मनोरंजन के लिए नहीं, एक आंदोलन से शुरू हुआ था बंगाल का लोक नाट्य ‘जातरा’; बहुत दिलचस्प है इसका इतिहास
पश्चिम बंगाल का लोक नाट्य जातरा 16वीं शताब्दी में शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं की गई थी।

पश्चिम बंगाल का मशहूर लोक नाट्य जातरा (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की लोक संस्कृति में जातरा की खास जगह है। ये वहां का पारंपरिक लोक नाट्य है, जो बंगाल के गांवों से लेकर शहरों तक सदियों से लोगों के मनोरंजन का जरिया रहा है। हालांकि, ये कला सिर्फ मनोरंजन के लिए शुरू नहीं हुई थी।
जातरा की शुरुआत की कहानी काफी दिलचस्प है और इसका सफर भी उतना ही मजेदार है। आइए जानें क्या है जातरा का इतिहास और इसकी खासियत क्या है।
जातरा का इतिहास क्या है?
जातरा का इतिहास लगभग 500 साल पुराना माना जाता है। 16वीं शताब्दी में बंगाल के वैष्णव भक्ति आंदोलन के दौरान जातरा की शुरुआत हुई थी। उस समय भगवान कृष्ण की लीलाओं और उनके जीवन से जुड़ी कहानियों को संगीत, नृत्य और नाटक के जरिए जगह-जगह पर दिखाया जाता था। जातरा नाम यहीं से आया है। जातरा यात्रा से बना है और क्योंकि ये नाटक एक जगह से दूसरी जगह दिखाए जाते थे। इसलिए इसका नाम जातरा पड़ा।
हालांकि, 19वीं शताब्दी आते-आते जातरा का स्वरूप बदल गया। अब जातरा सिर्फ धार्मिक कहानियों तक सीमित नहीं था। ब्रिटिश शासन काल के दौरान सामाजिक, राजनीतिक और ऐतिहासिक विषयों को भी जातरा में शामिल किया गया।
क्या है जातरा की खासियत?
जातरा को किसी बंद हॉल में या मंच पर नहीं किया जाता। ये आमतौर पर खुले मैदान या गांव के चबूतरे पर आयोजित किया जाता है, जिसके चारों तरफ दर्शक बैठते हैं और ये नाटक देखते हैं। खुले मैदान में कलाकारों के बीच किए जाने की वजह से जातरा के कलाकार दर्शकों से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं।
इसमें हैवी मेकअप का इस्तेमाल होता है, ताकि लोग आसानी से कलाकारों के हाव-भाव देख पाएं। साथ ही, संवाद को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए बहुत ऊंची आवाज में बोला जाता है। इसके साथ ही इसमें पारंपरिक लोक संगीत और ढोल, झांझ, हारमोनियम जैसे वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है।
कैसे किया जाता है जातरा?
जातरा की शुरुआत गीत से होती है, जिसके बाद कलाकार नाटक शुरू करते हैं। नाटक में नारद या व्यास जैसे किरदार भी होते हैं, जो दर्शकों को हंसाने का काम करते हैं। कलाकारों का शृंगार और कपड़े काफी भड़कीले होते हैं, ताकि दूर से ही दर्शकों को किरदार के हाव-भाव आसानी से समझ आ जाएं। साथ ही, ओवर-एक्टिंग और ऊंची आवाज में संवाद भी जातरा का अहम हिस्सा हैं।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।