बिहार का अद्भुत दुर्गा मंदिर: यहां सिर झुकाने पर ही होते हैं मां के दर्शन, महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास
भोरे का प्रसिद्ध मां दुर्गा मंदिर श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र है, जिसका संबंध महाभारत काल के योद्धा भूरिश्रवा और भद्र ऋषि से है।

महाभारत काल के योद्धा भूरिश्रवा व भद्र ऋषि की तपस्थली से जुड़ा है भोरे दुर्गा मंदिर
HighLights
भोरे दुर्गा मंदिर का महाभारत काल से संबंध।
मां दुर्गा की झुकी प्रतिमा देती विनम्रता का संदेश।
नवरात्र, विवाह, जनेऊ संस्कार के लिए प्रसिद्ध।
संवाद सूत्र, भोरे (गोपालगंज)। भोरे स्थित प्रसिद्ध मां दुर्गा का दरबार क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए अगाध आस्था और अपार श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। शारदीय और चैत्र नवरात्र में यहां दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
वर्षभर शादी-विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए भी श्रद्धालुओं का मंदिर परिसर में आना-जाना लगा रहता है। लगन के दिनों में यहां विवाह संपन्न कराए जाते हैं। वहीं, वर्ष में एक बार निःशुल्क सामूहिक जनेऊ संस्कार का भी विशेष आयोजन किया जाता है।
महाभारत काल से जुड़ी है मान्यता
भोरे के इस प्राचीन मंदिर का संबंध महाभारत काल के वीर योद्धा भूरिश्रवा से जोड़ा जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, भक्सी वन में तपस्या करने वाले भद्र ऋषि की प्रेरणा से इस पावन स्थल पर मां दुर्गा की स्थापना हुई थी। इसी कारण मंदिर को धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से विशेष महत्व प्राप्त है।
मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा भी अपने आप में अनूठी है। प्रतिमा की आंखें नीचे की ओर हैं और गर्दन थोड़ी झुकी हुई है। मान्यता है कि मां की प्रतिमा को एक साथ पूरी तरह देखने के बजाय श्रद्धालु को स्वयं झुककर मां के दर्शन करने पड़ते हैं।
श्रद्धालु इसे विनम्रता और अहंकार त्याग का संदेश मानते हैं। स्थानीय जनश्रुति है कि भूरिश्रवा की इस पावन भूमि पर जो श्रद्धालु मां के चरणों में स्वयं को झुकाकर सच्चे मन से प्रार्थना करता है, मां भगवती उसे जीवन में उन्नति का आशीर्वाद देती हैं।
शुभ कार्यों के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु
मां दुर्गा के दरबार में नवरात्र के अलावा वर्षभर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। विशेष रूप से शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए लोग यहां पहुंचते हैं।
लगन के दौरान मंदिर परिसर में विवाह संपन्न कराने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। सामूहिक जनेऊ संस्कार भी मंदिर की विशेष धार्मिक परंपराओं में शामिल है।
ऐसे पहुंचें मां के दरबार
जिला मुख्यालय गोपालगंज से मीरगंज होते हुए सड़क मार्ग से भोरे पहुंचा जा सकता है। उत्तर प्रदेश और सीमावर्ती क्षेत्रों से भी मंदिर तक पहुंचने के लिए सुगम परिवहन साधन उपलब्ध हैं।
कुशीनगर से कटेया होते हुए तथा देवरिया से विजयपुर के रास्ते श्रद्धालु भोरे पहुंचते हैं। बस और सवारी वाहन की सुविधा उपलब्ध है।
क्या कहते हैं पुजारी?
भोरे स्थित मां दुर्गा का यह दरबार अत्यंत पवित्र और फलदायी है। यहां जो भी भक्त सच्चे मन से प्रार्थना करता है, माता रानी उसकी मनोकामना पूरी करती हैं। - संजय शुक्ला, पंडित
क्या कहते हैं श्रद्धालु?
मां की झुकी हुई दृष्टि हमें विनम्रता का संदेश देती है। इस पावन भूमि पर जो झुककर आता है, मां भगवती की कृपा से वह जीवन में सदा उन्नति करता है। - डॉ. मानकेश्वर दत्त राय, श्रद्धालु
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