यमन में फंसी नर्स प्रिया के बचाव में आई महबूबा, विदेशमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग, ब्लड मनी के लिए मांगा सहयोग
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से यमन में फांसी की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को बचाने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने लोगों से ब्लड मनी जुटाने के लिए दान करने की अपील की है। निमिषा प्रिया को 2017 में अपने बिजनेस पार्टनर की हत्या के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी।

डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। यमन में फांसी की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के बचाव में जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती भी सामने आई हैं। उन्होंने भारतीय नर्स को बचाने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर से हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए लोगों से निमिषा प्रिया की क्षमादान के लिए आवश्यक ब्लड मनी जुटाने के लिए खुले दिन से दान करने की भी अपील की।
केरल के पलक्कड़ जिले की 38 वर्षीय नर्स निमिषा प्रिया पर वर्ष 2017 में अपने यमनी बिजनेस पार्टनर की हत्या का आरोप लगा था। साल 2020 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई और 2023 में उनकी आखिरी अपील भी खारिज हो गई। अब वह यमन की राजधानी सना की जेल में बंद हैं।
एक्स पर एक पोस्ट में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी प्रधान महबूबा ने कहा कि निमिषा प्रिया नामक एक भारतीय नर्स को 16 जुलाई को यमन में फांसी की सजा सुनाई जा रही है। उसके साथ कथित तौर पर गंभीर दुर्व्यवहार किया गया जबकि उसने खुद को बचाने की कोशिश में उससे एक व्यक्ति की मौत हो गई।
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उन्होंने कहा कि प्रिया को अब मौत की सजा का सामना करना पड़ रहा है और यमनी कानून के अनुसार अब केवल ब्लड मनी के माध्यम से ही यह सजा माफ हो सकती है।
महबूबा ने कहा कि मैं डॉ एस जयशंकर से तुरंत हस्तक्षेप करने का अनुरोध करती हूं। दुर्भाग्य से अभी तक आवश्यक धनराशि और कूटनीतिक दबाव, दोनों ही अपर्याप्त हैं। महबूबा ने इस बीच सभी से खासकर महिलाओं से दिल खोलकर दान देने की अपील की ताकि नर्स का परिवार क्षमादान के लिए पर्याप्त धनराशि जुटा सके।
आपको जानकारी हो कि शरिया कानून के मुताबिक मृतक के परिवार को 'ब्लड मनी' देकर निमिषा को माफी दिलाने का रास्ता खोजा जा सकता है। अगर मृतक का परिवार इस पैसे को स्वीकार कर लें तो निमिषा की सजा माफ हो सकती है।
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट भी नर्स निमिषा प्रिया मामले में सुनवाई के लिए राजी हो गया है। निमिषा को यमन में फांसी की सजा 16 जुलाई को बताए गए हैं जबकि सुप्रीम कोर्ट याचिका की सुनवाई 14 जुलाई को करेगी। याचिका में भारत सरकार से भी मांग की गई है कि वह कूटनीतिक रास्तों का इस्तेमाल कर निमिषा की जान बचाए।
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