Jharkhand Politics: 2024 में झारखंड की राजनीति में उभरा नया 'सितारा', उथल-पुथल और हेमंत की वापसी का बना साक्षी
वर्ष 2024 की शुरुआत और मध्य में झारखंड की राजनीति में सियासी उथल-पुथल मच गई थी। झारखंड में सबसे बड़ा संकट तब आया था जब ईडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के यहां छापेमारी की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद हेमंत सोरेन के जेल से निकलने पर चंपई सोरेन को हटा दिया गया और हेमंत सोरेन फिर से मुख्यमंत्री बने।

प्रदीप सिंह, रांची। Jharkhand Political News Today: झारखंड में वर्ष-2024 की शुरुआत ही हाई प्रोफाइल राजनीतिक ड्रामा से हुई। पहले महीने में ही ईडी की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के यहां छापेमारी और गिरफ्तारी के बाद सत्ता परिवर्तन इतनी तेजी से हुआ, जितना पहले शायद ही कभी यहां देखा गया हो।
30 जनवरी को नई दिल्ली से 1200 किलोमीटर की सड़क यात्रा कर हेमंत सोरेन अपने सरकारी आवास में उपस्थित हुए तो सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए। 31 जनवरी को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के कुछ ही देर बाद हेमंत सोरेन को राजभवन में ईडी ने गिरफ्तार कर लिया।
चंपई सोरेन बनाए गए सीएम
इससे पहले उन्होंने समर्थक विधायकों को इस बात के लिए मनाया कि वे चंपई सोरेन को उनके उत्तराधिकारी के तौर पर स्वीकार करें। बताया जाता है कि ज्यादातर विधायक इसके पक्ष में भी नहीं थे। लेकिन, हेमंत सोरेन के दबाव व आग्रह के सामने उनकी एक नहीं चली।
चंपई सोरेन ने भी आसानी से बहुमत साबित कर दिया। टाइगर के नाम से लोकप्रिय इस नेता ने पांच माह तक खुद को हेमंत सोरेन पार्ट-दो कहकर सरकार चलाई।
हेमंत सोरेन के जेल से निकलने पर चंपई सोरेन को हटाया गया
हेमंत सोरेन जब जेल से लौटे तो उन्हें पद से हटना पड़ा। बाद में जब हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने तो वे उनके मंत्रिमंडल में सदस्य बनें। लेकिन, विधानसभा चुनाव की घोषणा के पहले उन्होंने पाला बदलकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। भाजपा ने उनका भरसक इस्तेमाल हेमंत सोरेन के विरुद्ध किया।
लेकिन, काफी मजबूत होकर उभरे हेमंत सोरेन के विरुद्ध उनकी एक नहीं चली। हेमंत सोरेन ने विधानसभा चुनाव में भाजपा के मजबूत प्रचार तंत्र का सामना करते हुए शानदार तरीके से सत्ता में वापसी की। इसकी धमक आगे आने वाले वर्षों में भी बनी रहेगी।
झारखंड की राजनीति का नया सितारा कल्पना सोरेन
हेमंत सोरेन के कानूनी और राजनीतिक संघर्ष के बीच झारखंड के राजनीतिक परिदृश्य में उनकी पत्नी कल्पना सोरेन एक नया सितारा बनकर उभरीं। कल्पना ने अपने उल्लेखनीय धैर्य और दृढ़ संकल्प के दम पर मजबूत जगह बनाई।
जून में उन्होंने गांडेय विधानसभा क्षेत्र से उपचुनाव में जीतकर विधानसभा में कदम रखा। उसी सीट से हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में भी जीत दोहराई। कल्पना सोरेन ने न केवल पार्टी के भीतर अपनी जगह मजबूत की, बल्कि उन्होंने झारखंड के एक मजबूत राजनीतिक ताकत के रूप में पहचान बनाई।
उन्होंने पहले लोकसभा चुनाव और बाद में विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक रणनीति तैयार की। पति हेमंत सोरेन के साथ उन्होंने विधानसभा चुनाव में धुंआधार प्रचार अभियान चलाया।
राजनीतिक हस्तियों को झटका भी लगा
वर्ष-2024 में कई राजनीतिक हस्तियों को झटका भी लगा। इसमें शिबू सोरेन परिवार की बड़ी बहू सीता सोरेन शामिल हैं। इस वर्ष लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल होकर उन्होंने सुर्खियां बटोरी। यह झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए तात्कालिक झटका था।
वह पहले दुमका लोकसभा सीट से चुनाव हार गईं। विधानसभा चुनाव में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उनकी राजनीतिक डगर आसान नहीं है।
इसी प्रकार पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा ने बेहतर राजनीतिक भविष्य की आस में भाजपा में शामिल होने का निर्णय किया। उन्हें भी पहले लोकसभा और बाद में विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
आजसू पार्टी के अध्यक्ष सुदेश महतो, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी, हेमंत सरकार में मंत्री रहे बन्ना गुप्ता, मिथिलेश कुमार ठाकुर को हार का सामना करना पड़ा।
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