सिर्फ सिगरेट-तंबाकू नहीं, तेल के छोंके से भी है लंग कैंसर का बड़ा खतरा; औरतों में तेजी से बढ़ रहे हैं इसके मामले
फेफड़ों का कैंसर, खासकर एडेनोकार्सिनोमा, अब धूम्रपान न करने वाली महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा है

भारत में लंग कैंसर से जुड़े मामलों में इजाफा (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। लोगों में आम धारणा यह है कि फेफड़ों का कैंसर उन लोगों को होता है, जिन्हें स्मोकिंग की लत होती है। जबकि बीते कुछ समय से सामने आ रहे आंकड़े इसके एकदम उलट नतीजे दे रहे हैं। दरअसल, कई रिपोर्ट्स कहती हैं कि महिलाओं में लंग कैंसर तेजी से फैल रहा है।
वहीं, इन दिनों फेफड़ों का कैंसर इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि ईसाई कैथोलिक समुदाय के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप लियो चौदहवें को फेफड़ों का कैंसर हुआ है। उनकी जांच में 'पल्मोनरी एडेनोकार्सिनोमा’ की पुष्टि हुई है। आइए जानते हैं कि आखिर क्या है फेफड़ों के कैंसर में 'पल्मोनरी एडेनोकार्सिनोमा’ और क्यों स्मोकिंग न करने के बावजूद यह महिलाओं को तेजी से अपना शिकार बना रहा है।
क्या है लंग कैंसर एडेनोकार्सिनोमा?
एडेनोकार्सिनोमा को फेफड़ों से जुड़े कैंसर का सबसे आम प्रकार माना जाता है। यह शरीर में बलगम बनाने वाली सेल्स से शुरू होता है, और फेफड़ों के अंदर न पनपकर बाहरी हिस्सों में ही विकसित होता है। जान लेने वाली बात यह है कि भले ही इसकी शुरुआत फेफड़ों की बाहरी परत से होती है, लेकिन यह फेफड़े, पेट, पैंक्रियाज और कोलन जैसे शरीर के कई अंगों को बुरी तरह प्रभवित कर सकता है।
तंबाकू-सिगरेट सेवन के बिना भी हो सकता है यह कैंसर
अगर आपको ऐसा लगता है कि फेफड़ों का यह कैंसर तंबाकू या सिगरेट के सेवन से होता है, तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। यह कैंसर उन लोगों में भी तेजी से फैल सकता है, जिन्होंने कभी इन चीजों को हाथ तक नहीं लगाया। ग्लोबोकैन की साल 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में फेफड़ों के कैंसर से जुड़े मामले महिलाओं में पुरुषों की तुलना में ज्यादा हैं।
भारत में लंग कैंसर से जुड़े मामलों में इजाफा
रिपोर्ट्स कहती हैं कि शहरों में रहने वालों वो महिलाएं जो कभी भी स्मोकिंग नहीं करतीं, उनमें एडेनोकार्सिनोमा लंग कैंसर के मामले करीब 53% देखे गए हैं। वहीं, बेंगलुरू और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में यह आंकड़ा 55% से 59% तक है। ऐसे यह सबसे चिंताजनक बात है कि धूम्रपान न करने वाली महिलाओं में इस कैंसर की हिस्सेदारी हर साल औसतन 6.7% तक बढ़ रही है।
क्या हैं इसके मुख्य कारण?
जहरीली हवा (पीएम 2.5)
जेनेटिक म्यूटेशन
पेसिव स्मोकिंग
चूल्हे का धुआं
तेल के छोंक का धुआं
शुरुआती लक्षण बेवजह सांस फूलना
सीने में दर्द
थकान
अचानक वजन घटना
लगातार खांसी रहना
सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना
आवाज में कर्कशता
सर्जरी सबसे असरदार इलाज
अगर एडेनोकार्सिनोमा लंग कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में चल जाए, तो सर्जरी के माध्यम से फेफड़े के उस हिस्से को निकाला जा सकता है। वहीं, एडवांस स्टेज में जेनेटिक जांच होगी, फिर उसके आधार पर इमयूनोथेरेपी या टारगेटेड थेरेपी दी जा सकती है।
