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सीरियस माहौल में क्यों छूट जाती है हंसी? घबराएं नहीं, साइंस के पास है इसका दिलचस्प जवाब

Published: Thu, 23 Apr 2026 05:15 PM (IST)

गंभीर या तनावपूर्ण माहौल में अचानक हंसी आना 'नर्वस लाफ्टर' कहलाता है, जो दिमाग का एक बचाव तंत्र है। यह ...और पढ़ें

गंभीर माहौल में क्यों आती है हंसी (Picture Credit- AI Generated)

गंभीर माहौल में क्यों आती है हंसी (Picture Credit- AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी सीरियस मीटिंग में बैठे हों, कोई आपको डांट रहा हो या किसी दुखद माहौल (जैसे अंतिम संस्कार) में खड़े हों...और अचानक आपको जोर से हंसी आने लगे? 

आप होंठ दबाकर या सिर झुकाकर उसे रोकने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन हंसी है कि रुकने का नाम ही नहीं लेती और अक्सर शर्मिंदगी का कारण बन जाती है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो घबराइए मत, क्योंकि आप बिल्कुल नॉर्मल हैं और इसे फेस करने वाले अकेले नहीं हैं। 

साइंस की भाषा में इसे नर्वस लाफ्टर यानी घबराहट के कारण आने वाली हंसी कहा जाता है। आइए बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर हमारा दिमाग हमारे साथ ऐसा खेल क्यों खेलता है।

आखिर क्या है नर्वस लाफ्टर?

साइकोलॉजी में इसे 'असंगत भावना' यानी इंकॉन्ग्रस इमोशन (Incongruous Emotion) मानता है। आसान भाषा में कहें, तो यह एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें मन और व्यवहार आपस में मेल नहीं खाते और इसलिए हम अक्सर ऐसी जगह पर कोई ऐसी भावना व्यक्त करते हैं, जहां उसकी बिल्कुल भी जरूरत  नहीं होती। 

नर्वस लाफ्टर ऐसा ही एक इमोशन है, जो खुशी या मजाक में आने वाली हंसी नहीं, बल्कि आपके शरीर का एक डिफेंस मैकेनिज्म (बचाव का तरीका) है। जब हम किसी बात से बहुत ज्यादा असहज, डरे हुए या तनाव में होते हैं, तो हमारा शरीर उस भारी मेंटल प्रेशर को रिलीज करने के लिए हंसी का सहारा लेता है।

हम घबराहट या डर में क्यों हंसते हैं?

व्यक्ति के इस अजीबोगरीब व्यवहार पर वैज्ञानिक दशकों से रिसर्च कर रहे हैं। न्यूरोसाइंटिस्ट्स का मानना है कि इंसान के विकास के शुरुआती दौर में हंसी का ईजाद इसलिए हुआ था, ताकि आस-पास के लोगों को यह संकेत दिया जा सके कि 'यहां कोई खतरा नहीं है, सब सुरक्षित है'। 

इसलिए, जब आज हम किसी बहुत तनाव वाली या दर्दनाक हालात में फंस जाते हैं, तो हमारा दिमाग उस डर और दर्द से ध्यान हटाने के लिए खुद को 'पॉजिटिव सिग्नल' देने की कोशिश करता है, जो हंसी की तरह बाहर आता है।

ये भी है एक वजह

सीरियस हालातों में हंसने को लेकर एक और रिसर्च में वजह सामने आई। इसमें पता चला कि गंभीर हालातों में हंसी आने का एक कारण भावनाओं के ओवरफ्लो होना भी है। जिस तरह किसी क्यूट बच्चे को देखकर उसके गाल जोर से खींचने की इच्छा होती है, उसी तरह जब दिमाग में अचानक बहुत ज्यादा तनाव या चिंता भर जाती है, तो ब्रेन खुद को बैलेंस करने के लिए बिल्कुल उल्टे रिएक्शन (जैसे रोने वाली जगह पर हंसना) देता है।

कैसे काबू करें ये हंसी?

कभी-कभार नर्वस लाफ्टर आना आम बात है, लेकिन अगर इसके चलते आपको बार-बार ऑफिस या लोगों के बीच शर्मिंदगी उठानी पड़ती है, तो इसे कंट्रोल करना जरूरी है। आप इन तरीकों से इसे कंट्रोल कर सकते हैं- 

  • जब भी आपको लगे कि गलत वक्त पर हंसी आ रही है, तो डीप ब्रीदिंग करना शुरू कर दें
  • रोजाना कुछ मिनट मेडिटेशन और योग करने मन स्थिर रहता है। इससे आप अपनी भावनाओं पर कंट्रोल रखना सीख जाते हैं।
  • म्यूजिक सुनने या पेंटिंग जैसी क्रिएटिव चीजों में व्यस्त रखने से दिमाग को फोकस करने में मदद मिलती है। 
  • अगर आपको लगता है कि आपकी घबराहट बहुत ज्यादा है और आप अक्सर पैनिक हो जाते हैं, तो किसी थेरेपिस्ट की मदद ले सकते हैं। 

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