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    काॅल गर्ल सर्विस के नाम पर देश भर के लोगों से ठगी, झांसे में लाकर ऐंठे लाखों रुपये, पुलिस ने किया भंडाफोड़

    By Ajeet KumarEdited By: Arijita Sen
    Updated: Thu, 21 Sep 2023 10:42 AM (IST)

    जयनगर पुलिस ने एक नाबालिग सहित दो आरोपितों को गिरफ्तार कर एक फेक कॉल गर्ल सर्विस गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इन अपराधियों ने कॉल गर्ल सर्विस देने के नाम पर देशभर के लोगों से ठगी है और उनसे लाखों ऐंठे हैं। इनकी पहचान पहचान जितेंद्र साव व दिलीप साव के रूप में हुई है। इस मामले की गहराई से जांच की जा रही है।

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    कालगर्ल सर्विस के नाम पर कर रहे थे देशभर में ठगी।

    संवाद सहयोगी, कोडरमा। जामताड़ा की तर्ज पर कोडरमा में भी साइबर क्राइम गिरोह सक्रिय हो गए हैं। जयनगर थाना क्षेत्र के परसाबाद के दो अपराधियों द्वारा कालगर्ल सर्विस के नाम पर देश भर के लोगों से ठगी की जा रही थी।

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    एक नाबालिग सहित दो आरोपित गिरफ्तार

    एसपी को मिली सूचना के बाद जयनगर पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से तीन मोबाइल, कई सिम कार्ड, बैंक पासबुक आदि बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान जितेंद्र साव व दिलीप साव निवासी परसाबाद के रूप में हुई। एक आरोपित नाबालिग है।

    प्रेस वार्ता में मामले की जानकारी देते एसपी अनुदीप सिंह।

    कॉल गर्ल सर्विस की फर्जी साइट

    एसपी अनुदीप सिंह ने बताया कि पकड़े गए आरोपित जयनगर थाना क्षेत्र के परसाबाद गड़गी में घर से साइबर फ्राॅड चला रहे थे। आरोपितों ने शिमला नंदनी काॅल गर्ल एस्काॅर्ट सर्विस के नाम से फर्जी साइट बना रखा था।

    इस पर इंटरनेट से डाउनलोड की गई युवतियों की फोटो व संपर्क नंबर देकर रखा गया था। इसके बाद संपर्क करने वाले लोगों को झांसे में लेकर उनसे पैसे मंगवाते थे।

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    एक साल से चला रहे ठगी का धंधा

    एसपी ने बताया कि पिछले एक वर्ष से ठगी का धंधा इन लोगों द्वारा चलाया जा रहा था। इसमें दूसरे राज्य के कई लोगों से लाखों रुपये की ठगी की गई है।

    पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। आरोपितों के बैंक डिटेल्स को भी खंगाला जा रहा है। हालांकि, अब तक इस मामले में एक भी शिकायतकर्ता सामने नहीं आया है।

    पहचान चोरी का भी मामला दर्ज

    साइबर फ्राॅड के साथ-साथ गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध पहचान चोरी का भी मामला दर्ज किया गया है। आरोपितों द्वारा इंटरनेट से युवतियों की फोटो डाउनलोड कर फ्राॅड किया जा रहा था। पैसा यूपीआई सर्विस व बार कोड के जरिये मंगवाया जाता था।

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