Muzaffarpur News: भगवानपुर स्टेशन मास्टर निलंबित, सामने आई बड़ी वजह; शुरू हुई हाई लेवल जांच
भगवानपुर के स्टेशन मास्टर गुड्डू कुमार को निलंबित कर दिया गया है। मामला रेलवे ट्रैक पैकिंग करने वाली एमएफआइ मशीन डिरेल होने से जुड़ा है। यह कार्रवाई डीआरएम सोनपुर विवेक भूषण के आदेश पर की गई है। इस मामले में जांच जारी है और स्टेशन मास्टर की जिम्मेदारी की जांच की जा रही है। कार्रवाई से महकमे में हड़कंप मच गया है।

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। रेलवे ट्रैक पैकिंग करने वाली एमएफआइ मशीन डिरेल मामले में भगवानपुर के स्टेशन मास्टर गुड्डू कुमार को निलंबित कर दिया गया है। डीआरएम सोनपुर विवेक भूषण के आदेश पर भगवानपुर स्टेशन मास्टर को निलंबित किया गया है।
डीआरएम के आदेश के बाद उच्चस्तरीय जांच भी शुरू कर दी गई है। वैसे डिरेल होने के बाद इंजीनियरिंग, परिचालन सहित कुछ अन्य विभाग के अधिकारियों की ओर से संयुक्त रिपोर्ट भेज दिया गया। उसी के आधार पर कार्रवाई हुई है।
बता दें कि सोमवार की सुबह भगवानपुर स्टेशन पर तीन प्रकार की ट्रैक मेंटेनेंस मशीन से काम चल रहा था। इस दौरान एमएफआई मशीन का प्वाइंट सही नहीं दिया गया। इस दौरान गाड़ी चल पड़ी।
इस कारण डिरेल हुई गाड़ी
प्वाइंट्स रिवर्स के कारण गाड़ी डिरेल हो गई। सोनपुर से दुर्घटना यान गाड़ी को मंगवाया गया। तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोपहर करीब सवा दो बजे गाड़ी को उठाकर फिर से पटरी पर लाया गया।
हालांकि, इंजीनियरिंग विभाग इसको काफी छुपाने का भरसक प्रयास किया। लेकिन दूसरे अधिकारियों ने सोनपुर मंडल को सही रिपोर्ट से अवगत कराया। उसके बाद दोषी स्टेशन मास्टर को निलंबित कर दिया गया।
डीआरएम ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने पर स्टेशन मास्टर दोषी पाए जाने पर उनको निलंबित किया गया है। सोमवार को एमएफआइ डिरेलमेंट के बाद मंगलवार को काम नहीं हो सका। संभवत: बुधवार को फिर से एमएफआइ से ट्रैक मेंटेनेंस का कार्य होगा।
कारीगरी को प्लेटफार्म तो मिला, लेकिन नहीं मिली रफ्तार
उधर, रेल मंत्रालय ने लोकल फार वोकल के तहत स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए वन स्टेशन-वन प्रोडक्ट स्कीम शुरू की गई, लेकिन मुजफ्फरपुर जंक्शन के प्लेटफार्म पर स्थानीय कारीगरों की कारीगरी को रफ्तार नहीं मिल रहा है।
जंक्शन पर चूड़ी-लहठी से लेकर कई प्रकार के उत्पादों के लिए स्टाल आवंटित किए गए, लेकिन अपेक्षित बिक्री नहीं होने से दुकानदार मायूस हो रहे हैं और अब धीरे-धीरे वे दूसरे व्यवसाय की ओर जाने लगे हैं। गौरतलब है कि 2022-23 में वन स्टेशन वन प्रोडक्ट स्कीम की घोषणा की गई।
इसके मुताबिक लोकल कारीगरों, शिल्पकारों, कुम्हारों, बुनकरों और जन-जातियों को बेहतर प्लेटफॉर्म देने के लिए रेलवे स्टेशनों के प्लेटफार्म पर लोकल उत्पादों की मार्केटिंग के लिए स्टॉल लगाने की प्लानिंग की गई।
इसमें खास तौर पर खाद्य पदार्थ, हस्त शिल्प उत्पाद और कलाकृतियां आदि क्षेत्र में रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर इनका शो-केस किया जाना था।
बिक्री नहीं होने से मायूस हो रहे हैं कारीगर
सरकार की मंशा थी कि स्थानीय कामगारों को रोजगार मिलेगा, लेकिन सही तरीके से व्यवसाय उठ नहीं पाया। स्थानीय कारीगर संतोष ने लीची, लीची जूस एवं उससे बने उत्पादों के लिए भी स्टाल का आवंटन किया, लेकिन तीन-चार महीने के अंदर ही बंद हो गया। अब संतोष ने भूजा की दुकान खोली है।
इसको भी यात्रियों का प्यार नहीं मिल रहा है। उसने बताया कि अवैध वेंडर जंक्शन और आसपास में सामान बेचने चले आते हैं। इस वजह से ग्राहक उनके काउंटर तक नहीं पहुंच पाते हैं। लीची किसान उत्पाद संघ से जुड़े कृष्ण गोपाल ने बताया कि लीची का सीजन आने पर रेलवे से आग्रह कर स्टाल लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि दिल्ली, जम्मू व अन्य स्टेशनों पर स्थानीय रेल प्रशासन की ओर से उक्त दुकान मल्टीपरपस सामग्री रखने की इजाजत होती है, लेकिन ऐसी व्यवस्था इधर नहीं है। एक उत्पाद रखने से घाटा होता है और कारोबारी यहां से चले जाते हैं।
पैसेंजरों से लेना है फीडबैक
शहर के हुनरमंदों की कारीगरी प्रॉपर प्लेटफॉर्म न मिलने से वहां नहीं पहुंच पाती, जहां पहुंचने की वह हकदार होती हैं।
इसके तहत हर स्टेशन पर वहां आसपास की मशहूर कलाकारी का डिस्प्ले होगा और स्टेशन पर पहुंचने वाले पैसेंजर्स उसकी खरीदारी भी कर सकेंगे।
इतना ही नहीं, स्टेशन पर खास प्रोजेक्ट के दौरान पैसेंजर्स का फीडबैक भी लेना है, लेकिन स्थानीय रेल प्रबंधन अब तक इसे बेहतर बनाने में सफल नहीं हो पाया है।
मुजफ्फरपुर स्टेशन पर सभी ओएसओपी स्टॉल कार्यात्मक हैं। स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को इसका लाभ मिल रहा है। - विवेक भूषण सूद, डीआरएम, सोनपुर, पूमरे।
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