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    कहीं बचपन के घाव आपके आज पर तो नहीं डाल रहा असर? ट्रॉमा के 7 संकेतों से करें पहचान

    Updated: Sun, 30 Nov 2025 03:32 PM (IST)

    क्या आप जानते हैं आपके बचपन का ट्रॉमा वयस्क होने के बाद भी आपका पीछा करता रहता है? जी हां, बचपन में हुई किसी घटना का अगर आपके मन पर गहरा असर पड़ा है और उसका इलाज न किया जाए, तो यह ताउम्र आपके साथ रह सकता है। इसके कारण वयस्क होने के बाद भी आपका जीवन प्रभावित होता है। आइए जानें इसके संकेत (Trauma Symptoms) कैसे होते हैं।

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    वयस्क होने के बाद भी चुभते हैं बचपन के घाव (Picture Courtesy: Freepik)

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। चाइल्डहुड ट्रॉमा (Childhood Trauma) एक ऐसा गहरा जख्म है, जो बचपन में किसी डरावने, दर्दनाक या नकारात्मक अनुभव की वजह से होता है। बच्चा इन स्थितियों से निपटने के लिए भावनात्मक रूप से पूरी तरह तैयार नहीं होता और इसका असर उसके विकसित हो रहे दिमाग और व्यक्तित्व पर पड़ता है। 

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    यह ट्रॉमा अक्सर वयस्क होने के बाद भी व्यक्ति के विचारों, भावनाओं और व्यवहार में साफ दिखाई देता है। आइए जानें कुछ ऐसे लक्षणों (Signs of Childhood Trauma) के बारे में, जिनसे आप पहचान सकते हैं कि आपके बचपन ट्रॉमा आज भी आपके जीवन को प्रभावित कर रहा है।

    आसानी से डर जाना

    अगर आपको हल्की-सी आवाज या अचानक हुई कोई हरकत भी बहुत ज्यादा डरा देती है और आपका दिल जोर-जोर से धड़कने लगता है, तो यह ट्रॉमा का एक सामान्य लक्षण है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि ट्रॉमा के कारण आपकी बॉडी हमेशा खतरे को भांपने के लिए अलर्ट रहती है। 

    childhood trauma

    (Picture Courtesy: Freepik)

    फाइट या फ्लाइट मोड में रहना

    ट्रॉमा में व्यक्ति का नर्वस सिस्टम अक्सर 'एलर्ट' मोड में रहता है। मामूली तनाव या विवाद की स्थिति में भी शरीर में एड्रेनालाईन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे व्यक्ति या तो गुस्से में आकर आक्रामक व्यवहार करने लगता है या फिर स्थिति से बचकर भागना चाहता है।

    अचानक तेज गुस्सा आना

    बचपन में दबाए गए गुस्से और निराशा का भाव वयस्क होने पर अचानक तेज गुस्से के रूप में सामने आ सकता है। छोटी-छोटी बातों पर भी गुस्सा आना और उसे नियंत्रित न कर पाना, अक्सर बचपन के ट्रॉमा का संकेत है।

    विश्वास की कमी 

    जिस बच्चे के साथ उसके अपनों ने ही धोखा किया हो, उसके लिए दूसरों पर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है। वयस्क होने पर यह समस्या रिश्तों में गहराई तक न जाने देने, हमेशा संदेह करने और डर के कारण इंटिमेसी से बचने के रूप में दिखती है।

    बचने की आदत 

    ट्रॉमा से जुड़ी यादों या भावनाओं से बचने के लिए व्यक्ति उन स्थितियों, स्थानों या लोगों से कतराने लगता है जो उस ट्रॉमा की याद दिलाते हैं। यह बचाव रणनीति लंबे समय में उनकी सामाजिक और पेशेवर जिंदगी को सीमित कर देती है।

    लोगों को खुश रखने की जिद 

    बचपन में प्यार और अपनापन पाने के लिए जिन बच्चों को हमेशा 'अच्छा' बने रहना पड़ा, वे वयस्क होकर भी दूसरों को खुश रखने की कोशिश में अपनी जरूरतों और इच्छाओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। उन्हें डर होता है कि अगर वे 'ना' कहेंगे तो लोग उन्हें छोड़ देंगे।

    बहुत खर्च या जोखिम भरे व्यवहार 

    ये व्यवहार भीतर की खालीपन, दर्द या बेचैनी को भरने या दबाने का एक तरीका हो सकते हैं। बहुत खर्च करना, जुआ खेलना, ड्रग एडिक्शन जैसे जोखिम भरे व्यवहार अक्सर ट्रॉमा स राहत पाने की असफल कोशिश होते हैं।

     
     
    Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।