सफाईकर्मियों को वाहन खरीदने के लिए सब्सिडी देगी सरकार, यहां जानें नई स्कीम में और क्या मिलेगा लाभ?
जुगसलाई नगर परिषद सफाई कर्मियों को वाहन खरीदने के लिए सब्सिडी प्रदान करेगी जिनमें सैप्टिंग टैंक की सफाई करने वाले शामिल हैं। इसे नमस्ते भारत योजना के नाम से जाना जाता है। कार्यपालक पदाधिकारी संदीप पासवान के अनुसार इस योजना का उद्देश्य सफाई कर्मचारियों को खतरे से बाहर लाना और गटर या सीवर की सफाई करने वाले मजदूरों की मौतों को कम करना है।

सफाई कर्मचारियों को मिलेगा विभिन्न लाभ
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संदीप पासवान ने बताया कि इसके अलावा नमस्ते योजना के तहत सफाई कर्मचारियों को कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वास्थ्य बीमा कवर और विभिन्न अन्य लाभों से जोड़ा जाएगा। जो सफाई कर्मी सेप्टिक टैंक सफाई वाहन खरीदना चाहते हैं, उन्हें सरकार द्वारा सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जाएगा। -
इस अवसर पर कार्यपालक पदाधिकारी संदीप पासवान, नगर प्रबंधक स्नेहा श्री, राजेंद्र कुमार, स्वच्छता विशेषज्ञ अमृता साक्षी आदि उपस्थित थीं।
योजना के तहत अस्पताल बनेंगे पेपरलेस
हजारीबाग में प्रधानमंत्री मोदी के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत जिले के मेडिकल कालेज अस्पताल सहित तीन अस्पतालों को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत पेपरलेस बनाने की कवायद प्रारंभ कर दी गई है।
इसे लेकर विगत दिनों आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के सहायक निदेशक सह राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव राजन कुमार की अध्यक्षता में उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के सभी सिविल सर्जन, मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक की बैठक आयोजित की गई थी।
इसके तहत पेपरलेस बनाए जाने वाले अस्पतालों में कुल छ: माड्यूल लागू किए जाएंगे। जिसमें ओपीडी माड्यूल, आईपीडी माड्यूल, बिलिंग मॉड्यूल, फार्मेसी माड्यूल, पैथोलॉजी माड्यूल और रेडियोलाजी माड्यूल शामिल है।
जानकारी के मुताबिक अस्पताल की सभी सेवाओं के पेपरलेस बनाए जाने की स्थिति में इलाज कराने अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को पर्ची लेकर डाक्टर से लेकर जांच घर और दवा दुकान का चक्कर नहीं लगाना पडेगा। हालांकि इसके लिए मरीज का आभा कार्ड होना अनिवार्य है।
वहीं, मरीज के अस्पताल पहुंचने पर वह आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के क्यूआर कोड को स्कैन करेगा। इसके बाद उसे एक टोकन नंबर मिल जाएगा। मरीज टोकन नंबर लेकर रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पहुंच कर टोकन नंबर और अपने विभाग का नाम बताएगा।
इसके बाद मरीज बिना किसी पर्ची के संबंधित डाक्टर के पास पहुंच जाएगा। वहीं टोकन के मुताबिक अपनी बारी आने पर मरीज डॉक्टर से मिलकर अपनी समस्या बताएगा। डॉक्टर मरीज के रोग के मुताबिक परामर्श देंगे।
वहीं, यदि जांच कराना आवश्यक हो तो मरीज फिर जांच घर पहुंच कर अपना टोकन नंबर बताकर डाक्टर के द्वारा बताए गए जांच करा सकता है। इसके बाद फिर मरीज की जांच की रिपोर्ट डाक्टर के पास आनलाइन पहुंच जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर मरीज को दवाएं लिखेंगे।
इसके बाद मरीज फिर दवा काउंटर पर पहुंचेगा। जहां वह अपना टोकन नंबर बताकर दवाएं प्राप्त कर लेगा। मरीजों को डॉक्टर के परामर्श के मुताबिक सभी दवाओं के सेवन की विधि भी बताई जाएगी।
इस पूरी प्रक्रिया में मरीज को कहीं भी कभी भी किसी पर्ची की आवश्यकता नहीं होगी। मरीज के उपचार संबंधी जानकारियों रिकॉर्ड कर ली जाएगी।
मरीज को यदि फिर से उसी अस्पताल या अन्य किसी अस्पताल में अपना उपचार कराना हो तो वह वहां भी आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के क्यूआर कोड को स्कैन कर अपने पिछले उपचार की जानकारी उपलब्ध कराने की सहमति देकर और उसकी तिथि एवं टोकर नंबर बताकर अपना उपचार करा सकता है।
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