यूं ही नहीं Red Gold कहलाती है लाल चंदन की लकड़ी, कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश
Red Sandalwood demand पुष्पा फिल्म के बाद लाल चंदन की लकड़ियों की चर्चा बढ़ गई है। इसे रक्त चंदन या लाल सोना भी कहते हैं। आंध्र प्रदेश के जंगलों में इसकी तस्करी होती है जिससे पेड़ों की कमी हो रही है और कीमतें बढ़ रही हैं। लाल चंदन औषधीय गुणों से भरपूर है और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होता है। चीन और जापान में इसकी डिमांड ज्यादा है।

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। Red Sandalwood Value: फिल्म पुष्पा और पुष्पा 2 के रिलीज होने के बाद से ही लाल चंदन के लकड़ियों की खूब चर्चा होने लगी है। इसे रक्त चंदन या लाल सोना भी कहा जाता है। भारत में इसकी तस्करी खूब होती है। खासकर आंध्र प्रदेश के जंगलों में। इस कारण लाल चंदन के पेड़ों की कमी होती जा रही है। यही कारण है कि इसकी कीमतें आसमान छूती हैं।
लाल चंदन की लकड़ी अपने औषधीय गुणों से भरपूर होती है। इसका इस्तेमाल ब्यूटी प्रोडक्ट्स में भी खूब किया जाता है। साथ ही डेकोरेटिव आइटम्स भी लाल चंदन (Red Gold sandalwood uses) से बनाए जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लाल चंदन के लकड़ी की डिमांड पूरी दुनिया क्यों करती है? क्यों बड़े पैमाने पर इसकी तस्करी भी की जाती है? अगर आप नहीं जानते तो हम आपको अपने इस लेख में पूरी जानकारी देने जा रहे हैं। आइए जानते हैं विस्तार से-
क्या है खासियत?
आपको बता दें कि लाल चंदन के पेड़ भारत के कई राज्यों में पाए जाते हैं। इनमें आंध्र प्रदेश से लेकर तमिलनाडु शामिल हैं। इन पेड़ों को बढ़ने में कम से कम 40 साल का समय लगता है। इस कारण ये दुर्लभ होते हैं। ऊपर से इनकी तस्करी भी बड़े पैमाने पर होती है। जिस कारण इनकी खपत भी ज्यादा है। इस कारण इसकी कीमतें आसमान छूती हैं। लेकिन आपको बता दें कि राज्य सरकार ने इसकी तस्करी पर प्रतिबंध लगा रखा है, इसके बावजूद लोग चोरी छिपे तस्करी करते हैं।
कडप्पा और तिरुपति जिले में फैला है जंगल
फिलहाल अब तो लाल चंदन की दुर्लभता के कारण पेड़ों की सुरक्षा में टास्क फोर्स के जवान तैनात रहते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन आंधे प्रदेश के शेषाचलम जंगल में हाई क्वालिटी का लाल चंदन पाया जाता है। यहीं पर सबसे ज्यादा तस्करी भी होती है। ये जंगल कडप्पा और तिरुपति जिले में पांच लाख हेक्टेयर में फैला हुआ है। वैसे तो आमतौर पर चंदन के लकड़ी की कीमत 60 से 70 हजार प्रति किलो होती है।
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दो लाख तक होती है कीमत
हालांकि इसकी डिमांड चीन और जापान में ज्यादा होने के कारण इसकी कीमत दो लाख तक पहुंच जाती है। इसके अलावा लाल चंदन का इस्तेमाल स्किन डिजीज, सूजन और खून से जुड़ी समस्याओं में भी किया जाता है। चंदन की लकड़ी और जड़ें तक औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं। सफेद चंदन में अच्छी खुशबू होती है। वहीं लाल चंदन में खुशबू न के बराबर हाेती है। यही असली लाल चंदन की पहचान है।
कहां होता है इस्तेमाल?
लाल चंदन का इस्तेमाल महंगे परफ्यूम बनाने, ब्यूटी प्रोडक्ट्स बनाने और कई दवाओं में भी होता है। इसके अलावा सजावट के सामानाें में भी लाल चंदन का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी लकड़ियां इतनी मजबूत होतीं हैं कि इसका इस्तेमाल घर और फर्नीचर बनाने में भी किया जाता है।
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