झारखंड में छोटे वन उत्पादों का रेट निर्धारित कर सकेगी ग्रामसभा, वन विभाग के अधिकारियों से लेगी मदद
पेसा कानून के तहत ग्राम सभा को अब लघु वनोपज के विपणन और मूल्य निर्धारण का अधिकार होगा। वे पांच वर्षीय सूक्ष्म प्रबंधन योजना बनाएंगी, जिससे वनोपज का सम ...और पढ़ें

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)
राज्य ब्यूरो, रांची। पेसा के तहत अब लघु वन उपज एवं इसके विपणन पर ग्राम सभा का अधिकार रहेगा। इसके लिए पांच वर्षीय सूक्ष्म प्रबंधन योजना एवं वार्षिक कार्य योजना तैयार किया जा सकेगा। ग्राम सभा ऐसी योजना तैयार करने हेतु वन विभाग के वनपाल या सक्षम पदाधिकारी से सहयोग भी लेगी।
यह भी तय होगा कि ग्राम सभा सूक्ष्म प्रबंधन योजना के जरिए लघु वनोपज का समुचित दोहन तथा जैव विविधता व जैविक श्रोतों का संरक्षण एवं संवर्धन कर सकेगी। इसके साथ ही ग्राम सभा लघु वनोपज के प्रत्येक संग्रहकर्ता का नाम, उनके द्वारा संग्रह किए जाने वाले लघु वनोपज, उसकी मात्रा इत्यादि अभिलेख पंजी में संधारित करेगी।
लघु वनोपज की सीमित मात्रा होने की स्थिति में, ग्राम सभा आर्थिक रूप से कमजोर तथा संसाधन विहीन लोगों को प्राथमिकता देते हुए एक चक्रीय व्यवस्था बना सकती है। संग्रह करने वाले एकत्रित लघु वनोपज को अपनी पसंद के अनुसार बेचने के लिए स्वतंत्र होंगे।
ग्राम सभा झारखंड राज्य वन विकास निगम लिमिटेड अथवा राज्य सरकार द्वारा अधिकृत किसी अन्य सहकारी संघ या सरकार द्वारा गठित सहकारिता समिति या फेडरेशन को संग्राहक से निर्धारित मूल्यों पर लघु वनोपज क्रय कर बेचने के लिए अधिकृत कर सकती है। इससे प्राप्त आमदनी का प्रयाेग विकास कार्यों के लिए किया जा सकेगा।
लघु वनोपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग या कोई अन्य सरकारी विभाग के द्वारा विभागीय नियमों के अनुसार किया जा सकेगा।
एक या एक से अधिक ग्राम सभा चाहे तो संयुक्त रूप से वन विभाग के वनपाल या सक्षम प्राधिकार के सहयोग से वनोपज की क्रय एवं बिक्री के लिए न्यूनतम मूल्य तय कर सकेगी। ग्राम सभा ऐसे न्यूनतम मूल्य पर क्रय तथा उसके बेचने या निपटान की व्यवस्था करेगी।
ग्राम सभा, लघु वनोपज पर संग्रहकर्ता या व्यापारी द्वारा देय रायल्टी का निर्धारण ग्राम सभा के बैठक में कर सकेगी। प्राप्त कोष को ग्राम सभा के खाता में जमा किया जाएगा।
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