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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 13, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रांची हिंसा की जांच के लिए राज्य सरकार ने 31 जनवरी तक का ही दिया समय, समिति ने मांगा था 15 मई 2023 तक का वक्‍त

By Jagran NewsEdited By: Arijita Sen
Published: Fri, 13 Jan 2023 09:05 AM (IST)

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नूपुर शर्मा के बयान के बाद रांची में भड़की हिंसा
नूपुर शर्मा के बयान के बाद रांची में भड़की हिंसा

राज्य ब्यूरो, रांची। भाजपा से निलंबित नेत्री नूपुर शर्मा की विवादित टिप्पणी के विरोध में रांची में गत वर्ष दस जून 2022 को भड़की उपद्रव व हिंसा मामले की जांच कर रही उच्चस्तरीय समिति को राज्य सरकार ने इस माह के अंत तक यानि 31 जनवरी 2023 तक जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश जारी कर दिया है। समिति ने जांच पूरी करने के लिए राज्य सरकार से 15 मई 2023 तक का समय मांगा था, जिसे राज्य सरकार ने खारिज कर दिया है। अब बताया जा रहा है कि उच्च स्तरीय जांच समिति को 31 जनवरी के बाद कोई अवधि विस्तार नहीं मिलेगा।

समिति निर्धारित समय में जांच नहीं कर सकी पूरी

रांची में हिंसा के बाद हेमंत सोरेन की सरकार ने आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव अमिताभ कौशल व एडीजी अभियान संजय आनंदराव लाठकर की दो सदस्यीय टीम को उच्च स्तरीय जांच की जिम्मेदारी दी थी। टीम को जांच में लंबा वक्त लग रहा है। राज्य सरकार ने जो समय निर्धारित किया था, उस निर्धारित समय में जांच पूरी नहीं हो सकी।

इसके बाद जांच टीम ने राज्य सरकार से पहले दो महीने का वक्त मांगा था, लेकिन जांच समिति को सरकार से अवधि विस्तार नहीं मिला था। राज्य सरकार ने समिति से ही पूछा था कि समिति अंतिम रूप से यह जानकारी दें कि उन्हें जांच के लिए कुल कितना वक्त चाहिए। इस पर समिति ने सरकार को बताया था कि उन्हें 15 मई 2023 तक का वक्त दिया जाय। उनकी मांग को सरकार ने अस्वीकृत कर दिया और नया समय दे दिया है।

जांच में विलंब होने का यह बताया था कारण

उच्चस्तरीय जांच समिति ने पूर्व में जो अवधि विस्तार के लिए सरकार से जो पत्राचार किया था, उसमें जांच में समय लगने की वजह भी बताई थी। समिति ने राज्य सरकार को जानकारी दी थी कि रांची उपद्रव मामले में रांची पुलिस व सीआइडी ने जो चार्जशीट दाखिल की थी, उस चार्जशीट की कापी दोनों से मांगी गई। घटना के दिन पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों की सक्रियता, खुफिया तंत्र की सूचना समेत अन्य विषयों पर सवाल उठाए गए हैं।

उपद्रव में चली गई थी दो की जान

रांची के मेन रोड में उपद्रव, गोलीबारी तथा पत्थरबाजी में विरोध मार्च निकालने वाले जुलूस में शामिल दो युवकों की जान चली गई थी। इस घटना में दोनों तरफ से दो दर्जन से अधिक पुलिस व आम लोग जख्मी हुए थे, जिनका रिम्स में इलाज कराया गया था।

राज्यपाल भी जांच में विलंब पर जता चुके हैं नाराजगी

राज्यपाल रमेश बैस भी रांची उपद्रव की उच्च स्तरीय जांच में विलंब पर नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री से पत्राचार भी किया था और इस पर गंभीरता से विचार करने को कहा था। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से रांची हिंसा मामले में रिपोर्ट भी मांगी थी।

हाई कोर्ट ने एसएसपी व थानेदार के स्थानांतरण पर जताई थी आपत्ति

हाई कोर्ट ने भी इस मामले में सुनवाई के दौरान सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने टिप्पणी की थी कि इस मामले की पुलिस व सीआइडी से अलग-अलग जांच कराने से प्रतीत होता है कि सरकार आरोपितों को बचाना चाहती है। सीआइडी ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि इस तरह के मामलों की जांच में कितनी सफलता मिली। अदालत ने कहा कि घटना के प्रत्यक्षदर्शी रांची के तत्कालीन एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा व डेलीमार्केट थानेदार को हटाने के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं है।

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