कितनी देर में ‘जहर’ बन सकता है पका खाना? कैसे रखें सुरक्षित, जानें WHO और डाइटीशियन की राय
सरकारी स्कूलों के भोजन में ई.कोलाई मिलने के बाद पके भोजन की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के ...और पढ़ें
HighLights
सरकारी स्कूलों के भोजन में ई.कोलाई बैक्टीरिया मिलने से चिंता।
5-60°C तापमान में भोजन में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं।
गर्मी में 2-3 घंटे से अधिक पुराना भोजन बच्चों को न दें।
डिजिटल डेस्क, पटना। अच्छे स्वास्थ्य के लिए ताजा और सुरक्षित भोजन बेहद जरूरी है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही भी भोजन को खतरनाक बना सकती है। हाल के दिनों में सरकारी स्कूलों में परोसे जाने वाले पके भोजन के नमूनों में ई.कोलाई बैक्टीरिया मिलने के बाद यह सवाल फिर चर्चा में आ गया है कि पका हुआ खाना कितनी देर तक सुरक्षित रहता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन को पकाने के बाद लंबे समय तक रखने से उसमें बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह
World Health Organization के अनुसार पका हुआ भोजन संभव हो तो तुरंत ही खा लेना चाहिए। संगठन का कहना है कि दूषित भोजन के कारण हर साल दुनिया भर में लाखों लोग बीमार पड़ते हैं और करीब 4.2 लाख लोगों की मौत तक हो जाती है। इसलिए भोजन को सुरक्षित तरीके से पकाना और सही समय पर खाना बेहद जरूरी है।
5 से 60 डिग्री तापमान में तेजी से बढ़ते बैक्टीरिया
क्लिनिकल डाइटीशियन एवं स्पोर्ट्स न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार जब भोजन पकाने के बाद ठंडा होकर 5°C से 60°C के तापमान के बीच आता है तो यह बैक्टीरिया के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बन जाता है।
इसी तापमान क्षेत्र को ‘डेंजर जोन’ कहा जाता है। ऐसे में लंबे समय तक रखा हुआ खाना खाने से फूड पॉइजनिंग और पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
स्कूलों के भोजन में मिला ई.कोलाई
राज्य के सरकारी विद्यालयों में परोसे जाने वाले मध्याह्न भोजन के नमूनों की जांच में ई.कोलाई बैक्टीरिया पाए जाने का मामला सामने आया है।
केंद्रीयकृत रसोईघर से भेजे गए भोजन की जांच रिपोर्ट के बाद अधिकारियों ने सभी जिलों को साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी, गंदे बर्तन और गलत भंडारण के कारण भोजन में यह बैक्टीरिया पनप सकता है।
बच्चों की सेहत पर ज्यादा असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ई.कोलाई बैक्टीरिया से पेट में संक्रमण, दस्त, उल्टी, पेट दर्द और बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इसका असर बच्चों पर अधिक तेजी से दिखाई देता है। इसलिए स्कूलों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
गर्मी में भोजन सुरक्षित रखने के आसान उपाय
डाइटीशियन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में मिड-डे मील को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
भोजन हमेशा उसी दिन और परोसने के समय के करीब बनाना चाहिए। खाना बनाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोना, बर्तनों और रसोईघर की सफाई रखना तथा साफ पानी का उपयोग करना जरूरी है।
ढककर रखें और सही जगह पर रखें भोजन
पका हुआ भोजन हमेशा ढक्कन या जालीदार कवर से ढककर रखना चाहिए ताकि धूल, मक्खी और कीड़े उसमें न जाएं।
भोजन को सीधे धूप से दूर ठंडी और हवादार जगह पर रखना चाहिए। यदि खाना तुरंत नहीं परोसा जा रहा हो तो उसे ढक्कन वाले स्टील कंटेनर या इंसुलेटेड बॉक्स में रखना बेहतर होता है।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
डाइटीशियन का मानना है कि ताजा और गर्म भोजन ही स्वास्थ्य के लिए सबसे सुरक्षित होता है। भोजन को लंबे समय तक रखने, गलत तरीके से भंडारण करने या स्वच्छता में लापरवाही बरतने से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए खाना पकने के तुरंत बाद उसका सेवन करना और खाद्य सुरक्षा के नियमों का पालन करना ही सबसे बेहतर उपाय है।
2–3 घंटे से ज्यादा पुराना भोजन न दें
बहुत देर तक रखा हुआ भोजन बच्चों को नहीं देना चाहिए। खासकर गर्मी के मौसम में 2 से 3 घंटे से अधिक पुराना भोजन खराब हो सकता है। यदि भोजन के रंग, स्वाद या गंध में बदलाव दिखाई दे तो उसे तुरंत हटा देना ही बेहतर है।
सुधाकर मिश्रा क्लिनिकल डाइटीशियन एवं स्पोर्ट्स न्यूट्रिशनिस्ट, पटना
बच्चों को बासी भोजन देना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इससे फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त, पेट दर्द और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक रखा भोजन पोषण भी कम कर देता है और बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है।
Anubha Anand, क्लिनिकल डाइटिशियन, पटना
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