क्या शुरुआती इलाज के बाद भी दोबारा हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर? डॉक्टर से जरूर पूछें ये 4 अहम सवाल
शुरुआती ब्रेस्ट कैंसर के निदान के बाद मरीजों को इलाज के विकल्पों और जीवन की गुणवत्ता पर उनके प्रभाव को समझना जरूरी है।
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ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े ये सवाल पूछना है जरूरी (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ब्रेस्ट कैंसर का पता चलना एक ऐसा समय होता है जब कई फैसले एक साथ लेने पड़ते हैं। उस वक्त मरीज या उसके परिवार के लिए सामान्य जानकारी को समझना भी काफी मुश्किल हो सकता है। सर्जरी और रेडिएशन से लेकर कैंसर को दोबारा लौटने से रोकने वाली दवाओं तक, महिलाओं को अक्सर मुश्किल मेडिकल शब्दों को समझने की कोशिश करनी पड़ती है।
साथ ही, वे ये भी समझने की कोशिश करते हैं कि इलाज का उनके जीवन की गुणवत्ता पर क्या असर पड़ेगा। जिन महिलाओं में शुरुआती स्टेज में ब्रेस्ट कैंसर का पता चल जाता है, उनके लिए इलाज के तुरंत बाद के स्टेज के बारे में सोचना बहुत जरूरी होता है।
शुरुआती स्टेज में ब्रेस्ट कैंसर की देखभाल का तरीका ऐसा होना चाहिए, जो इलाज के प्रभाव और महिला के जीवन की गुणवत्ता दोनों का ध्यान रखे। दोबारा कैंसर होने के रिस्क और उसे रोकने के लिए सही ट्रीटमेंट चुनना बहुत जरूरी है। साथ ही, दस्त, थकान और दर्द जैसे प्रभावों को सीमित करना भी जरूरी है। इसके अलावा, इलाज के दौरन आने वाले इमोशनल चैलेंज से निपटने में भी मदद जरूरी है।
अपने ऑन्कोलॉजिस्ट के साथ बातचीत आपको अपने ऑप्शन को समझने और फैसले लेने में मदद कर सकती है। इसके लिए अपने डॉक्टर से चार जरूरी सवाल पूछने चाहिए।
सवाल 1- कैंसर दोबारा होने का जोखिम कितना है और इसका मेरे लिए क्या मतलब है?
शुरुआती ब्रेस्ट कैंसर के डायग्नोसिस के बाद समझने वाली पहली चीजों में से एक ये है कि बीमारी का स्टेज केवल एक हिस्सा है। हालांकि, शुरुआती स्टेज में ब्रेस्च कैंसर का इलाज आसान होता है, लेकिन इसके दोबारा होने का रिस्क हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है।
आपके डॉक्टर ट्यूमर के आकार और ग्रेड, लिम्फ नोड की स्थिति, हार्मोन रिसेप्टर और HER2 स्थिति और दूसरे क्लीनिकल फाइंडिंग्स पर विचार कर सकते हैं। आपके डायग्नोसिस के आधार पर एक्सट्रा टेस्ट भी इलाज के विकल्प समझने में मदद कर सकते हैं। अपने ऑन्कोलॉजिस्ट से पूछें कि ये आपके दोबारा कैंसर होने के रिस्क को कैसे प्रभावित करते हैं।
सवाल 2- हर ट्रीटमेंट ऑप्शन के फायदे क्या-क्या हैं?
शुरुआती ब्रेस्ट कैंसर की देखभाल में सर्जरी, रेडिएशन, कीमोथेरेपी, एंडोक्राइन थेरेपी, टारगेटेड ट्रीटमेंट्स और दूसरे सिस्टमिक थेरेपी की अलग-अलग भूमिकाएं हो सकती हैं। हर मरीज को हर इलाज की जरूरत नहीं होती है। अपने डॉक्टर से समझें की आपके लिए कौन-सा इलाज बेस्ट है और क्यों।
सवाल 3- कौन-से साइड इफेक्ट्स रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित कर सकते हैं?
कैंसर का इलाज जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है। महिलाएं अपने डाग्नोसिस के साथ-साथ काम, बच्चों की देखभाल, रिश्तों, फाइनेंशियल जिम्मेदारियों और पर्सनल गोल्स को संभाल रही होती हैं। इलाज के साइड इफेक्ट्स रोजमर्रा की इन चीजों को प्रभावित कर सकते हैं।
कुछ मरीजों को इलाज के दौरान थकान, जोड़ों का दर्द, नींद में खलल, जी मचलना और इमोशनल स्ट्रेस का सामना करना पड़ता है। अपने डॉक्टर से पूछें कि आपके इलाज से कौन से साइड इफेक्ट्स जुड़े हैं और उन्हें कैसे मैनेज कर सकते हैं।
सवाल 4- ट्रीटमेंट के एडवांस्ड ऑप्शन मेरे लिए फायदेमंद हैं?
ब्रेस्ट कैंसर का इलाज लगातार विकसित हो रहा है, जिसमें ट्यूमर के सेल्स और व्यक्ति के दोबारा होने के जोखिम के आधार पर इलाज के ऑप्शन तय किए जाते हैं। डायग्नोसिस के आधार पर, मरीज टारगेटेड ट्रीटमेंट करवा सकता है।
(डॉ. देव्रत आर्या, वाइस चेयरमैन, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली)
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