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    अब सरकारी डॉक्टरों के भरोसे नहीं रहेंगे मरीज, झारखंडवासियों को नए साल में बड़ा गिफ्ट देने जा रही हेमंत सरकार

    Updated: Wed, 01 Jan 2025 07:15 AM (IST)

    2025 में झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने वाला है। राज्य कर्मियों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना और मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य योजना के तहत अब सरकारी अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी। निजी विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं ली जाएंगी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विकसित किया जाएगा। रांची में रिम्स की तर्ज पर एक और मेडिकल कॉलेज खुलेगा और कोडरमा खूंटी और गिरिडीह में भी मेडिकल कॉलेज खुलेंगे।

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    झारखंडवासियों को नए साल में बड़ा गिफ्ट देने जा रही हेमंत सरकार

    राज्य ब्यूरो, रांची। नव वर्ष 2025 में राज्य में ऐसी दो बड़ी योजनाएं मूर्त रूप लेंगी, जिनके पूरी तरह लागू होने से रिम्स सहित अन्य सरकारी अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी। इनमें एक राज्य कर्मियों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना है, जो जनवरी माह में ही लॉन्च होगी।

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    इसके माध्यम से राज्य के विभिन्न विभागों, कार्यालयों एवं बोर्ड-निगमों में कार्यरत लगभग 10 लाख राज्य कर्मियों और पेंशनरों को पांच से दस लाख रुपये तक निश्शुल्क इलाज सूचीबद्ध अस्पतालों में हो सकेगा।

    दूसरे, मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य योजना भी पूरी तरह क्रियान्वित होगी, जिसके तहत लाभुक परिवारों का अब पांच लाख के बजाय 15 लाख रुपये तक निश्शुल्क इलाज होना है। इन दोनों महत्वाकांक्षी योजनाएं से राज्य की बड़ी आबादी कवर हो जाएगी, बशर्तें इनका अनुपालन सही तरीके से हो सके।

    राज्य सरकार ने ऐसी नीति भी लागू की है, जिसके तहत अब सरकारी अस्पताल चिकित्सक नहीं होने का बहाना नहीं बना सकते। सिविल सर्जनों को आर्थिक शक्तियां दी गई हैं, जिससे वे निजी विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवा ले सकते हैं। इसके लिए प्रतिवर्ष की राशि भी निर्धारित की गई है।

    सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विकसित करने का निर्णय

    • राज्य सरकार की नीति सदर अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ऑपरेशन की सुविधा बहाल करने की भी है।
    • रांची सदर अस्पताल ने इसमें बेहतर काम किया तो इसकी तर्ज पर पांच अन्य जिलों में भी सदर अस्पतालों या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विकसित करने का निर्णय लिया गया है।
    • गिरिडीह के गांडेय, साहिबगंज के बरहेट, जामताड़ा सदर के अलावा दो अन्य जिलों का चयन होना है। राज्य में सबसे बड़ी समस्या चिकित्सकों की कमी की है, जिसे दूर करने के लिए रांची में रिम्स की तर्ज पर एक अन्य मेडिकल कालेज कांके के रिनपास परिसर में खोले जाने का निर्णय लिया गया है।
    • बोकारो, कोडरमा और चाईबासा में पहले से इसपर काम चल रहा है। वर्ष 2025 में कोडरमा मेडिकल कालेज का निर्माण पूरा हो सकता है।
    • केंद्र ने चालू वित्तीय वर्ष में ही खूंटी और गिरिडीह में मेडिकल कालेज खोलने की योजना की स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस योजना पर भी नए वर्ष में तेजी से काम होने की उम्मीद है।

    दवा की कड़ी निगरानी

    स्वास्थ्य विभाग एक ऐसे पोर्टल के निर्माण पर काम कर रहा है, जिसके तहत न केवल सरकारी बल्कि निजी क्षेत्र में क्रय-विक्रय की जानेवाली दवा पर आनलाइन निगरानी की जा सकेगी।

    वर्तमान में निजी क्षेत्र में बिक्री की जानेवाली दवा की निगरानी तो दूर सरकारी क्षेत्र में आपूर्ति की जानेवाली दवा की भी निगरानी नहीं हो पाती। अब इसके लिए तंत्र विकसित होने से नकली दवा की बिक्री और आपूर्ति पर रोक लग सकेगी। 

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