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पटाखों के धुएं से सबसे ज्यादा खतरे में हैं बच्चे और बुजुर्ग, प्रदूषण से बचाने के लिए डॉक्टर ने बताया सही तरीका

By Dr. Vijay Kumar AgrawalEdited By: Swati Sharma
Published: Fri, 06 Nov 2026 04:00 PM (IST)

दीवाली पर पटाखों से होने वाला वायु प्रदूषण बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरनाक है, जिससे सांस संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

वायु प्रदूषण से बच्चों और बुजुर्गों से कैसे बचाएं? (AI Generated Image)

वायु प्रदूषण से बच्चों और बुजुर्गों से कैसे बचाएं? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। दीवाली का त्योहार खुशियों और रोशनी का पर्व होता है, लेकिन इस दौरान बढ़ने वाला वायु प्रदूषण बच्चों और बुजुर्गों की सेहत के लिए काफी खतरनाक हो सकता है। पटाखों से निकलने वाले धुएं में मौजूद PM2.5, PM10, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे हानिकारक प्रदूषण होते हैं। 

इनके कारण सांस की नली में जलन और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जिन लोगों को पहले से अस्थमा जैसी बीमारियां, उनके लिए ये और भी खतरनाक हो सकता है। बच्चों के फेफड़े काफी सेंसिटिव होते हैं और बुजुर्गों की इम्युनिटी कमजोर होती है। इसलिए इन्हें खास बचाव की जरूरत होती है। आइए जानें दीवाली पर बच्चों और बुजुर्गों को प्रदूषण से कैसे सुरक्षित रखें।

इनडोर एक्टिविटीज करें

प्रदूषण से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर न भेजें, खासकर सुबह और शाम के समय। पटाखों के धुएं की वजह से हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है, जो इन्हें ज्यादा परेशान कर सकती है। साथ ही, जिन जगह पटाखे फोड़े जा रहे हैं, वहां से इन्हें दूर रखें।

अगर पहले से अस्थमा, सीओपीडी या दिल की बीमारी है, तो घर से बाहर निकलने से बचें। इसकी जगह घर के अंदर एक्सरसाइज करें। 

घर के अंदर की हवा साफ रखें

प्रदूषण के पीक घंटों के दौरान दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें, ताकि बाहर का धुआं और हवा घर के अंदर न आए। अगर आपके पास HEPA एयर प्यूरीफायर है, तो इसका इस्तेमाल करें, ताकि घर के अंदर प्रदूषण न हो। इसके साथ ही, घर के अंदर अगरबत्ती, कॉइल्स, मोमबत्तियां आदि जलाने से बचें, क्योंकि इनसे भी प्रदूषण बढ़ता है। 

खान-पान, हाइड्रेशन और मास्क का रखें खास ध्यान

बच्चों और बुजुर्गों को अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रखें और उन्हें हेल्दी डाइट दें। खाने में एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फल और सब्जियां शामिल करें। साथ ही, बाहर निकलते समय N95 मास्क का इस्तेमाल करें। 

दवाएं और लक्षणों को नजरअंदाज न करें

ये समझना जरूरी है कि सांस या दिल की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए वायु प्रदूषण और भी खतरनाक हो सकता है। इसलिए ध्यान रखें कि उनकी दवाएं हमेशा उनके पास रहें। साथ ही, खांसी, सांस फूलना, घरघराहट, सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न या असामान्य थकान जैसी किसी भी समस्या को बिल्कुल नजरअंदाज न करें। अगर ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

(डॉ. विजय कुमार अग्रवाल, डायरेक्टर, पल्मोनोलॉजी एंड स्लीप मेडिसिन, यथार्थ सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद सेक्टर 88)

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