सोमवार से शुक्रवार कुर्सी तोड़ी, फिर वीकेंड पर किया हैवी वर्कआउट? जानिए दिल के लिए क्यों खतरनाक है यह आदत
इस आर्टिकल में आप जानेंगे कि पूरे हफ्ते सुस्ती में बिताने के बाद सिर्फ वीकेंड पर हैवी वर्कआउट करना दिल के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है।

5 दिन डेस्क जॉब के बाद वीकेंड पर करते हैं वर्कआउट? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल के वर्किंग प्रोफेशनल्स की जिंदगी डेस्क और कुर्सी के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है। पूरे हफ्ते काम का भारी दबाव, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और एक्सरसाइज के लिए समय न मिल पाना- यह लगभग हर किसी की कहानी है। फिर जब वीकेंड आता है, तो कई लोग इस कमी की भरपाई करने के लिए घंटों जिम में पसीना बहाते हैं, लंबी साइकिलिंग करते हैं या कोई भारी खेल खेलते हैं।
ऐसे लोगों को 'वीकेंड वॉरियर' कहा जाता है, जो अपनी हफ्ते भर की कसरत का कोटा सिर्फ एक या दो दिन में पूरा करना चाहते हैं। लेकिन, क्या 5 दिन कुर्सी पर बैठने के बाद सिर्फ वीकेंड की कसरत आपके दिल को सुरक्षित रख सकती है? आइए समझते हैं।
क्या सिर्फ वीकेंड की कसरत काफी है?
पूरा हफ्ता सुस्त पड़े रहने से तो एक-दो दिन एक्सरसाइज करना यकीनन बेहतर है, लेकिन इसे नियमित रूप से चलने-फिरने का विकल्प नहीं माना जा सकता। वीकेंड वर्कआउट आपकी ओवरऑल फिजिकल एक्टिविटी में मदद तो करता है, लेकिन यह उन पांच दिनों के लगातार बैठे रहने के नुकसान को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सलाह है कि वयस्कों को हर हफ्ते 150-300 मिनट की मध्यम एक्सरसाइज या 75-150 मिनट की तेज एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसके साथ ही, हफ्ते में कम से कम दो दिन स्ट्रेंथ-बिल्डिंग एक्सरसाइज भी जरूरी है। 65 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों को बैलेंस और ताकत बढ़ाने वाली कसरत पर खास ध्यान देना चाहिए, जबकि बच्चों और किशोरों के लिए रोजाना कम से कम 60 मिनट की एक्टिविटी जरूरी है। इसके अलावा, दिशानिर्देशों में यह भी साफ कहा गया है कि लंबे समय तक बैठे रहने की आदत को तोड़ना चाहिए, क्योंकि थोड़ी सी भी हलचल बिल्कुल न करने से कहीं बेहतर है।
लगातार बैठे रहना दिल के लिए खतरनाक क्यों है?
डेस्क जॉब करने वालों, लंबे समय तक सफर करने वालों या टीवी और डिजिटल स्क्रीन के सामने घंटों बिताने वाले लोगों में सुस्त लाइफस्टाइल बहुत आम हो गई है। लगातार बैठे रहने से वजन बढ़ता है और मेटाबॉलिक हेल्थ खराब होती है। इसका सीधा असर हाई ब्लड प्रेशर और असामान्य कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं के रूप में दिखता है, जो समय के साथ दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। चिंता की बात यह नहीं है कि आपका एक बार बैठना खतरनाक है, बल्कि हफ्तों, महीनों और सालों तक लगातार बैठे रहने का जो असर शरीर में जमा होता है, वह सेहत को असल नुकसान पहुंचाता है।
क्या अचानक वीकेंड पर भारी कसरत करना सुरक्षित है?
यहीं पर 'वीकेंड वॉरियर्स' को सबसे ज्यादा सावधान होने की जरूरत है। अगर आप सोमवार से शुक्रवार तक बिल्कुल भी एक्टिव नहीं हैं, तो शनिवार या रविवार को अचानक कई घंटों तक बेहद इंटेंस वर्कआउट शुरू करने से बचना चाहिए। हमारे शरीर को फिजिकल एक्टिविटी की आदत डालने के लिए समय चाहिए होता है।
एक्सरसाइज से पहले वार्म-अप करना बहुत जरूरी है। यह आपके हार्ट रेट और ब्लड फ्लो को धीरे-धीरे बढ़ाता है, मांसपेशियों को गर्म करके लचीला बनाता है और चोट लगने या जल्दी थकने के खतरे को कम करता है। सबसे अच्छा तरीका यह है कि कसरत के समय और उसकी तीव्रता को धीरे-धीरे बढ़ाया जाए। शुरुआत ब्रिस्क वॉक से करें और फिर धीरे-धीरे साइकिलिंग, स्विमिंग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को अपने रूटीन में शामिल करें।
अगर आपको पहले से दिल की बीमारी, अनकंट्रोल्ड ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या कोई और मेडिकल समस्या है, तो कोई भी भारी कसरत शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें। इसके अलावा, कसरत करते समय अगर सीने में दर्द, असामान्य रूप से सांस फूलना, चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो इसे कभी नजरअंदाज न करें। तुरंत एक्सरसाइज रोक दें और डॉक्टर के पास जाएं।
कैसे बनाएं सही संतुलन?
इन दोनों को एक-दूसरे के विकल्प के रूप में देखने के बजाय, यह सोचना ज्यादा फायदेमंद है कि पूरे हफ्ते को एक्टिव कैसे बनाया जाए। अगर आपका शेड्यूल सिर्फ वीकेंड पर ही वर्कआउट की इजाजत देता है, तो वह भी फायदेमंद है। लेकिन वीकेंड पर लंबी कसरत (जैसे- वॉक, साइकिलिंग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग) के साथ-साथ बाकी 5 दिनों में भी छोटी-छोटी एक्टिविटीज शामिल करें।
आपका लक्ष्य 5 दिन की सुस्ती को एक दिन की थका देने वाली कसरत से "मिटाना" नहीं होना चाहिए। इसके बजाय एक आसान सा नियम अपनाएं: कोशिश करें कि 30 मिनट से ज्यादा लगातार न बैठें। उठें, थोड़ी देर टहलें या सिर्फ स्ट्रेचिंग करें। जो लोग नियमित एक्सरसाइज करते हैं, उन्हें भी बीच-बीच में उठने की आदत डालनी चाहिए।
बिजी प्रोफेशनल्स अपने दिल को कैसे रखें सुरक्षित?
अपनी व्यस्त और सुस्त दिनचर्या को एक्टिव बनाने के लिए आप कुछ छोटे लेकिन लगातार किए जाने वाले बदलाव कर सकते हैं:
- लंबे समय तक बैठने के बाद थोड़ा ब्रेक लें और चलें-फिरें।
- काम के दौरान नियमित अंतराल पर अपनी कुर्सी से उठें और खड़े हों।
- जहां तक संभव हो, लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
- फोन पर बात करते समय टहलने की आदत डालें।
- अपनी रूटीन में नियमित ब्रिस्क वॉक या कोई अन्य मध्यम स्तर की एक्टिविटी शामिल करें।
- हफ्ते में स्ट्रेंथ-ट्रेनिंग एक्सरसाइज को जरूर जगह दें।
- पूरे हफ्ते सुस्त रहने के बाद अचानक वीकेंड पर बहुत भारी कसरत करने से बचें।
- फिजिकल एक्टिविटी के साथ-साथ पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और सही वजन का भी पूरा ध्यान रखें।
वीकेंड पर एक्सरसाइज करना खुद को एक्टिव रखने का एक व्यावहारिक तरीका है और यह कुछ न करने से लाख गुना बेहतर है। लेकिन केवल दो दिन की कसरत को पूरे हफ्ते की सुस्ती का इलाज नहीं माना जा सकता। दिल की सेहत हमारी लंबे समय की आदतों से तय होती है। आपका मुख्य लक्ष्य लगातार बैठे रहने की आदत को कम करना और अपने वर्किंग डे में भी मूवमेंट को शामिल करना होना चाहिए। एक स्वस्थ दिल के लिए, एक्टिव होने के लिए शनिवार का इंतजार न करें; चलने-फिरने को सिर्फ अपने वीकेंड का नहीं, बल्कि पूरे हफ्ते का हिस्सा बनाएं।
(डॉ. संजय मित्तल, मेदांता गुरुग्राम के कार्डिएक केयर के वाइस चेयरमैन हैं)
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