500 सालों से यहां पूजे जा रहे हैं राधा कृष्ण, नवाबों से मिली थी मंदिर के लिए जमीन, गहरी है लोगों की आस्था
गढ़वा के मझिआंव नगर पंचायत क्षेत्र में राधा कृष्ण का एक बहुत पुराना मंदिर है जिस पर लोगों की गहरी आस्था है। इस मंदिर में लगभग 500 वर्षों से भगवान की पूजा-अर्चना हो रही है। जन्माष्टमी के मौके पर यहां भव्य आयोजन होता है। दूर-दूर से भक्त आते हैं। इस मंदिर में हर साल 200 कन्याओं का सामूहिक विवाह भी कराया जाता है।

विनय कुमार, मझिआंव (गढ़वा)। झारखंड के गढ़वा जिले के मझिआंव नगर पंचायत क्षेत्र में पुरातन राधाकृष्ण का मंदिर है। यहां लगभग 500 वर्षों से भगवान की पूजा-अर्चना हो रही है। जन्माष्टमी पर भव्य आयोजन होता है। प्रत्येक वर्ष विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इस मंदिर के प्रति लोगों की श्रद्धा देखते ही बनती है।
मंदिर में है लोगों की गहरी आस्था
भगवान की छठी पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन होता है, जिसे देखने के लिए आसपास के क्षेत्र के लोग यहां पहुंचते हैं। बाबा केशव नारायण दास के नेतृत्व में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होता है। मंदिर के निर्माण के समय से ही यह परंपरा निरंतर चली आ रही है।
मंदिर के पुरोहितों की रही है लंबी विरासत
राधा कृष्ण मंदिर के पुरोहितों की लंबी विरासत रही है। वर्तमान में बाबा केशव दास मंदिर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। बताया जाता है कि लखनऊ के नवाबों ने उस समय राम नारायण दास को मंदिर के लिए जमीन दी थी। उनके बाद मंदिर का उत्तराधिकार राघव दास ने संभाला।
इसी तरह रामशरण दास, सोबरन दास, देवकी दास, महावीर दास, विश्वनाथ दास, रामटहल दास, गुलाब दास, राम लखन दास, रामजीवन दास, गणेश दास, प्रपन्ना दास, भरत दास, शत्रुघ्न दास ने बारी-बारी से मंदिर की जिम्मेदारी निभाई।
मंदिर में हर साल कराया जाता है सामूहिक विवाह
वर्तमान में बाबा केशव नारायण दास मंदिर के महंत है। जबकि उपानसिक साधु झाकक्कड़ दास, धर्मदास आदि भी यहां रहते थे।
इस मंदिर की भूमि मंदिर के संस्थापक राम नारायण दास ने नवाबी राज्य शासन काल में 45 एकड़ जमीन प्राप्त किए थे। उस वक्त मंदिर के चारों तरफ घनघोर जंगल था।
उसी में बाबा राम नारायण दास तपस्या करते थे। इस मंदिर में प्रत्येक साल 200 कन्याओं का सामूहिक विवाह कराया जाता है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।