं, तो बिना किसी झिझक के इन पंडालों में जाकर मां दुर्गा के दर्शन का आनंद लें।
