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    लैपटॉप खरीदने में हुई गडबड़ी, आरोपित अधिकारियों को किया गया शोकॉज; रांची स्‍वास्‍थ्‍य विभाग से जुड़ा है मामला

    Updated: Wed, 03 Apr 2024 11:57 AM (IST)

    स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत आयुष निदेशालय में 263 लैपटाॅप की खरीद में गंभीर वित्तीय अनियमितता बरतने की बात सामने आई है। इसमें आरोपित अधिकारियों को 15 अप्रैल तक जवाब देने के लिए कहा गया है। इसके बाद उनसे राशि की वसूली की जाएगी। पता चला है कि मनपसंद कंपनी को ऑर्डर देने के लिए पूर्व निदेशक और दो नोडल अफसरों ने खेल रचा था।

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    रांची स्‍वास्‍थ्‍य विभाग द्वारा लैपटॉप खरीदने में की गई गड़बड़ी।

    पवन कुमार, रांची। स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत आयुष निदेशालय में 263 लैपटाॅप की खरीद में गंभीर वित्तीय अनियमितता बरतने वाले पूर्व निदेशक डा. फजलुस शमी समेत चार अधिकारियों को शोकाॅज किया गया है। सभी को 15 अप्रैल तक जवाब देने को कहा गया है। इसके बाद उनसे राशि की वसूली की जाएगी।

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    लैपटॉप की खरीद में जमकर हुई धांधली

    निदेशालय में लैपटाॅप खरीद में अधिकारियों ने जमकर धांधली की है। मनपसंद कंपनी से लैपटाॅप खरीदने के लिए कागजात तक में हेराफेरी की। आयुष निदेशालय में हुए घोटाले की जांच विभागीय संयुक्त सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज ने थी। कमेटी ने माना था कि निवर्तमान निदेशक डा. फजलुस शमी, राज्य कार्यक्रम प्रबंधक विमल केशरी और नोडल अफसर राहुल कुमार और एक अन्य ने गड़बड़ी की है।

    संबंधित ऑर्डर की कॉपी भी फाइल में नहीं लगाई

    निविदा समिति की बैठक सात अक्टूबर 2022 को हुई। इस बैठक में नोरा फोटोलैब की जगह नेटकाम इंफोटेक को सफल बताया गया, जबकि नोरा फोटोलैब टेंडर की सभी शर्तों को पूरा कर रहा था। इस मामले को छुपाने के लिए इस बैठक की कार्यवाही को निर्गत भी नहीं किया गया।

    इसके बाद दो नवंबर को टेंडर समिति की बैठक में श्याम इंफोटेक को टेंडर को न्यूनतम (एल-1) पाया गया और उसे 263 लैपटाप की आपूर्ति का आदेश दे दिया गया। इस बैठक की कार्यवाही को भी निर्गत नहीं किया गया और न ही उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी गई।

    जांच समिति ने माना है कि सारी प्रक्रिया एक षडयंत्र के तहत की गई है ऐसा प्रतीत होता है। आश्चर्यजनक यह कि फाइल में लैपटाॅप का कार्यादेश तक संधारित नहीं किया गया है।

    जैप आईटी से कराई जानी थी जांच

    कंपनी को दिए गए खरीद आदेश में स्पष्ट था कि सप्लाई किए गए लैपटाॅप की जांच जैप आइटी अथवा एनआइसी से कराई जाएगी। लेकिन, निदेशालय ने स्वीकृत्यादेश की अनदेखी कर एक अलग जांच कमेटी गठित कर दी। इसमें सिस्टम एनालिस्ट अवनीन्द्र कुमार, एचआइएमएस प्रबंधक मयंक अशोक और लिपिक अमन कुमार को शामिल किया गया।

    13 दिसंबर को इस कमेटी ने लैपटाप की जांच की। लैपटाप में दिया गया साफ्टवेयर ओरिजनल है कि पायरेटेड, इसकी भी जांच होनी चाहिए थी, जो कि नहीं हुई। जब भुगतान की फाइल दिवाकर झा के पास उपस्थापित की गई तो उन्होंने साॅफ्टवेयर की जांच कराने को लिखा। इसके बाद माइक्रोसाफ्ट कंपनी को एक मेल निदेशालय की ओर से भेजा गया, लेकिन उसका जबाब आज तक नहीं आया।

    बिना साॅफ्टवेयर की जांच के ही राहुल कुमार ने भुगतान की फाइल वित्त कोषांग को न देकर सीधे निदेशक को भेज कर श्याम इंफोटेक को लैपटाप आपूर्ति मद में 88,32,232 रुपये भुगतान कर दिया। जांच कमेटी ने माना है कि इस अनियमित निविदा प्रक्रिया में एसपीएम विमल केशरी, नोडल पदाधिकारी राहुल कुमार और प्रभारी निदेशक डा. फजलुस शमी पूर्ण रूप से दोषी हैं। निविदा समिति की भूमिका भी संदेहास्पद है।

    अधिकारियों ने फाइल में लगे कागजात को भी बदल दिया

    निदेशालय की ओर से नवनियुक्त 263 सीएचओ को लैपटाप देने की योजना तैयार की गई। प्रति लैपटाॅप 35 हजार की राशि राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत की गई थी। निदेशालय ने लैपटाॅप खरीदने को 15 अगस्त 2022 को जेम पोर्टल पर टेंडर प्रकाशित किया था। कुल 12 कंपनियों ने टेंडर भरने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया।

    हालांकि, कोई भी कंपनी तकनीकी मूल्यांकन में सफल नहीं हो पाई। इस कारण निविदा समिति ने टेंडर रद करने का निर्णय लिया। इसके बाद आरोपित अधिकारियों ने खेल शुरू किया। आयुष के नोडल अधिकारी दिवाकर चंद्र झा ने फाइल में लिखा कि तकनीकी मूल्यांकन की कार्रवाई संचिका की पृष्ठ संख्या 139 पर संधारित है।

    जांच समिति ने पाया कि आरोपितों ने इसे बदल दिया। फिर सोची समझी साजिश के तहत नोडल पदाधिकारी को अनुपस्थित दिखाकर राज्य कार्यक्रम प्रबंधक विमल केशरी ने फाइल बढ़ाई और राहुल कुमार ने फिर से निविदा समिति की बैठक बुलाने का आदेश निदेशक से प्राप्त कर लिया।

    निविदा समिति की फिर हुई बैठक में आश्चर्यजनक रूप से दो तीन कंपनियों श्याम इंफोटेक, नोरा फोटोलैब और अबिरोद्दय टेक्नोलाजी को सफल घोषित कर वित्तीय बीड खोलने की अनुशंसा कर दी गई। जबकि, इस बैठक में वित्त विभाग के प्रतिनिधि अनुपस्थित थे।

    मैंने कोई गलत काम नहीं किया है। अच्छा काम करने के बाद जांच आदि कराई जा रही है। अब सरकार जांच करा रही है तो रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ बोलूंगा- फजलुस शमी, पूर्व निदेशक आयुष।

    जांच रिपोर्ट अभी मैंने नहीं देखी है। इसलिए अभी कुछ कह नहीं सकता। लैपटाप खरीद में गड़बड़ी की बात किस आधार पर की गई है। इसकी जानकारी नहीं है-  विमल केशरी, राज्य कार्यक्रम प्रबंधक।

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