क्या आप जानते हैं आखिर वड़े के बीच में छेद क्यों होता है? सिर्फ सजावट नहीं, विज्ञान से जुड़ा है कारण
मेदु वड़े अब न सिर्फ दक्षिण भारत, बल्कि पूरे देश में खूब पसंद की जाने वाली डिश है। नारियल की चटनी और सांभर के साथ परोसी जाने वाली ये डिश एक खास शेप मे ...और पढ़ें

मेदु वड़े के बीच में छेद होने का असली कारण क्या है? (Picture Courtesy: Freepik)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। वड़ा, खासकर मेदु वड़ा न केवल दक्षिण भारत, बल्कि पूरे देश का एक मशहूर व्यंजन है। सांभर और चटनी के साथ परोसे जाने वाले इस कुरकुरे और नरम व्यंजन की सबसे खास पहचान है, इसके बीच में मौजूद एक छोटा सा छेद। अक्सर लोग इसे सिर्फ एक पारंपरिक बनावट या सजावट का हिस्सा मानते हैं, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक और पाक-कला से जुड़े कारण छिपे हैं। आइए जानते हैं कि वड़े के बीच में छेद क्यों होता है।
समान रूप से पकना
वड़े के बीच में छेद होने का सबसे मुख्य और वैज्ञानिक कारण थर्मोडायनामिक्स से जुड़ा है। वड़ा बनाने के लिए उड़द की दाल के गाढ़े बैटर का इस्तेमाल किया जाता है। जब हम किसी मोटे और गोल आकार की चीज को तलते हैं, तो तेल की गर्मी सबसे पहले बाहरी सतह को पकती है।
यदि वड़ा पूरी तरह से ठोस यानी बिना छेद के होगा, तो तेल की आंच बाहरी किनारों को तो जल्दी भूरा और कुरकुरा कर देगी, लेकिन वड़े का सेंटर कच्चा रह जाएगा। बीच में छेद होने से गर्म तेल वड़े के मध्य भाग से भी होकर गुजरता है। इससे वड़ा अंदर और बाहर दोनों तरफ से एक समान तापमान पर पकता है।
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(Picture Courtesy: Freepik)
क्षेत्रफल बढ़ाना
खाना पकाने के विज्ञान में सरफेस एरिया का बहुत महत्व है। जब हम वड़े के बीच में छेद करते हैं, तो हम तेल के संपर्क में आने वाली सतह को बढ़ा देते हैं। ज्यादा सरफेस एरिया का मतलब है कि ज्यादा हिस्सा तेल के सीधे संपर्क में आता है, जिससे वड़ा चारों तरफ से समान रूप से 'क्रिस्पी' बनता है। छेद की वजह से वड़ा कम समय में अच्छी तरह पक जाता है, जिससे यह बाहर से जलता नहीं है और अंदर से स्पंजी बना रहता है।
तेल का कम अब्जॉर्प्शन
यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन छेद वाला वड़ा बिना छेद वाले वड़े की तुलना में कम तेल सोखता है। अगर वड़ा बीच में से कच्चा रह जाए, तो वह ज्यादा चिपचिपा और भारी हो जाता है। एक अच्छी तरह से और जल्दी पका हुआ वड़ा तेल को बाहर ही रखता है और भीतर से हल्का बना रहता है।
पारंपरिक और सांस्कृतिक महत्व
भारत में खाना बनाने की तकनीकें सदियों के अनुभव से विकसित हुई हैं। हमारे पूर्वजों को पता था कि भारी दालों को पचाने के लिए उन्हें अच्छी तरह पकाया जाना जरूरी है। छेद वाली बनावट यह सुनिश्चित करती थी कि वड़ा पाचक और हल्का रहे। इसके अलावा, वड़े को हाथ से बनाकर बीच में छेद करने की कला एक विशेष कौशल मानी जाती है, जो इसे अन्य पकौड़ों से अलग पहचान देती है।
पकड़ने और परोसने में आसानी
प्राचीन काल में या बड़े आयोजनों में, वड़ों को एक धागे या लकड़ी की डंडी में पिरोकर रखा जाता था। बीच में छेद होने के कारण उन्हें एक साथ ले जाना और परोसना आसान होता था। आज भी, हलवाई वड़ों को तेल से निकालने के लिए एक लंबी सीख का उपयोग करते हैं, जो इन छेदों के कारण ही हो पाता है।

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