दीवाली पर मिठाइयां खरीदते समय सावधान! मिलावट से हो सकती है फूड पॉइजनिंग, ये लक्षण दिखते ही भागें डॉक्टर के पास
भारत में फेस्टिव सीजन आते ही बाजारों में रौनक तो बढ़ जाती है, लेकिन इसके साथ ही सेहत के लिए एक बड़ा खतरा भी हमारे सामने आ खड़ा होता है।

मशहूर दुकानों पर भी बिक रही मिलावटी मिठाई, खरीदने से पहले गांठ बांध लें ये बातें (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। त्योहारों की खुशी दोगुनी करने के लिए हम सभी बर्फी, लड्डू और रसगुल्ले जैसी तरह-तरह की मिठाइयां घर लाते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि इन खास मौकों पर बाजारों में भारी पैमाने पर मिलावटी मिठाइयां बेची जाती हैं, जिन्हें बनाने में साफ-सफाई का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जाता?
आपकी मिठाई में क्या-क्या मिला हो सकता है?
मुनाफे के चक्कर में दुकानदार मावा का वजन बढ़ाने के लिए उसमें स्टार्च, चावल या गेहूं का आटा, डिटर्जेंट और यहां तक कि यूरिया भी मिला देते हैं। असली घी की जगह वनस्पति, पाम ऑयल, उबले आलू या जानवरों की चर्बी धड़ल्ले से इस्तेमाल होती है। इतना ही नहीं, मिठाइयों पर लगा 99.9% शुद्ध चांदी का वर्क असल में जहरीला एल्युमिनियम फॉयल हो सकता है।
इन्हें सुंदर दिखाने के लिए मेटानिल येलो और मैलाकाइट ग्रीन जैसे रंग मिलाए जाते हैं। ये असल में कपड़े रंगने वाले खतरनाक केमिकल हैं जिनसे कैंसर का खतरा रहता है। हाल ही में, दिल्ली फूड सेफ्टी विभाग ने चांदनी चौक, नरेला, ओखला और नारायणा की मशहूर दुकानों पर छापे मारे। वहां मिठाइयों के पास खुले कूड़ेदान, कीड़े-मकोड़े, बिना हाथ धोए काम करते कर्मचारी मिले और पानी की शुद्धता की जांच रिपोर्ट भी गायब थी।

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असली और नकली मिठाई को कैसे पहचानें?
बहुत ज्यादा चमकीले या आंखों को चुभने वाले रंग की मिठाइयां लेने से बचें, क्योंकि इनमें केमिकल वाले रंग हो सकते हैं। चांदी के वर्क की असलियत जानने के लिए उसे उंगलियों के बीच रगड़ें या आग दिखाएं। असली चांदी टूटकर घुल जाती है, जबकि एल्युमिनियम का वर्क वैसा ही रहता है या काला पड़ जाता है।
अगर मिठाई से खट्टी, अजीब महक आ रही हो या उसमें फफूंद नजर आए, तो उसे बिल्कुल न खाएं। हमेशा FSSAI का लाइसेंस देखकर ही मिठाइयां खरीदें और पैकिंग पर बनने व खराब होने की तारीख जरूर पढ़ें। अगर आपको कोई मिठाई मिलावटी लगती है, तो आप नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन या एफएसएसएआई के 'फूड सेफ्टी कनेक्ट' ऐप पर सीधे शिकायत कर सकते हैं।
फूड पॉइजनिंग के लक्षण और इसका असर
गंदी या मिलावटी मिठाई खाने से साल्मोनेला, ई. कोलाई या नोरोवायरस जैसे कीटाणु पेट में जा सकते हैं। इसके लक्षण मिठाई खाने के कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों के भीतर शुरू हो सकते हैं। मरीज को पानी जैसे दस्त, पेट में ऐंठन, जी मिचलाना, बार-बार उल्टी आना, बुखार, बदन दर्द, ठंड लगना और भारी कमजोरी जैसी दिक्कतें होती हैं। हालांकि, पर्याप्त आराम करने और शरीर में पानी की कमी न होने देने से हल्के मामले 1 से 3 दिनों के अंदर अपने आप ठीक हो जाते हैं।
डॉक्टर के पास जाना कब जरूरी है?
अगर आपको या किसी अपने को नीचे दिए गए गंभीर लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:
- उल्टी या मल में खून आना।
- तेज बुखार होना (बच्चों में 102°F/38.9°C और बड़ों में 103°F/39.4°C से ज्यादा)।
- लगातार इतनी उल्टियां होना कि पेट में पानी भी न टिक पाए।
- डिहाइड्रेशन या पानी की भारी कमी होना (जैसे पेशाब न आना, भयंकर प्यास लगना, मुंह सूखना या खड़े होने पर चक्कर आना)।
- नसों से जुड़ी दिक्कतें (जैसे धुंधला या दो-दो दिखना, मांसपेशियों में कमजोरी, झुनझुनी होना, बोलने या निगलने में परेशानी)।
- अगर दस्त 3 दिनों से ज्यादा समय तक जारी रहें और कोई सुधार न हो।
(डॉ. अमृत सिंह मथारू, मैक्स अस्पताल, पटपड़गंज के इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट हैं)
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