Jharkhand Nagar Nikay Chunav: निकाय चुनाव पर संकट के बादल! ट्रिपल टेस्ट की उलझन में फंसी हेमंत सरकार
झारखंड में नगर निकाय चुनावों की राह में ट्रिपल टेस्ट की गुत्थी उलझी हुई है। सरकार ने उच्च न्यायालय को शपथ पत्र में चुनाव कराने के लिए 16 मई 2025 तक का समय मांगा था लेकिन अभी तक सिर्फ 21 जिलों में ही ट्रिपल टेस्ट का सर्वे पूरा हुआ है। ऐसे में चुनाव समय पर हो पाएंगे या नहीं यह सवाल बना हुआ है।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। झारखंड में नगर निकाय चुनाव की राह में ट्रिपल टेस्ट की गुत्थी सुलझने का नाम नहीं ले रही।
विधानसभा में जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय ने सोमवार को सरकार से सवाल किया कि 16 मई, 2025 को चार माह की वह अवधि पूरी हो रही है, जो सरकार ने उच्च न्यायालय को शपथ पत्र में चुनाव कराने के लिए मांगी थी। मगर अभी तक सिर्फ 21 जिलों में ही ट्रिपल टेस्ट का सर्वे पूरा हुआ है।
ऐसे में क्या सरकार समय पर चुनाव करा पाएगी, या फिर अदालत से एक बार फिर समय मांगने की नौबत आएगी? विभागीय मंत्री ने भरोसा तो दिया, लेकिन हकीकत यह है कि ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया अधूरी होने से चुनाव फिर टलने की आशंका प्रबल हो चली है।
ट्रिपल टेस्ट क्या है?
ट्रिपल टेस्ट एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके तहत नगर निकाय चुनाव से पहले सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था तय की जाती है।
इसके तीन चरण होते हैं- सर्वेक्षण, डेटा विश्लेषण और अंतिम निर्णय। यह सुनिश्चित करता है कि पिछड़े वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिले।
मगर इस जटिल प्रक्रिया में समय और संसाधन दोनों की भारी आवश्यकता होती है, जो झारखंड सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है।
चार माह में कितना हुआ काम?
सरयू राय ने विधानसभा में अल्पसूचित प्रश्न के जरिए सरकार से पूछा कि उच्च न्यायालय को दिए गए शपथ पत्र में 16 जनवरी से चार माह के भीतर चुनाव कराने का वादा किया गया था।
अब जबकि 16 मई नजदीक है, राज्य के 24 में से सिर्फ 21 जिलों में ही सर्वे पूरा हो सका है। तीन जिलों में सर्वे अब भी अधूरा है।
इसके बाद भी ट्रिपल टेस्ट का अंतिम निर्णय लेने के लिए सरकारी विभागों को कई प्रक्रियाओं से गुजरना बाकी है। ऐसे में समय पर चुनाव की घोषणा कैसे संभव होगी, यह सवाल अनुत्तरित है।
सरकार का जवाब: भरोसा या बहाना
- विभागीय मंत्री ने विधानसभा में दावा किया कि हर हाल में ट्रिपल टेस्ट पूरा कर समय पर चुनाव करा लिया जाएगा। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो उच्च न्यायालय से और समय मांगा जाएगा।
- यह दोहरा रुख नगर निकाय चुनाव के भविष्य पर संदेह पैदा करता है। विधायक सरयू राय ने चेतावनी दी कि यदि ट्रिपल टेस्ट समय पर पूरा नहीं हुआ, तो पंचायत चुनाव की तरह नगर निकाय चुनाव भी ठंडे बस्ते में जा सकते हैं।
आगे क्या?
नगर निकाय चुनाव की घोषणा आमतौर पर मतदान से एक माह पहले होती है। यानी 16 अप्रैल तक तारीख तय हो जानी चाहिए। मगर ट्रिपल टेस्ट की धीमी गति को देखते हुए यह लक्ष्य असंभव-सा लगता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को या तो प्रक्रिया में तेजी लानी होगी, या फिर अदालत के सामने समय विस्तार की गुहार लगानी पड़ेगी।
जनता के बीच बढ़ती बेचैनी और विपक्ष के तीखे सवालों के बीच सरकार की कसौटी अभी बाकी है। नगर निकायों का यह चुनाव न केवल स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने के लिए जरूरी है, बल्कि यह सरकार की प्रशासनिक क्षमता का भी परिचायक है।
क्या झारखंड की जनता को समय पर चुने हुए प्रतिनिधि मिलेंगे, या ट्रिपल टेस्ट की उलझन में यह सपना एक बार फिर अधूरा रह जाएगा? समय ही इसका साक्षी होगा।
यह भी पढ़ें-
झारखंड में कब होगी जाति गणना? कांग्रेस के सवाल पर सदन में आया हेमंत सरकार का जवाब
झारखंड में गर्मी ने दी दस्तक, हेमंत सरकार के सामने खड़ी हुई नई चुनौती
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।