पसंदीदा काम से होने लगी है बोरियत और दिखने लगे हैं ये बदलाव, तो हो जाएं सावधान; अल्जाइमर का हो सकते हैं संकेत
चीजें रखकर भूल जाना, प्रियजनों का जन्मदिन याद न रहना आदि। इन दिनों आम हो गई हैं ये आदतें। ये ...और पढ़ें

अल्जाइमर के लक्षणों को पहचानना है जरूरी (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने नोटिस किया है कि जो काम पहले पसंद था, अब उसमें रुचि कम हो गई है, ज्यादा आसान लगने वाला काम करना चाहते हैं, चुनौतियों से घबराने लगे हैं? अगर ऐसा है तो संभव है दिमाग में सूक्ष्म बदलाव शुरू हो गए हैं जिससे स्मरण क्षमता प्रभावित हो रही है।
डॉ. विनीत सूरी (वरिष्ठ न्यूरोलाजिस्ट, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, दिल्ली) बताते हैं कि उम्र के साथ स्मरण क्षमता कमजोर होना सामान्य है पर यही 25-30 की उम्र में दिखायी पड़ने लगी है तो यह समय चिकित्सक से मिलकर अल्जाइमर नामक बीमारी के निदान की है। बता दें कि अल्जाइमर की शुरुआत बीमारी के लक्षणों के दिखने से पूर्व ही शुरू हो जाती है।
शुरुआती दौर में याददाश्त की हल्की कमजोरी होती है जिसे व्यक्ति आसानी से संभाल सकता है पर जब नर्व सेल्स नष्ट होनी शुरू हो जाती हैं, तो लक्षण और गंभीर होने लगते हैं। इसके शिकार लोग अपने सामान्य दैनिक कार्यों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं।
इंटरनेट मीडिया से भ्रमित न हों
भारत में अल्जाइमर को लेकर जागरूकता का अभाव है। हालांकि, इंटरनेट मीडिया के कारण अब लोग जागरूक तो हो रहे हैं, लेकिन यहां भी चुनौती है। भूलने की परेशानी होते ही लोग गूगल सर्च करते हैं और इसमें तुरंत अल्जाइमर या डिमेंशिया के लक्षणों की सूची सामने आती है।
इन लक्षणों को देखते ही घबरा जाना और उन्हें अल्जाइमर मान लेना सही नहीं। पर लोग सवालों की लंबी सूची लेकर चिकित्सक के पास जाते हैं और दवाइयों या थेरेपी की मदद से ठीक होना चाहते हैं। जबकि यहां जरूरी है कि लोग उन जोखिम भरे कारकों पर ध्यान देने की है जो अल्जाइमर के लक्षणों को गंभीर कर सकते हैं। बता दें कि अल्जाइमर का स्थायी इलाज नहीं है इसके बावजूद अगर आप जीवनशैली को बेहतर बना लें तो आपकी दिमाग की कार्यप्रणाली तुलनात्मक रूप से बेहतर हो सकती है।
कारण हैं कई
अगर भूलने की आदतें असामान्य होने लगी हैं तो इनके कारणों को जानें। सामान्य तौर पर भूलने की आदत उम्र बढ़ने से जोड़ी जाती है। यह सही है कि अल्जाइमर के ज्यादातर मरीज 60 वर्ष के ऊपर के होते हैं, पर इसका एक कारण आनुवंशिक होता है।
जैसे अगर परिवार में पहले किसी को रहा है तो ऐसे व्यक्ति को कम उम्र में भी भूलने की समस्या हो सकती है। इन दिनों 40 से पहले भी लोग अल्जाइमर से पीड़ित हो रहे हैं तो इसका एक कारण जेनेटिक भी है। इसके अलावा, कुछ लोगों को दिमाग में चोट लगने, ट्यूमर होने से व विटामिन-बी12 की कमी से भी भूलने की समस्या हो सकती है। अगर कारणों को ठीक कर लिया जाए तो स्मरण क्षमता वापस लौट भी सकती है।
डिप्रेशन नहीं है यह
अल्जाइमर के आम लक्षणों में से एक है- जिस काम में पहले रुचि थी उसका खत्म हो जाना होता है। जैसे क्रिकेट पसंद था पर अब आप उसे देखना पसंद नहीं करते। बच्चे का जन्मदिन आज है लेकिन आप उसे कल मानकर सारी योजनाएं बनाते हैं।
ब्रश में टूथपेस्ट लगाना है यह याद नहीं रहता, पता नहीं चलता कि आप कर क्या रहे हैं और करना क्या है? कई बार दोपहर को सुबह मानकर स्नान करने चले जाते हैं। यह केवल बुजुर्गों में ही नहीं, बल्कि 60 की उम्र से पहले भी हो सकता है। इन लक्षणों को देखकर लोग मनोवैज्ञानिक के पास चले जाते हैं जबकि यह डिप्रेशन या अवसाद नहीं होता।
लक्षणों को जानें
- आसान व सरल लगने वाले कार्यों को पूरा करने से बचना
- समस्याओं को सामने देखकर डर जाना
- निर्णय लेने में कठिनाई
- याद नहीं रहने के कारण दोस्तों एवं परिवार से दूरी बनाना
- जगहों, लोगों और घटनाओं के बारे में विभ्रम हो जाना
- तस्वीरों या छवियों को समझने में कठिनाई आदि।
दैनिक स्तर पर ध्यान रखने योग्य बातें
- शारीरिक सक्रियता बढ़ाएं। योग-कसरत नियमित करें।
- समय प्रबंधन के तरीके अपनाएं, दबावमुक्त होकर काम करें।
- धूमपान व अल्कोहल का सेवन न करें।
- नए तरीकों से दिमाग को सक्रिय रखें, कुछ नया सीखें।
- सामुदायिक कार्यक्रमों में भाग लें, मिलते जुलते रहें आदि।
