आप भी रात में नाइट लैंप जलाकर सोते हैं? कमरे की थोड़ी सी रोशनी भी बदल सकती है आपके दिल की बनावट
एक नए शोध में सामने आया है कि रात में रोशनी के संपर्क में आने से दिल की संरचना में संभावित हानिकारक बदलाव हो सकते हैं।

रात को लाइट जलाकर तो नहीं सोते आप? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रेट्र, नई दिल्ली। रात के समय की रोशनी के संपर्क में आने से दिल की संरचना और कार्य में संभावित हानिकारक बदलाव हो सकते हैं। नए शोध में यह जानकारी सामने आई है।
अमेरिका के टुलेन विश्वविद्यालय में प्रतिष्ठित चेयर और प्रोफेसर और इस रिसर्च के मुख्य लेखक लू ची ने कहा कि हमने यह शोध इस उद्देश्य से किया कि यह पता लगाया जा सके कि जब लोग रात के समय बहुत अधिक रोशनी के संपर्क में आते हैं, तो समय के साथ दिल पर क्या प्रभाव पड़ता है।
यह अध्ययन हाल में यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें 11,017 प्रतिभागियों के डाटा का विश्लेषण किया, जिन्होंने एक सप्ताह तक अपनी कलाई पर एक सेंसर पहना था ताकि रात के समय की रोशनी के स्तर को मापा जा सके।
रोशनी का संपर्क लगभग पूर्ण अंधकार (0 लक्स) से लेकर तीन लक्स तक था जो लगभग एक रात की मेज पर कम रोशनी पर फोन स्क्रीन या दरवाजे के दरार से बाहर जलती हुईं एक हालवे लाइट के बराबर है। तीन वर्षों के फॉलोअप के बाद हर प्रतिभागी को उनके दिल की संरचना और काम में संभावित बदलावों की जांच के लिए एक कार्डियोवैस्कुलर मैग्नेटिक रेजोनेंस स्कैन दिया गया।
ज्यादा रोशनी के संपर्क में रहना हानिकारक
लेखकों ने लिखा, रात में तीन लक्स से ज्यादा रोशनी के संपर्क में रहने ( बनाम बिल्कुल रोशनी न होने) का संबंध लेफ्ट वेंट्रिकुलर (एलवी) समकेंद्रित हाइपरट्राफी और सबक्लिनिकल कार्यात्मक गिरावट से था । इसमें लंबाई (1.7 की पावर तक) के हिसाब से एलवी द्रव्यमान में 2.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी, औसत दीवार की मोटाई में 1.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी और मायोकार्डियल संकुचन अंश में 1.9 प्रतिशत की कमी शामिल थी।"
नतीजों से पता चला कि जो लोग रात में सबसे ज्यादा रोशनी के संपर्क में थे, उनके दिल के बाएं चैंबर की दीवारें मोटी हो गईं, जिससे वेंट्रिकल के अंदर की जगह कम हो गई। शोधकर्ताओं को ऐसे संकेत भी मिले कि दिल की धड़कन के दौरान दिल के सिकुड़ने और फैलने की क्षमता कम हो गई थी, जो दिल के ठीक से काम न करने का शुरुआती संकेत है।
दिल की बनावट में बदलाव
लू ने कहा कि यह अपनी तरह की पहला अध्ययन है और इससे पता चलता है कि रात में ज्यादा रोशनी के संपर्क में रहने का संबंध 'कार्डियक रीमॉडलिंग' से है। इसमें दिल की बनावट और काम करने के तरीके में बदलाव आता है और आम तौर पर ऐसा लंबे समय तक तनाव या दिल की चोट के कारण होता है।
मुख्य लेखक ने कहा कि यह उस तनाव के हिसाब से खुद को ढालने का हमारे शरीर का तरीका है, लेकिन आखिर में इससे दिल कमजोर हो जाता है और हार्ट फेलियर की नौबत आ सकती है।
रात के समय की रोशनी संभावित पर्यावरणीय जोखिम
कार्डियोवैस्कुलर डिजीज, जिसमें दिल की बीमारियां और स्ट्रोक शामिल हैं, मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। इसके लिए रात के समय की रोशनी को एक संभावित पर्यावरणीय जोखिम कारक के रूप में पहचाना गया है। शोधकर्ताओं ने कहा कि उम्र या आनुवंशिकी के विपरीत रात के समय की रोशनी का संपर्क अधिकांश लोगों के नियंत्रण में एक परिवर्तनीय जोखिम कारक है, जिसमें बस स्क्रीन बंद करना, बिस्तर से पहले परदे खींचना या आंखों पर मास्क पहनकर सोना शामिल है।
क्यू ने कहा कि रोशनी का प्रदूषण कार्डियोवैस्कुलर रोग के लिए एक नए जोखिम कारक के रूप में उभरा है। यह अध्ययन, अन्य अध्ययनों के साक्ष्यों के साथ दिल की बीमारियों की रोकथाम के लिए रात के समय की रोशनी के संपर्क को कम करने को एक संभावित रणनीति के रूप में इंगित करता है।
