दिल के मरीजों के लिए खुशखबरी! अब बिना स्टेंट के भी खुल सकेगी हार्ट की ब्लॉकेज, रिसर्च में दिखे कमाल के नतीजे
एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पाया गया है कि दिल की धमनियों में रुकावट के इलाज के लिए ड्रग-कोटेड बैलून आधुनिक स्टेंट जितने ही प्रभावी हैं।

दिल की ब्लॉकेज का नया इलाज (Image Source: AI-Generated)
HighLights
दवा-लेपित गुब्बारे स्टेंट जितने ही प्रभावी साबित हुए
स्थायी धातु के बिना धमनियों का इलाज संभव होगा
TRANSFORM-II अध्ययन के नतीजे द लैंसेट में
प्रेट्र, नई दिल्ली। दिल की धमनियों में रुकावट का इलाज करने के लिए इस्तेमाल होने वाला दवा-लेपित गुब्बारा (ड्रग कोटेड बैलून) आधुनिक दवा वाले स्टेंट जितना प्रभावी साबित हुआ है। एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पाया गया कि सिरोलिमस दवा से लेपित गुब्बारे से इलाज कराने वाले मरीजों में एक साल के दौरान उपचार की सफलता और जटिलताओं के मामले में दवा छोड़ने वाले स्टेंट (ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट) के मुकाबले कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं था। इस शोध के नतीजे अमेरिका में आयोजित टीसीटी 2026 सम्मेलन में पेश किए गए हैं और प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल "द लैंसेट" में प्रकाशन के लिए स्वीकार किए गए हैं।
दोनों उपचारों के नतीजे लगभग बराबर
12 महीने के बाद गुब्बारे से इलाज कराने वाले समूह में 2.1 प्रतिशत मरीजों को टारगेट लेजन फेल्योर (इलाज वाली धमनी में दोबारा समस्या) हुई। वहीं, स्टेंट वाले समूह में यह आंकड़ा 2.4 प्रतिशत रहा। इस समस्या में हृदय संबंधी मृत्यु, संबंधित धमनी में हार्ट अटैक और दोबारा इलाज की जरूरत को शामिल किया गया। अध्ययन ने साबित किया कि गुब्बारे से इलाज स्टेंट के मुकाबले कम प्रभावी नहीं है।
सिर्फ 7.6 प्रतिशत मरीजों को लगा स्टेंट
अध्ययन की खास बात यह रही कि गुब्बारे से इलाज कराने वाले केवल 7.6 प्रतिशत मरीजों को ही बाद में स्टेंट लगाने की जरूरत पड़ी। इस समूह में स्टेंट में खून का थक्का जमने जैसी कोई निश्चित या संभावित घटना भी दर्ज नहीं हुई, जबकि स्टेंट वाले समूह में यह दर 0.2 प्रतिशत थी। हालांकि, गुब्बारे वाले समूह में किसी भी कारण से दोबारा इलाज कराने की दर 2.5 प्रतिशत रही, जबकि स्टेंट समूह में यह 1.1 प्रतिशत थी। लेकिन रक्त प्रवाह में कमी के कारण दोबारा इलाज की जरूरत दोनों समूहों में लगभग समान रही।
स्थायी धातु से मिल सकती है मुक्ति
अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. बर्नार्डो कोर्टेसे के मुताबिक, यदि धमनी की रुकावट वाले हिस्से को सही तरीके से तैयार किया जाए तो सिरोलिमस दवा वाला गुब्बारा बिना स्थायी धातु छोड़े स्टेंट जैसे नतीजे दे सकता है। उन्होंने कहा कि इस उपचार में सही तकनीक और जरूरत पड़ने पर स्टेंट लगाने की तैयारी बेहद जरूरी है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि ये नतीजे उन मरीजों पर लागू होते हैं जिनकी धमनियों में गुब्बारे से इलाज संभव है। गंभीर रूप से कैल्शियम जमा होने, मुख्य धमनी की रुकावट और कुछ गंभीर हार्ट अटैक वाले मरीज इस अध्ययन में शामिल नहीं थे। मरीजों की निगरानी पांच साल तक जारी रहेगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि स्थायी स्टेंट नहीं लगाने से भविष्य में होने वाली जटिलताएं कम होती हैं या नहीं। अध्ययन को इटली की संस्था फोंडाजियोन आरआईसी ने किया और कान्सेप्ट मेडिकल ने आर्थिक सहायता दी।
11 देशों के 1,842 मरीजों पर हुआ अध्ययन
ट्रांसफार्म-II नाम के इस अध्ययन में यूरोप, एशिया और दक्षिण अमेरिका के 11 देशों के 53 चिकित्सा केंद्रों के 1,842 मरीजों को शामिल किया गया। इन मरीजों की दिल की धमनियों में पहली बार रुकावट पाई गई थी। उन्हें दो समूहों में बांटकर एक का इलाज मैजिकटच सिरोलिमस कोटेड बैलून से किया गया, जबकि दूसरे समूह में एवरोलिमस दवा छोड़ने वाले स्टेंट लगाए गए। जरूरत पड़ने पर गुब्बारे से इलाज कराने वाले मरीजों में भी स्टेंट लगाया जा सकता था।
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