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    Janmashtami 2023: चैतन्‍य महाप्रभु को बाल रूप में श्री कृष्‍ण का यहीं हुआ था दर्शन, सुनाई दी थी बांसुरी की धुन

    By Arijita SenEdited By: Arijita Sen
    Updated: Tue, 05 Sep 2023 12:20 PM (IST)

    Janmashtami 2023 वैष्णव धर्म के प्रचारक और भगवान श्री कृष्‍ण के परम भक्‍त श्री चैतन्य महाप्रभु को सन 1505 में साहिबगंज के तालझारी में कन्हैयास्थान इस्काॅन मंदिर में ही प्रभु के बाल रूप का दर्शन हुआ था। यहां मंंदिर में जन्‍माष्‍टमी की धूम है। इस मौके पर झारखंड के साथ-साथ बंगाल से भी भक्‍तों का समागम होता है। मंदिर में विदेशों से भी भक्‍त आते हैं।

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    कन्हैयास्थान इस्काॅन मंदिर में राधा कृष्‍ण की प्रतिमा।

    कालीचरण मंडल, तालझारी (साहिबगंज)। Janmashtami 2023: विश्वप्रसिद्ध कन्हैयास्थान इस्काॅन मंदिर में सात व आठ सितंबर को होने वाले कृष्ण जन्माष्टमी समारोह की तैयारी अंतिम चरण में है। पांच सितंबर को संध्या सात बजे अधिवास कार्यक्रम होगा। इसके बाद सात व आठ सितंबर को दो दिवसीय भव्य धार्मिक अनुष्ठान होगा, जिसमें पश्चिम बंगाल व झारखंड से सैकड़ों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

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    चैतन्य महाप्रभु को श्रीकृष्ण के बाल रूप का दर्शन

    सात सितंबर को भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व तथा आठ सितंबर को इस्काॅन के संस्थापक कृष्णकृपा मूर्ति एसी भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद का आविर्भाव दिवस व नंदोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।

    कहा जाता है कि कन्हैयास्थान में सन 1505 में वैष्णव धर्म के प्रचारक श्री चैतन्य महाप्रभु को भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप का दर्शन हुआ था।

    यह है प्रचलित कहानी

    श्री चैतन्य चरित्रमृत में वर्णित है कि श्री चैतन्य महाप्रभु अपने अन्य भक्तों के साथ गयाधाम में अपने माता-पिता का पिंड दान कर वापस लौट रहे थे। इसी बीच उन्हें सुंदर मुकुट और मोर पंखधारी भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप का दर्शन हुआ और बांसुरी की मधुर धुन सुनाई दी थी।

    इससे भावुक श्री चैतन्य महाप्रभु काफी देर तक हाय कृष्ण हाय कृष्ण कह भावुकतावश रोने लगे थे। ऐसा देख अन्य कृष्ण भक्तों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा और वे सब भी जंगलों में इधर-उधर भाव विह्वल होकर भगवान श्रीकृष्ण को खोजने लगे थे।

    मंदिर से अष्‍टधातु से बनी मूर्ति चोरी

    करीब 30 वर्षों से मंदिर में पुजारी के रूप में सेवा कर रहे मथुरा वल्लभ दास ब्रह्मचारी ने बताया कि आरंभ में यह मंदिर भगवान श्रीराम के भक्त तुलसीदास बाबा, गरीबदास बाबा, नरसिंह दास बाबा द्वारा क्रमानुसार संचालित हुआ था।

    सन 1995 में मंदिर में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण राधा के अष्टधातु से बनी मूर्ति चोरी हो गई थी। इससे व्यथित नरसिंह दास बाबा ने तत्कालीन परिस्थिति को देखते हुए मंदिर संचालन के लिए सन 1995 में इस्काॅन को सेवायत के रूप में सौंप दिया था।

    चीन, अमेरिका से आते हैं भक्‍त

    यहां भारत के अलावे रूस, जापान, वेस्टइंडीज, अमेरिका, इटली, दक्षिण अफ्रीका, चीन, जर्मनी, पोलैंड आदि देशों के कृष्ण भक्तों का आवागमन होता है। तमाल वृक्ष का विशेष महत्व: कन्हैयास्थान मंदिर के उत्तर दिशा में तमाल के कई वृक्ष है जिसका धार्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व होता है। कहते हैं तमाल वृक्ष वहीं होता है, जहां भगवान श्रीकृष्ण विराजमान रहते हैं।