'कल दिखा लूंगी' की आदत बन सकती है ब्रेस्ट कैंसर का बड़ा खतरा, बिना दर्द वाली गांठ को कभी न करें अनदेखा
महिलाएं अक्सर अपनी सेहत, खासकर ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों को नज़रअंदाज़ करती हैं, जिससे बीमारी का पता देर से चलता है।

ब्रेस्ट कैंसर को अनदेखा कर देती हैं महिलाएं (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। उसे घर में सबका जन्मदिन, बच्चों का स्कूल फॉर्म, बड़े-बुजुर्गों की डॉक्टर की अपॉइन्ट्मेंट जैसी सारी चीजें याद रहती हैं, पर बात जब अपनी सेहत की आती है तो वो नजरअंदाज कर देती है। यही वजह है कि जब उसे छोटी गांठ का पता लगा, तो उसने सिर्फ इसलिए इसे कल के लिए टाल दिया क्योंकि दर्द नहीं हो रहा था।
यही कल ब्रेस्ट कैंसर को जीत दिलाता है, क्योंकि तब तक सबसे आखिर में पता चलने पर पछतावा ही हाथ लगता है।
ब्रेस्ट कैंसर को अनदेखा कर देती हैं महिलाएं
भारत में ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाला सबसे आम कैंसर है। ग्लोबोकैन की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2022 में ब्रेस्ट कैंसर के करीब 1.9 लाख केस देखने को मिले थे। रिपोर्ट तो यहां तक कहती हैं कि इस बीमारी से पीड़ित हर दो में से एक महिला की मृत्य हो जाती है, क्योंकि ज्यादातर मामलों में कैंसर का पता स्टेज III या IV में ही चल पाता है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि महिलाएं इसके लक्षणों को पहचानने के बावजूद देरी करती जाती हैं।
दर्द न होने का मतलब नुकसान न होना नहीं
इसके बारे में बात करने से पहले जान लें कि सारी गांठ ब्रेस्ट कैंसर नहीं होतीं। सिस्ट और फाइब्रोएडीनोमा ज्यादातर मामलों में सामान्य हैं और इनसे कोई नुकसान नहीं होता। पर ब्रेस्ट कैंसर का सबसे बड़ा संकेत है बिना दर्द वाली गांठ, जो सख्त हो और उसके किनारे में सामान्य हो।
ऐसे में समझने की जरूरत है कि कई बार दर्द खतरे की घंटे नहीं होती, बल्कि हमारी चुप्पी होती है। यहां दिए गए संकेतों को भी न करें नजर अंदाज:
ब्रेस्ट के साइज और शेप में बदलाव
त्वचा पर गड्ढे पड़ना या सिकुड़ जाना
निप्पल का अंदर की तरफ बढ़ना या उसमें से खूनी डिस्चार्ज
लालिमा, पपड़ीदार त्वचा या सूजन
स्तन के बगल में गांठ बनना
40 की उम्र के बाद एक दिन अपने नाम
एक मैमोग्राम ट्यूमर को हाथों से जांच करने के सालों पहले ब्पता लगा सकता है। ऐसे में 40 की उम्र पार कर चुकी हर महिला को साल में एक बार इसकी जांच जरूर करानी चाहिए। इसे कैलेंडर में ठीक वैसे ही मार्क कर लें, जैसे किसी का जन्मदिन। अगर मां या बाभन को ब्रेस्ट या ओवेरियन कैंसर हो चुका हो, तो डॉक्टर को इसके बारे में भी बताएं, ताकि उम्र से पहले भी समय-समय पर टेस्ट कराए जा सकें।
घबराना नहीं, एक्शन लेना है
ब्रेस्ट कैंसर का पता चलने पर या गांठ निकलने पर घबराना नहीं है, बल्कि इसकी जल्द से जल्द जांच करवाकर उस खतरे को टालना है। इस बात को समझें कि आपका परिवार आपको व्यस्त नहीं, सेहतमंद देखना चाहता है। इस अक्टूबर ‘कल देखेंगे’ की आदत को ‘आज दिखाऊंगी’ वाली आदत से बदलें। फिर किसी और महिला को भी ऐसा ही करने की सलाह दें।
“एक गांठ जो कल का इंतजार करती है, बढ़ती जाती है; एक महिला जो इसपर एक्शन लेती है, वो आने वाले कल को सुरक्षित रख सकती है।”
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(डॉ. मल्लिका ढांडा, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट (ब्रेस्ट एंड एंडोक्राइन सर्जरी) में सीनियर कंसल्टेंट हैं)
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