श्रीनगर-जम्मू हाईवे लगातार बंद रहने ने उड़ी फल उत्पादकों की नींद, बोले- हाईवे जल्द न खुला तो होगा करोड़ों का नुकसान
श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे के पाँच दिनों से बंद होने के कारण घाटी का बागबानी क्षेत्र ठप हो गया है। हाईवे पर फलों से लदे सैकड़ों ट्रक फंसे होने से उत्पादकों को करोड़ों रुपये के नुकसान का डर है। बागों में नाशपाती और सेब सड़ रहे हैं मंडियों में फलों की भरमार है। फलउत्पादक प्रशासन से हाईवे खुलवाने और मुगल रोड पर ट्रकों को अनुमति देने की गुहार लगा रहे हैं।

जागरण संवाददाता, श्रीनगर। घाटी की जीवन रेखा कहलाने वाला श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे पांच दिनों से बंद है। हाईवे पर विभिन्न स्थानों पर सैकड़ों फलों से लदे ट्रक फंसे हुए हैं। इससे घाटी का बागबानी क्षेत्र फिलहाल ठप पड़ गया है। उत्पादकों को करोड़ों रुपये के नुकसान का डर सता रहा है।
आपको बता दें कि घाटी में फलों की कई किस्मों जिनमें बागगोशा नाशपती, गालामस्त व लाल गाला सेब आदि की कटाई का मौसम ज़ोरों पर है। सोपोर, शोपियां, पुलवामा और श्रीनगर की मंडियां परिवहन के इंतज़ार में जल्दी खराब होने वाले फलों की इस उपज से भरी पड़ी हैं।
इन फलों से लदे ट्रक कई दिनों से हाईवे पर रुके हुए हैं जबकि बागों में भी बड़ी मात्रा में उत्पादकों ने फलों से लदी पेटियां जमा कर रखी हैं। वे बेसब्री से श्रीनगर-जम्मू हाईवे खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
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करोड़ों का होगा नुकसान
उत्पादकों का कहना है कि हर बीतता दिन उन्हें आर्थिक नुकसान के करीब ले जा रहा है। अगर हाईवे जल्द नहीं खुला तो घाटी के फल उत्पादकों व बागवानी विभाग को करोड़ों का नुकसान होगा। कश्मीर घाटी फल उत्पादक-सह-विक्रेता संघ के अध्यक्ष बशीर अहमद बशीर ने कहा, यह हमारे लिए किसी आपदा से कम नहीं है। हमारे ट्रक कई दिनों से राजमार्ग पर फँसे हुए हैं, मंडियाँ खचाखच भरी हैं और बागों में भी फलों की पेटियां पड़े पड़े सड़ने लगी हैं।
प्रशासन से प्रभावी कदम उठाने की अपील
बशीर ने कहा, अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो करोड़ों का नुकसान होगा। उन्होंने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई करने का आग्रह करते हुए कहा कि सरकार को श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर फँसे फलों के ट्रकों को प्राथमिकता के आधार पर आवाजाही की अनुमति देनी चाहिए। हम यह भी माँग करते हैं कि मुगल रोड पर 6 और 10 टायर वाले ट्रकों को चौबीसों घंटे चलने की अनुमति दी जाए क्योंकि वर्तमान में इस मार्ग से अनुमति प्राप्त छोटे 6 पहिया वाहन फलों की बड़ी खेप नहीं ले जा सकते और न ही सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित कर सकते हैं।
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बागों में ही पड़े-पड़े सड़ रहे फल
शोपियां के एक बागवान मुहम्मद सुबहान ने कहा कि उनकी आजीविका खतरे में है। सुबहान ने कहा, मैंने इस साल अपना सब कुछ लगा दिया। मेरे नाशपाती और सेब भेजने के लिए तैयार हैं, लेकिन राजमार्ग बंद होने से यह मेरे बागों में ही पड़े पड़े सड़ रहे हैं। सुबहान ने कहा,एेसे में इन फलों की कीमत दिन-ब-दिन कम होती जा रही है। अगर यही हाल रहा, तो फसल बाज़ार पहुँचने से पहले ही सड़ जाएगी।
आर्थिक नुकसान होना तय
सोपोर फल मंडी के एक अन्य व्यापारी अब्दुल समद ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में हुई बंपर फसल ने हमारे व्यापार को पहले ही प्रभावित कर दिया था। अब रही सही कसर राजमार्ग के बंद रहने ने पूरी की। समद ने कहा, अगर हमारे ट्रक कल से चलना शुरू भी कर दें, तो भी हमें जम्मू-कश्मीर के बाहर के बाज़ारों में पहले से ही भरी पड़ी सस्ती खेपों से प्रतिस्पर्धा करनी होगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा असर
आपको जानकारी हो कि फल उत्पादन घाटी की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाची है और बागवानी उद्योग पर सात लाख से ज़्यादा परिवार निर्भर हैं। उत्पादकों ने चेतावनी दी है कि इस सीज़न की उपज के बड़े पैमाने पर खराब होने से पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा, जिसका असर किसानों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और मज़दूरों पर समान रूप से पड़ेगा।
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हाईवे पर मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर जारी
वहीं अधिकारियों की माने तो मार्ग के प्रभावित हिस्सों की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर चल रहा है अलबत्ता उन्होंने इसे पूरी तरह से खोलने की कोई समय-सीमा नहीं बताई। इस बीच, उत्पादक सरकार पर इस मुद्दे को एक आपात स्थिति के रूप में देखने का दबाव बना रहे हैं। फल उत्पादक सह- विक्रेता संघ के निदेशक बशीर अहमद बशीर ने कहा,समय बीतता जा रहा हैअगर अगले दो दिनों में ट्रक नहीं चले, तो हमारे फल उद्योग को अपूरणीय क्षति होगी।
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