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'कोई तकलीफ नहीं, तो कैसा नुकसान' -इस वहम में न रहें, बिना लक्षण के भी फेफड़ों में जहर भर देता है खराब AQI

By Dr. Loveleen SharmaEdited By: Nikhil Pawar
Published: Thu, 05 Nov 2026 07:01 PM (IST)

क्या आपने कभी सोचा है कि जब हम खराब हवा में सांस लेते हैं, तो हमारे शरीर के भीतर क्या बदलाव आते हैं?

लगातार खराब AQI में रहने से शरीर पर कैसा असर पड़ता है? (Image Source: AI-Generated)

लगातार खराब AQI में रहने से शरीर पर कैसा असर पड़ता है? (Image Source: AI-Generated)

HighLights

  1. खराब हवा में कुछ घंटे भी शरीर को करते हैं प्रभावित

  2. PM2.5 कण फेफड़ों में जमा होकर सूजन पैदा करते हैं

  3. लगातार प्रदूषण से फेफड़ों की क्षमता घटती, दिल पर असर

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हम अक्सर सोचते हैं कि प्रदूषण का असर महीनों या सालों में होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक खराब एयर क्वालिटी वाले दिन में बिताए गए महज कुछ घंटे ही आपके शरीर के अंदर उथल-पुथल मचाने के लिए काफी हैं?

जी हां, जैसे ही आप इस जहरीली हवा में सांस लेते हैं, आपके फेफड़े तुरंत खतरे का अलार्म बजाने लगते हैं। बताती हैं कि जब हवा में सूक्ष्म कणों की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, तो हमारा रेस्पिरेटरी सिस्टम सिर्फ कुछ ही घंटों में इसके सीधे निशाने पर आ जाता है। आइए जानते हैं कि इस हवा में सांस लेने के बाद शरीर के अंदर आखिर क्या-क्या बदलता है।

Air pollution

(Image Source: AI-Generated)

शुरुआती घंटों में दिखने वाले संकेत

खराब हवा में कुछ घंटे बिताने के बाद ही आंखों से पानी आना, नाक-गले में खराश, खांसी, सीने में भारीपन या सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज महसूस हो सकती है। अस्थमा, सीओपीडी या दिल की बीमारियों वाले लोगों पर इसका सबसे जल्दी और बुरा असर पड़ता है। एक अहम बात यह भी है कि अगर आपको कोई लक्षण महसूस नहीं हो रहा है, तो इस गलतफहमी में न रहें कि प्रदूषित हवा आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचा रही है।

शरीर के कुदरती सुरक्षा चक्र को भी भेद देता है PM2.5

वायु प्रदूषण में सबसे खतरनाक चीज PM2.5 है। ये कण आकार में 2.5 माइक्रोमीटर या उससे भी छोटे होते हैं। वैसे तो हमारा शरीर बाहरी कचरे को बाहर निकालने में सक्षम होता है, लेकिन ये कण इतने बारीक होते हैं कि ये शरीर के प्राकृतिक सुरक्षा घेरे को पार करके फेफड़ों की गहरी परतों तक पहुंच जाते हैं। ये सीधे 'एल्विओलाई' में जाकर जम जाते हैं, जिन सूक्ष्म थैलियों से ऑक्सीजन खून में मिलती है।

स्थायी रूप से घट जाती है सांस लेने की ताकत

एक बार जब ये बारीक कण फेफड़ों में जम जाते हैं, तो वे शरीर में सूजन और 'ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस' पैदा करते हैं। शरीर जब किसी चोट या जलन के खिलाफ अपनी रक्षा करता है, तो वहां सूजन आ जाती है। वहीं, 'ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस' तब होता है जब नुकसान पहुंचाने वाले कण इतनी तेजी से जमा होते हैं कि शरीर उन्हें खत्म नहीं कर पाता। बार-बार इस तरह की हवा का सामना करने से फेफड़े अंदर से छिलने लगते हैं, जिससे फेफड़ों की काम करने की क्षमता गिर जाती है और सांस की पुरानी बीमारियां जन्म लेती हैं।

सिर्फ फेफड़ों नहीं, दिल पर भी पड़ता है असर

प्रदूषण का प्रभाव केवल सांस की नली तक सीमित नहीं रहता। ये बारीक कण हमारी खून की नलियों के काम करने के तरीके को भी बिगाड़ देते हैं, जिससे पूरे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम पर भारी दबाव पड़ता है। यही कारण है कि वायु प्रदूषण का सीधा कनेक्शन स्ट्रोक और दिल की बीमारियों से भी है। जिन लोगों को पहले से ही हार्ट की कोई समस्या है, उनके लिए प्रदूषण भरे दिन काफी जोखिम भरे साबित हो सकते हैं।

रोज जहरीली हवा में सांस लेने की भारी कीमत

खराब हवा में एक दिन बिताने और सालों तक बिताने में काफी फर्क है। प्रदूषित हवा में 24 घंटे गुजारने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको तुरंत फेफड़ों का कैंसर या कोई पुरानी बीमारी हो गई है। असली खतरा तब पैदा होता है, जब आप महीनों या सालों तक लगातार ऐसी हवा में सांस लेते हैं। 'इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर' ने बाहरी प्रदूषण और हवा में तैरते इन कणों को इंसानों के लिए कैंसर का कारण घोषित किया है। पर्याप्त शोध बताते हैं कि इनका सीधा संबंध फेफड़ों के कैंसर से है।

बचाव और सही समय पर इलाज है जरूरी

खुद को इस जहरीली हवा से बचाना ही सबसे सही कदम है। इसके लिए आप इन बातों का ख्याल रख सकते हैं:

  • घर से बाहर कोई भी काम करने से पहले हमेशा एयर क्वालिटी इंडेक्स चेक करें।
  • जब प्रदूषण का स्तर 'बेहद खराब' या 'गंभीर' श्रेणी में हो, तो बाहर कड़ी कसरत या दौड़-भाग करने से बचें।
  • अगर बाहर जाना मजबूरी हो, तो चेहरे पर सही ढंग से फिट होने वाला N95 या N99 मास्क जरूर लगाएं। हालांकि यह हवा के हर जहर को नहीं रोकता, लेकिन बारीक कणों से काफी हद तक बचाता है।
  • अगर आपको लगातार खांसी, सांस फूलने या घरघराहट की शिकायत हो, तो इसे हल्के में न लें और डॉक्टर से चेकअप कराएं।
  • अगर अचानक सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ हो या सीने में दर्द उठे, तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लें।

(डॉ. लवलीन शर्मा, कैलाश दीपक अस्पताल में चेस्ट फिजिशियन हैं)

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